जब किसी का मन बिगड़ कर कालिया नाग बन जाता वह किसी पर फुंक मारता झगड़ता पर जब कृष्ण रुपी ज्ञान प्राप्त कर लेता तो व्यक्ति मानव बन जाता है – संत श्री श्वासानंद जी

जब किसी का मन बिगड़ कर कालिया नाग बन जाता वह किसी पर फुंक मारता झगड़ता पर जब कृष्ण रुपी ज्ञान प्राप्त कर लेता तो व्यक्ति मानव बन जाता है – संत श्री श्वासानंद जी

सीतामऊ।भागवत में भगवान 24 अवतारों का वर्णन है। राक्षस कोई सिंग वाले नहीं होते हैं।उनका विवेक नष्ट होकर असामाजिक हो जाते हैं। शुद्ध वृत्ति ईश्वर से मिलाती और प्रेम सिखाती विशुद्ध वृत्ति राक्षक बनने कि ओर ले जाती और राग द्वेष छल कपट सीखाती है। समाज परिवार से दुर कराती है। उक्त ज्ञानामृत पोरवाल मांगलिक भवन सीतामऊ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस कि कथा श्रवण कराते हुए संत श्री श्वासानंद जी महाराज ने कही।संत श्री ने आगे कहा कि कंश के यहा पर भविष्यवाणी होती है कि तेरा काल का जन्म हो चुका है। भगवान ने रत्नमाला को माला कहा वही रत्नमाला दुसरे जन्म में पूतना बनी।
कर्म अच्छे करो, हिल मिलकर रहो परिवार के साथ रहो साथ भोजन करो वह घर स्वर्ग बन जाता है। जिस घर समाज में स्वार्थ राग द्वेश झगड़ना, पिता से बेटा झगड़े और शराब मांस जुए सट्टे में लग जाने वाले नर्क में रहता या भोगता है। जीवन में कमाया खाया और कुछ नहीं किया वह जीवन नहीं वह तो समय बिताना है। सुबह उठे दिनचर्या में लगे भोजन किया दुकान खेत प्रतिदिन वाले काम में लगें रहते के अलावा परिवार में भी दुर हो गया तो फिर क्या है इस जीवन का।
कंश अपने काल से भयभीत होने लगा और बार बार सपने में कृष्ण को देखने लगा उसने उस बालक को मारने के लिए 10 हजार हाथियों का बल का वरदान में प्राप्त कर लिया। फिर भी डर कि वजह से कंश मारने नहीं गया और कंश ने अपनी बहिन पूतना का आह्वान किया 28 हाथ ऊंचाई 5 फिट चोड़ाई और 5 फिट मोटी धम धम कर आई पुतना जिसमें 10 हजार हाथियों का बल था।
संत श्री ने कहा कि जिसमें बाहर का चेहरा दिखाई दे उसे कांच आईना कहते पर जो अंदर का शरीर दिखा दे वो है कथा का ज्ञान,
जिसने अपना जीवन समय खाने कमाने में ही कर दिया और कर रहे हैं।वह सब यही रह जायेगा। जिसने भगवान भजन कीर्तन मे थोड़ा भी समय लगा दिया उसका जीवन धन्य हो जाता है।शबरी ने अपने मन को सजाया संवारा साफ कर लिया तो भगवान उसके दर पर गये।
जब भगवान के यहां से आप आए जन्म हुआ था तब आपका शरीर साफ स्वच्छ था संसार में जाकर इस चुनर रुपी शरीर को गंद कर लिया। कितने भी एकादशी पशुपतिनाथ व्रत पुजा पाठ कर लो जब तक कपट मन गंदा है तो सब व्यर्थ है उपास व्रत पूर्ण नहीं होता है। उसे ईश्वर नहीं चाहता गदा घोड़ सुवर बनकर घुमना पड़ेगा और नर्क भोगना पड़ेगा। मंदिर और सार्वजनिक स्थानों पर लिखा होता है कि शराब पीकर आना मना है तो उसके वहा भी कैसे स्वीकार हो सकतें हैं।
पुतना यशोदा कि काका कि लड़की और कान्हा कि मौसी जिसका मन गंदा है और बाहर से दिखावा करते हुए कान्हा को कालकुट जहर लगाकर मारने आई और नंद बाबा के यहां पहुंच कर कान्हा को गोद में उठा कर दुध पिलाने लगी कान्हा ने दुध पीकर पूतना का वध किया।उखल प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जो आत्मा धर्म के बंधन से बंध जाती वो परमात्मा को प्राप्त कर गो लोक धाम को चले जाते हैं।
संत श्री ने कहा कि यशोदा 21 टुकड़े में डोर को गठान लगाकर बाध रही तो कान्हा को नहीं बांध पा रही तो कान्हा ने कहा मां एक हजार बार बांधना बंध जाऊंगा पर डोर बिना गठान से बांधना संत श्री ने कहा कि जब गठान लग जाती है तो रिश्ते और आत्मियता से दुरी हो जाती घर में शांति खत्म हो जाती है रामायण शिक्षा दे रही है कि राम सीता ने त्याग किया। कान्हा प्रेम के बंधन राधा नाम कि डोरा से बांधती है। राधा मतलब धारा जब प्रेम कि धारा बहती है तो वहां सब बंध जाती है।जिस प्रकार से एक बगीचे में अलग-अलग फुलों से एक माला बनाकर गोविंद को पहनाई जाती है तो सुंदर दिखाई देती है। ऐसे ही जिस परिवार में प्रेम के बंधन कि एकता है वह परिवार वृंदावन स्वर्ग में रह रहा है। कृष्ण से जीवन जीने कि कला सिखाती है।उखल से धनपति कुबेर के दोनों पुत्रो का उद्धार किया।
किसी ठोस को तोड़ दो या टुटी डोर को जोड़ दो उसमें गांठ रहतीं हैं। संत श्री ने कथा में बाल लिलाओ और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए घर घर से मित्रों कि टोली के साथ माखन खाने गोप गोपियों से प्रेम प्रसंग का श्रवण कराया।
संत श्री ने कहा कि जब मंदिर जाते हैं तो मंदिर में विराजमान भगवान के रुप निखारना पूजा बाद में करना, घर पर भी भगवान को निहारना उनको देखना, एक दिन भगवान के दिव्य रुप के दर्शन हो जाएगा। गोपी भानुमति जिसका मतलब सुर्य जैसी तेज मति बुद्धि वो गोपी गेहूं बिन रही। इतने में कान्हा कि टोली माखन खाने घर में गये माखन खाने चढ़े तों मटकी गिरी फुट गई। भानुमति ने घर में देखा तो कान्हा मिला उसे पकड़ कर यशोदा के वहा ले गई।
संत श्री ने कहा कि मनसुखा मित्र मंडली के साथ गेंद खेल खेलने का प्रसंग कालिया नाग को नाथ कर यमुना को विश मुक्त किया। प्रसंग का अभिप्राय समझाते हुए संत श्री ने कहा कि जब मन बिगड़ जाता है तो कालिया नाग बन जाता है। अपना पराया नहीं देखता हर किसी पर फुंकार मारता डसता मतलाब अपशब्द बोलता झगड़ता है और शरीर को कालिंदी विषयुक्त बना देता है। और जब श्री कृष्ण रुप ज्ञान कि जब मनुष्य में जागृति आ जाती है।तो मनुष्य दानव से मानव विमुक्त हो जाता है।
कथा के अवसर पर रुक्मणी श्री कृष्ण विवाह प्रसंग पर बहिन इशिता राठौड़ और यश्वी ने रुक्मणी श्रीकृष्ण स्वरुप में कथा व्यास पीठ पर पहुंची जहां पर श्रद्धालुओं ने फुलों कि बर्षा कर स्वागत अभिनंदन किया।
कथा में पितृ पूजन एवं महा आरती व कथा श्रवण लाभ में साध्वी चंपापुरी, साध्वी जयमाला वैष्णव , ब्रह्माकुमारी कृष्णा दीदी, प्रिती दीदी गांव सरपंच कोमलसिंह सिसौदिया महिपाल सिंह सिसौदिया , वरिष्ठ पत्रकार रामेश्वर जामलिया, वरिष्ठ व्यापारी मांगीलाल उदिया, राधेश्याम घाटिया, सत्यनारायण सोनी काका, रोहित सोनी, संजय राधा सोनी, मुक्ति धाम समिति अध्यक्ष मुकेश चौरड़िया सचिव संजय चौहान भाजपा नेता जितेंद्र सिंह तोमर,रमेश गुप्ता, दिनेश पोरवाल साताखेड़ी, घनश्याम कामरिया रमेश जोशी, सहायक सचिव छत्रपाल सिंह राठौर, हेमंत शर्मा, महेश धनगर पाटीदार, भरत व्यास आलोट के अधिवक्ता व संत श्री के शिष्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु नागरिक उपस्थित रहें।



