मिशन-2028 : संघ के ‘संकटमोचक’ चंद्रशेखर बने मप्र भाजपा के नए संगठन महामंत्री

मिशन-2028 : संघ के ‘संकटमोचक’ चंद्रशेखर बने मप्र भाजपा के नए संगठन महामंत्री
7 साल राजस्थान और फिर तेलंगाना के बाद अब मध्य प्रदेश में चंद्रशेखर की एंट्री
सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बिठाने की बड़ी चुनौती, संघ के हैं पूर्णकालिक प्रचारक
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश संगठन में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल कर दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दिग्गज और बेहद कड़क रणनीतिकार माने जाने वाले चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश भाजपा का नया प्रदेश संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया है।
दिल्ली मुख्यालय से जारी इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह बदलाव डॉ. मोहन यादव सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और आगामी मिशन-2028 (विधानसभा चुनाव) की जमीन तैयार करने के लिए किया गया है।
*क्यों खास है चंद्रशेखर का प्रोफाइल? ‘कम बोलना, ज्यादा सुनना’ ही है यूएसपी*
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले चंद्रशेखर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक हैं। भाजपा के भीतर उन्हें बेहद शांत, अनुशासनप्रिय और ‘लो-प्रोफाइल’ रहकर बड़ा काम करने वाला नेता माना जाता है।
*राजस्थान में बनाया रिकॉर्ड :* चंद्रशेखर अगस्त 2017 में राजस्थान के संगठन महामंत्री बने थे। वे वहां करीब 7 साल तक इस पद पर रहे, जो राजस्थान भाजपा के इतिहास में एक रिकॉर्ड है।
तेलंगाना में संभाला मोर्चा :*
राजस्थान के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें दक्षिण भारत में पार्टी के विस्तार के लिए तेलंगाना भेजा था, जहां उन्होंने बूथ स्तर पर नए समीकरण खड़े किए।
*यूपी में मजबूत की थी जमीन :*
इससे पहले वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में भी अपनी सांगठनिक क्षमता साबित कर चुके हैं।
*चंद्रशेखर के सामने मप्र में 3 बड़ी चुनौतियां*
सत्ता और संगठन में तालमेल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सरकार के मंत्रियों के साथ संगठन का बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
गुटबाजी पर लगाम : मध्य प्रदेश भाजपा में सीनियर नेताओं और नए चेहरों के बीच अंदरूनी खींचतान को शांत रखना, संघ के इस रणनीतिकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी।
कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा : सत्ता आने के बाद सुस्त पड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को एक बार फिर सक्रिय करना और नए अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ मिलकर नई टीम खड़ी करना।

