गांवों में रात बिताने के फरमान पर सुस्ती, अब खुद मोर्चा संभालेंगे CM मोहन यादव

विधायकों और मंत्रियों की योजना जमीन पर नहीं उतरी, मुख्यमंत्री जिलों में रुककर लेंगे फीडबैक
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था का फीडबैक लेने के लिए गांवों में रात्रि विश्राम की रणनीति अब तक अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है। सत्ताधारी दल के विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में और मंत्रियों को प्रभार वाले जिलों में रात बिताने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, करीब ढाई साल में दो बार बनी इस योजना का पालन सीमित जनप्रतिनिधियों ने ही किया। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद जिलों में रात बिताकर व्यवस्था का जायजा लेंगे। उन्होंने हाल ही में बालाघाट के जंगलों में रात्रि विश्राम किया था। इससे पहले बैतूल के कुकरू- खामला में आदिवासियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। रविवार को वे बड़वानी में भी रात बिताकर लौटे।
जिम्मेदारियों के बीच जनप्रतिनिधियों की बढ़ी मुश्किलें-गांवों में रुकने के निर्देशों को लेकर कुछ मंत्रियों के सामने समय प्रबंधन की चुनौती भी है। एक मंत्री के मुताबिक, कैबिनेट बैठकों, प्रभार वाले जिलों के दौरों, प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने और अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के बीच सक्रिय रहने जैसी जिम्मेदारियों के कारण गांवों में रात बिताने के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है। मुख्यमंत्री की बैठकों के दौरान मिलने वाले फीडबैक में सामने आने वाली कमियों को 48 घंटे के भीतर दूर करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सूत्रों ने दी है। इस पहल का उद्देश्य सरकार और आम लोगों के बीच सीधा संवाद बढ़ाना है।
अधिकारियों के रात्रि विश्राम पर भी उठे सवाल-करीब छह महीने पहले कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को भी क्षेत्र में जाकर रात बिताने के निर्देश दिए गए थे। शुरुआत में कुछ अधिकारियों ने गांवों का दौरा किया, लेकिन यह पहल कई जगह औपचारिकता तक सीमित रहने की चर्चा रही। उज्जैन के एक आईएएस अधिकारी की खटिया पर चश्मा पहने सोते हुए तस्वीर भी वायरल हुई थी। अब मुख्यमंत्री के सीधे निरीक्षण से प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद की जा रही है।


