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शुद्ध और पवित्र भाग से दान करना चाहिए – स्वामी श्री सनिष्ठानंद जी महाराज

शुद्ध और पवित्र भाग से दान करना चाहिए – स्वामी श्री सनिष्ठानंद जी महाराज
मंदसौर। श्री केशव सत्संग भवन खानपुरा में परम पूज्यपाद 1008 स्वामी श्री सनिष्ठानंद जी महाराज का दिव्य चातुर्मास अध्यात्म सत्संग का भव्य आयोजन 29 जुलाई से 26 सितंबर तक किया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन स्वामी जी द्वारा प्रात: 8.30 से 10 बजे तक शिव महापुराण के गूढ़ रहस्यों पर आधारित आध्यात्मिक प्रवचन दिये जा रहे है।
27 अगस्त गुरूवार को धर्मसभा में श्री सनिष्ठानंद जी महाराज ने बताया कि दान की अपनी ही एक अलग महिमा है हमारे शास्त्रों में दान के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है दान करने से धन, वैभव, ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। लेकिन दान, पूजा पाठ शुद्ध और पवित्र भावों के साथ करना चाहिए शरीर भी शुद्ध होना चाहिए और आंतरिंक आत्मा की भी शुद्धी होना चाहिए। दान, पुण्य, पूजा पाठ सभी के लिए शुद्धता की बेहद आवश्यकता है। स्वामी जी ने बताया कि धार्मिक कार्य कुछ भी करें उसमें शुद्ध और पवित्रता होना ही चाहिए हमें प्रतिदिन ईश्वर की पूजा करना चाहिए गृहस्थ जीवन में रहते हुए यदि रोज पूजा नहीं करो सकों तो कम से कम वर्ष में कुछ विशेष तिथियां आती है उन पर तो जरूर ईश्वर की पूजा करना चाहिए इसका हमारे जीवन में गहरा प्रभाव पडता है।
स्वामी जी ने बताया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए हमें तपस्या और दान जरूर करना चाहिए जो व्यक्ति जैसा संपन्न हो वैसा दान करना चाहिए दान करने से हमें इसका तत्काल लाभ मिलता है। आपने बताया कि हमें शिव और शक्ति दोनो की उपासना करना चाहिए भगवान शिव के साथ मां भगवती की भी आराधना करना चाहिए और दोनों का स्वरूप हमें शिवलिंग में एक साथ मिल जाता है इसलिए शिवलिंग की पूजा की जाती है। इस अवसर पर बडी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।
27 अगस्त गुरूवार को धर्मसभा में श्री सनिष्ठानंद जी महाराज ने बताया कि दान की अपनी ही एक अलग महिमा है हमारे शास्त्रों में दान के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है दान करने से धन, वैभव, ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। लेकिन दान, पूजा पाठ शुद्ध और पवित्र भावों के साथ करना चाहिए शरीर भी शुद्ध होना चाहिए और आंतरिंक आत्मा की भी शुद्धी होना चाहिए। दान, पुण्य, पूजा पाठ सभी के लिए शुद्धता की बेहद आवश्यकता है। स्वामी जी ने बताया कि धार्मिक कार्य कुछ भी करें उसमें शुद्ध और पवित्रता होना ही चाहिए हमें प्रतिदिन ईश्वर की पूजा करना चाहिए गृहस्थ जीवन में रहते हुए यदि रोज पूजा नहीं करो सकों तो कम से कम वर्ष में कुछ विशेष तिथियां आती है उन पर तो जरूर ईश्वर की पूजा करना चाहिए इसका हमारे जीवन में गहरा प्रभाव पडता है।
स्वामी जी ने बताया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए हमें तपस्या और दान जरूर करना चाहिए जो व्यक्ति जैसा संपन्न हो वैसा दान करना चाहिए दान करने से हमें इसका तत्काल लाभ मिलता है। आपने बताया कि हमें शिव और शक्ति दोनो की उपासना करना चाहिए भगवान शिव के साथ मां भगवती की भी आराधना करना चाहिए और दोनों का स्वरूप हमें शिवलिंग में एक साथ मिल जाता है इसलिए शिवलिंग की पूजा की जाती है। इस अवसर पर बडी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।



