रतलामताल

राजनीति और समाजसेवा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए नपं अध्यक्ष मुकेश परमार

राजनीति और समाजसेवा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए नपं अध्यक्ष मुकेश परमार

  • निरंतर नगर विकास के प्रयासों के साथ सबको साथ लेकर चलने की कार्यशैली
  • ताल नगर के चहुंमुखी विकास और जनसरोकारों को लेकर नगर परिषद अध्यक्ष मुकेश परमार के विगत चार वर्षों के कार्यकाल पर एक नजर

ताल ब्यूरो चीफ शिवशक्ति शर्मा

ताल। नगर परिषद अध्यक्ष मुकेश परमार के विगत चार वर्षों के कार्यकाल को नगर विकास, जनसरोकार, सामाजिक सहभागिता और आमजन से संवाद की दृष्टि से देखा जा सकता है। राजनीति और समाजसेवा के संस्कार उन्हें पारिवारिक विरासत में मिले हैं। उनके पिता मीसाबंदी मांगीलाल परमार के सार्वजनिक जीवन और संस्कारों का प्रभाव उनके व्यक्तित्व, आचरण एवं कार्यशैली में दिखाई देता है। वहीं उनके बड़े भाई राजेश परमार जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में मिले पारिवारिक अनुभवों ने भी उनके सार्वजनिक जीवन को दिशा प्रदान की है।

मुकेश परमार के कार्यकाल में विकास कार्यों के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को भी महत्व दिया गया। उनका प्रयास रहा कि नगर के विभिन्न वर्गों, वरिष्ठजनों और युवाओं को एक साथ जोड़कर सामूहिक सहभागिता का वातावरण बनाया जाए। यही कारण है कि दशहरा उत्सव, होली उत्सव, झूला एकादशी सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में आमजनों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

पूर्व में नगर में आयोजित वालीबॉल टूर्नामेंट सहित विभिन्न आयोजनों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। इन आयोजनों में युवाओं के उत्साह के साथ वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन और आम नागरिकों की सहभागिता सामने आई। सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को सामूहिक स्वरूप देने की यह कार्यशैली नगर की परंपराओं और सामाजिक एकजुटता को मजबूती प्रदान करने वाली रही।

मूलभूत सुविधाओं पर रहा जोर

नगर विकास के मोर्चे पर सड़क, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े विषयों को लेकर भी नगर परिषद स्तर पर प्रयास किए गए। आमजन की समस्याओं को सुनना, संबंधित विभागों के साथ समन्वय करना तथा उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

मुकेश परमार की कार्यशैली में केवल घोषणाओं के बजाय नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की दिशा में प्रयास करने पर जोर दिखाई देता है। जनप्रतिनिधि के रूप में आमजन से निरंतर संवाद और विभागीय समन्वय को उन्होंने महत्वपूर्ण माना।

वरिष्ठों का मार्गदर्शन, युवाओं की सहभागिता

उनके सार्वजनिक जीवन की एक प्रमुख विशेषता वरिष्ठजनों को साथ लेकर चलने और युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास रहा है। युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना तथा वरिष्ठजनों के अनुभव का लाभ लेना उनके कार्यकाल की उल्लेखनीय विशेषताओं में शामिल रहा।

राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच कृषक जीवन से उनका जुड़ाव भी उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण पक्ष है। कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़ाव श्रम, अनुशासन तथा जमीन से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यही वजह है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रियता के बावजूद आमजन से सहज संवाद उनकी कार्यशैली का हिस्सा बना रहा।

चार वर्ष—जिम्मेदारी, जनसरोकार और सहभागिता की यात्रा

कुल मिलाकर नगर परिषद अध्यक्ष के रूप में मुकेश परमार का चार वर्षीय कार्यकाल विकास कार्यों, नागरिक समस्याओं, सामाजिक आयोजनों और जनसहभागिता के प्रयासों की यात्रा के रूप में देखा जा सकता है। अब उनके कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण अपेक्षा उन नागरिकों से जुड़ी है, जिन्होंने अवैध घोषित कॉलोनियों में भूखंड क्रय किए हैं।

इन भूखंडों के नगर परिषद में नामांतरण का विषय लंबे समय से संबंधित लोगों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। अध्यक्ष मुकेश परमार द्वारा कार्यकाल पूर्ण होने से पहले नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने का आश्वासन दिया गया है। ऐसे में संबंधित नागरिकों की निगाहें अब इस कार्य के क्रियान्वयन पर टिकी हैं। यदि यह प्रक्रिया नियमानुसार पूर्ण होती है तो प्रभावित भूखंडधारकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण राहत का विषय होगा।

आने वाले समय में नगर विकास से जुड़े शेष कार्यों और नागरिकों की अपेक्षाओं को किस तरह पूरा किया जाता है, यह उनके कार्यकाल के मूल्यांकन का महत्वपूर्ण आधार रहेगा।

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