मंदसौर पुलिस की बड़ी सफलता: 5 राज्यों में आतंक मचाने वाली बागरिया गैंग का पर्दाफाश, 20 लाख का मशरूका बरामद…
मंदसौर पुलिस की बड़ी सफलता: 5 राज्यों में आतंक मचाने वाली बागरिया गैंग का पर्दाफाश, 20 लाख का मशरूका बरामद…
मंदसौर। (कमलेश शर्मा) पुलिस ने 5 राज्यों में लगातार नकबजनी की वारदातों को अंजाम देने वाली कुख्यात बागरिया गैंग का किया पर्दाफाश। पुलिस ने 5 राज्यों में नकबजनी की 17 वारदातें करने वाली कुख्यात अंतर्राज्यीय बागरिया गैंग के 6 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 20 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और चोरी में इस्तेमाल औजार बरामद किए।
मंदसौर (SP) विनोद कुमार मीणा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टी.एस. बघेल, सीएसपी जितेन्द्र भास्कर एवं एसडीओपी (ग्रामीण) कीर्ति बघेल के मार्गदर्शन में कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौर तथा नाहरगढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक वरुण तिवारी की टीम ने तकनीकी व साइबर सेल की मदद से गैंग को दबोचा।
पुलिस के अनुसार 18 जुलाई 2026 को थाना कोतवाली में मकान का ताला तोड़कर नकदी एवं सोने-चांदी के जेवर चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। मामले में थाना कोतवाली मंदसौर में अपराध क्रमांक 465/2026 धारा 305(ए), 331(4) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने बागरिया गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें इंदौर, रतलाम, आगरा, राजसमंद, नाथद्वारा, उदयपुर, मालेगांव, धुलिया, दिल्ली और गुरुग्राम सहित विभिन्न स्थानों पर 17 चोरी की वारदातों का खुलासा हुआ। इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने शिवराम उर्फ हनुमान पिता लादूराम बागरिया निवासी ग्राम देवरिया कला जिला अजमेर, सांवरा पिता रमेश बागरिया निवासी चंपानेरी जिला अजमेर, सूरज पिता रमेश बागरिया निवासी चंपानेरी, जिला अजमेर, मंदसौर बढ़िया उर्फ सांवरा निवासी ग्राम कुसायता, उमराव पिता लादूराम लोहार निवासी कोटिया जिला भीलवाड़ा, हाल मुकाम विजयनगर ब्यावर और कालूराम पिता रतनलाल बागरिया निवासी चंपानेरी जिला अजमेर को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदातों में इस्तेमाल, 02 टॉमी, 01 इलेक्ट्रॉनिक कटर, 02 ग्लव्स, 01 प्लास्टिक प्लास जब्त किया है।
यह गिरोह मुख्य रूप से सूने मकानों की रेकी कर ताले तोड़ता था। वारदात को अंजाम देने के लिए बदमाश इलेक्ट्रॉनिक कटर, टॉमी और प्लास का इस्तेमाल करते थे ताकि अलमारी व दरवाजे बिना किसी शोर-शराबे के तुरंत काटे जा सकें।



