मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 18 अगस्त 2026 मंगलवार

सभी मामलों का प्राथमिकता और संवेदनशीलता से करें निराकरण, लोगों को पूरा सुनकर संतुष्ट करें : मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष

राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट में की जनसुनवाई, 25 प्रकरणों की प्रकरणवार समीक्षा

राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष माननीय डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने आज कलेक्ट्रेट कार्यालय रतलाम में जनसुनवाई कर नागरिकों की समस्याएं सुनीं तथा संबंधित मामलों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नागरिकों से संबंधित प्रत्येक मामले को प्राथमिकता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना जाए तथा नियमानुसार त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भी प्रकार के मामले हों, उन्हें गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। नागरिकों की बात पूरी तरह सुनकर उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के मानव अधिकार सुरक्षित रहें, यही आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त मामलों में कार्रवाई करते समय मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

जनसुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष रतलाम जिले से संबंधित 25 प्रकरणों की प्रकरणवार समीक्षा की गई। इनमें 11 प्रकरण पुलिस विभाग से संबंधित थे। आयोग अध्यक्ष ने इन मामलों की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही जनसुनवाई के दौरान प्राप्त नवीन प्रकरणों को भी संज्ञान में लिया गया।

जनसुनवाई में गैस की नली से लीकेज, मेडिकल कॉलेज में आदिवासी महिला के उपचार से संबंधित शिकायत, महिला एवं बाल विकास विभाग में कर्मचारी का वेतन रोके जाने, नगर निगम में दिव्यांग भर्ती, स्वास्थ्य विभाग में उपचार के दौरान लापरवाही, जीवन निर्वाह, टीकाकरण तथा जावरा उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ रूम समय पर नहीं खोले जाने सहित विभिन्न मामलों की सुनवाई की गई।

जावरा उच्च माध्यमिक विद्यालय से संबंधित मामले में आयोग अध्यक्ष ने कमेटी गठित कर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों के लिए बेहतर एवं सकारात्मक वातावरण होना चाहिए। बच्चों का भविष्य महत्वपूर्ण है, इसलिए स्कूल की व्यवस्थाएं बेहतर हों तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा बालक की गुमशुदगी, हत्या, दुष्कर्म, भूमि पर अधिकार दिलाने, ताजिए के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से लोगों की मृत्यु तथा अन्य मामलों की भी समीक्षा की गई। हाईटेंशन लाइन से संबंधित प्रकरण में चल रही जांच की जानकारी आयोग अध्यक्ष ने प्राप्त की तथा आवश्यक कार्रवाई के संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया।

जनसुनवाई के दौरान डीआईजी श्री अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार, सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन, अपर कलेक्टर श्री बृजेंद्र रावत, नगर निगम आयुक्त श्री अनिल भाना, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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जिले में 07 केन्द्रों पर होगी विकेन्द्रीकृत जनसुनवाई : कलेक्टर श्री कटेसरिया

प्रत्येक मंगलवार प्रातः 11 से दोपहर 01 बजे तक होगी जनसुनवाई

कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने निर्देश दिए हैं कि शासन द्वारा नागरिकों की समस्याओं एवं शिकायतों के त्वरित, प्रभावी एवं संवेदनशील निराकरण तथा प्रशासन एवं नागरिकों के मध्य सीधे संवाद के उद्देश्य से प्रत्येक मंगलवार प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक जनसुनवाई आयोजित किये जाने की व्यवस्था निर्धारित है। जनसुनवाई को नागरिकों के अधिक निकट एवं सुलभ बनाने तथा समस्याओं का सक्षम स्तर पर त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला रतलाम में तत्काल प्रभाव से विकेन्द्रीकृत जनसुनवाई व्यवस्था लागू की गई है।

प्रत्येक मंगलवार प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक जिले में कुल 07 विकेन्‍द्रीकृत जनसुनवाई केन्द्र संचालित होंगे। जिनमें नगर पालिक निगम, रतलाम क्षेत्र कार्यालय में आयुक्त, नगर पालिक निगम, रतलाम, रतलाम अनुविभाग कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), रतलाम, सैलाना अनुविभाग कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सैलाना, बाजना विकासखण्ड कार्यालय में जनपद पंचायत, बाजना, जावरा अनुविभाग कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जावरा, पिपलौदा विकासखण्ड कार्यालय में जनपद पंचायत, पिपलौदा तथा आलोट अनुविभाग कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), आलोट द्वारा जनसुनवाई की जाएगी।

उक्त केन्द्रों के स्थान एवं समय का ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, लोक सेवा केन्द्रों तथा अन्य उपयुक्त माध्यमों से पर्याप्त प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।

नगर पालिक निगम क्षेत्र की जनसुनवाई का नेतृत्व आयुक्त, नगर पालिक निगम, रतलाम करेंगे। अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई का नेतृत्व संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) करेंगे। सैलाना तथा जावरा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) क्रमशः एक सप्ताह अपने कार्यालय एवं अगले सप्ताह बाजना/पिपलौदा जनपद पंचायत कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर जनसुनवाई का नेतृत्व करेंगे। जिस केन्द्र पर संबंधित सप्ताह अनुविभागीय अधिकारी उपस्थित नहीं होंगे, वहां उक्त निर्दिष्ट अधिकारी जनसुनवाई का संचालन करेंगे।

जनसुनवाई में विकासखंड/तहसील के संबंधित तहसीलदार/नायब तहसीलदार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत तथा राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य, सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, विद्युत एवं अन्य आवश्यक विभागों के सक्षम अधिकारी उपस्थित रहेंगे। जिला अधिकारियों की भी आवश्यकतानुसार विभिन्न जनसुनवाई केन्द्रों पर ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर ही अधिकाधिक प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित होगा।

प्रत्येक आवेदन का पंजीयन कर आवेदक को पावती दी जाएगी। जिस समस्या का निराकरण मौके पर संभव हो, उसका उसी समय निराकरण किया जाएगा। जिन प्रकरणों में जांच अथवा अभिलेख परीक्षण आवश्यक हो, उनमें स्पष्ट समय-सीमा एवं उत्तरदायी अधिकारी निर्धारित किया जाएगा। केवल आवेदन को अन्य कार्यालय में अग्रेषित करना निराकरण नहीं माना जाएगा। जिस प्रकरण का निराकरण तहसील/विकासखण्ड/जनपद/नगर निगम अथवा संबंधित विभाग के स्तर पर संभव है, उसे अनावश्यक रूप से जिला मुख्यालय नहीं भेजा जाएगा। केवल जिला स्तर पर निर्णय, अंतरविभागीय समन्वय अथवा अन्य विशेष हस्तक्षेप अपेक्षित होने पर प्रकरण स्पष्ट तथ्यात्मक प्रतिवेदन सहित जिला कार्यालय को भेजा जाएगा।

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एसएसटीडी एवं आरडीएसएस योजना अंतर्गत बाजना क्षेत्र में विद्युत अधोसंरचना एवं उन्नयन के विभिन्न कार्य पूर्ण

सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (ओ एंड एम) म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि. रतलाम वृत्त ने बताया कि विद्युत उपभोक्ताओं को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण तथा निर्बाध विद्युत व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बाजना क्षेत्र में वर्तमान में राज्य शासन की प्रचलित योजना एसएसटीडी एवं केंद्र शासन वित्त पोषित योजना आरडीएसएस अंतर्गत अधोसंरचना निर्माण एवं उन्नयन के विभिन्न कार्य विगत वर्ष में पूर्ण किये गये हैं।

बाजना क्षेत्र को विद्युत प्रदाय हेतु एक नग 33 केव्ही फीडर ही विद्यमान था, जिसमें 370 एम्पी. तक भार दर्ज हुआ। ओवरलोडिंग की समस्या के निदान हेतु RDSS योजनांतर्गत 132/33 केव्ही अति उच्चदाब उपकेन्द्र से राजापुरा माताजी 33/11 उपकेन्द्र तक एक अतिरिक्त 20 किमी 33 केव्ही फीडर का निर्माण किया गया, जो कि सुदुर वन क्षेत्र से प्रस्तावित था, जिसके निर्माण हेतु स्थानीय DFO से समन्वय स्थापित कर आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर उक्त फीडर का निर्माण 82 लाख 16 हजार 681 रुपये की लागत से निर्माण एजेन्सी अग्रवाल पावर, भोपाल द्वारा किया गया। जिससे क्षेत्र में वोल्टेज की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

33/11 केव्ही उपकेन्द्र बाजना पर 2 नग 5 एमवीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफॉर्मर स्थापित थे, जिन पर विगत वर्षों में संयोजित भार उनकी निर्धारित क्षमता के मानक स्तर तक पहुंचने से क्षेत्र में मांग आपूर्ति संतुलन बनाये रखने हेतु एक नग अतिरिक्त 5 एमवीए पॉवर ट्रांसफॉर्मर की स्थापना की गई। उक्त निर्माण कार्य 75 लाख 59 हजार 919 रुपये की लागत से विभागीय स्तर पर किया गया।” बाजना क्षेत्र के 33/11 केव्ही भडानकला उपकेन्द्र पर स्थापित 3.15 एमवीए क्षमता के पॉवर ट्रांसफॉर्मर स्थापित है, जिस पर विगत वर्षों में संयोजित भार उनकी निर्धारित क्षमता के मानक स्तर तक पहुंचने से क्षेत्र में मांग आपूर्ति संतुलन बनाये रखने हेतु उक्त स्थापित पॉवर ट्रांसफॉर्मर की क्षमतावृद्धि 3.15 एमवीए से 5 एमवीए की गई। उक्त निर्माण कार्य 49 लाख 99 हजार 329 रुपये की लागत से विभागीय स्तर पर किया गया।

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आकांक्षी विकासखंड बाजना में नीति तारा टूलकिट का प्रशिक्षण संपन्न

विकास संकेतकों की नियमित समीक्षा एवं विश्लेषण के लिए प्रभावी इंटरफेस, प्रगति के आधार पर लिए जा सकेंगे निर्णायक कदम

भारत सरकार एवं नीति आयोग के निर्देशानुसार आकांक्षी विकासखंड योजना के अंतर्गत आकांक्षी विकासखंड बाजना में नीति तारा टूलकिट के संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम कलेक्टर कार्यालय के एनआईसी कक्ष में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में संबंधित अधिकारियों को तारा टूलकिट के उपयोग एवं इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। आकांक्षी विकासखंड योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई तारा टूलकिट के माध्यम से विकासखंड से संबंधित विभिन्न संकेतकों (इंडिकेटर्स) का प्रभावी विश्लेषण एवं नियमित समीक्षा की जा सकेगी। टूलकिट में उपलब्ध इंटरफेस के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति की स्थिति को देखा जा सकेगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाने में सुविधा मिलेगी। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि तारा टूलकिट के माध्यम से आकांक्षी विकासखंड के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों एवं संकेतकों की नियमित निगरानी की जा सकेगी। संकेतकों की प्रगति का विश्लेषण कर कमजोर क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए उनके बेहतर परिणाम के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने में भी यह टूलकिट उपयोगी होगी। इस टूलकिट का प्रमुख उद्देश्य आकांक्षी विकासखंड में संचालित विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी, परिणामों की नियमित समीक्षा तथा विभिन्न विकास संकेतकों में सुधार सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षण में संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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फरवरी 2027 में प्रगणक पहुंचेंगे घर-घर, सही एवं सटीक जानकारी देने की अपील

जिला योजना एवं सांख्यिकी विभाग डीपीओ श्री बालकृष्ण पाटीदार द्वारा बताया गया कि भारत सरकार द्वारा आगामी भारत की जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। इसी क्रम में रतलाम जिले में भी नागरिकों को जनगणना के महत्व और इसमें सक्रिय भागीदारी के लिए जागरूक किया जा रहा है। जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर योजनाओं का सही निर्धारण, विकास की दिशा तय करने तथा संसाधनों के उचित वितरण में सहायता मिलेगी।

जनगणना का जमीनी कार्य फरवरी 2027 में शुरू होगा। इस दौरान प्रशिक्षित प्रगणक घर-घर पहुंचकर प्रत्येक नागरिक की आवश्यक जानकारी एकत्रित करेंगे। नागरिकों से अपील की गई है कि प्रगणक के पहुंचने पर सही एवं सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं, जिससे जनगणना के आंकड़े वास्तविक स्थिति को दर्शा सकें।

जनगणना के दौरान नागरिकों से प्राप्त व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी। एकत्रित जानकारी का उपयोग जनगणना एवं विकास योजनाओं के उद्देश्य से किया जाएगा। नागरिकों से बिना किसी संकोच के सही जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की गई है।

जनगणना के सटीक आंकड़ों के आधार पर नागरिकों की जरूरत के अनुसार सरकारी योजनाओं का निर्धारण किया जा सकेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करने में भी जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

सही जानकारी उपलब्ध कराने से रतलाम के समग्र विकास की योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके अंतर्गत बेहतर शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, रोजगार के अधिक अवसर, कृषि एवं सिंचाई में प्रगति, महिलाओं एवं बच्चों का सशक्तिकरण तथा सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास को गति देने में सहायता मिलेगी।

कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री अजय कटेसरिया की ओर से यह अभियान “सबकी गिनती… सबका विकास… सबका विश्वास…” के नारे के साथ चलाया जा रहा है। नागरिक सही जानकारी देकर देश के भविष्य की बेहतर योजना बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं। “मेरा रतलाम, मेरा योगदान” की भावना के साथ जनगणना में सहयोग करने का आह्वान किया गया है।

 

अधिक जानकारी के लिए www.censusindia.gov.in पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14417 भी उपलब्ध है। जनगणना संबंधी अतिरिक्त जानकारी के लिए क्यूआर कोड के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

 

जनगणना केवल आबादी की गणना नहीं, बल्कि देश और जिले के भविष्य की विकास योजनाओं की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जिला प्रशासन ने जिले के सभी नागरिकों से जनगणना 2027 में पूर्ण एवं ईमानदार भागीदारी सुनिश्चित करने तथा सही जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की गई है।

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राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट की एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं और आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना पर रखा विजन
भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) में 9,047 एकड़ क्षेत्र में 11 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव प्रस्तुत

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट की तीसरी एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश संभावनाओं, औद्योगिक कॉरिडोर तथा आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना के विकास से जुड़े विषयों पर राज्य सरकार का विजन रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में औद्योगिक निवेश की संभावनाओं, उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से विकसित की जा रही औद्योगिक परियोजनाओं की जानकारी दी। मध्यप्रदेश द्वारा औद्योगिक विकास को गति देने, निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने तथा आधुनिक, विश्वस्तरीय और निवेश-तैयार औद्योगिक अधोसंरचना विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

बैठक में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री तथा एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की अध्यक्ष श्रीमती निर्मला सीतारमण, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल तथा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी उपस्थित थे। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने औद्योगिक विकास और निवेश से जुड़े विषयों पर अपने-अपने राज्यों का विजन रखा।

मध्यप्रदेश को प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्र बनाने का लक्ष्य

प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आधुनिक औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश-अनुकूल नीतियों, प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं और उद्योगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को निरंतर गति दी जा रही है।

बैठक में मध्यप्रदेश की औद्योगिक विकास योजनाओं की प्रस्तुति से प्रदेश की निवेश क्षमता और औद्योगिक अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया गया।

 

भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के तहत 11 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव

 

भारत सरकार की BHAVYA योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा फेज-I, राउंड-I में 11 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं। इन प्रस्तावों के तहत कुल 9,047.08 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक अधोसंरचना विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजनाओं की कुल DPR लागत 8,144.35 करोड़ रूपये है। इन औद्योगिक पार्कों को निवेश-तैयार और प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं से युक्त विकसित करने का लक्ष्य है। इससे प्रदेश में नए निवेश आकर्षित होने के साथ ही रोजगार के अवसरों का भी विस्तार होगा।

 

मध्यप्रदेश द्वारा राउंड-I के अंतर्गत प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को राज्य के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में संतुलित रूप से वितरित किया गया है, ताकि औद्योगिक विकास के लाभ संपूर्ण राज्य में समान रूप से पहुंच सकें। प्रस्तावित 11 परियोजनाओं में अवंतिका इंडस्ट्रियल सेंटर (उज्जैन), भेंसोला (धार), पिपलरावांन-पालीकालन (देवास-शाजापुर), IR रतलाम-पलसोड़ी, आष्टा इंडस्ट्रियल क्लस्टर (सीहोर), मसवासी ग्रांट (सागर), चैनपुरा (गुना), मोहना (ग्वालियर), धरमपुरा (जबलपुर), सिमरा (कटनी) और शिवसागर (रीवा) शामिल है।

 

इन परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल 9,000 एकड़ से अधिक है। भेंसोला औद्योगिक पार्क को टेक्सटाइल पार्क के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जो धार स्थित भारत के सबसे बड़े PM MITRA पार्क का विस्तार होगा तथा वस्त्र क्षेत्र की संपूर्ण वैल्यू चेन को समाहित करेगा। इसके अतिरिक्त, ये इंडस्ट्रियल पार्क फार्मा, ऑटोमोबाइल, रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट, सेमीकंडक्टर, IT एवं ITeS सहित विभिन्न क्षेत्रों को समर्थन प्रदान करेंगे तथा इनसे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर उत्पन्न करेंगे।

महिला कर्मियों के लिए आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर

प्रदेश सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में महिला कर्मियों की सुविधा, सुरक्षा और कार्य के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रयास कर रही है। इसके अंतर्गत डे-केयर सेंटर, CCTV आधारित सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवश्यक यूटिलिटीज, कैंटीन तथा अन्य सुविधाओं से युक्त हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ उन्हें सुरक्षित और बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है।

औद्योगिक कॉरिडोर और नोड्स से निवेश को मिलेगी नई गति

प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक कॉरिडोर और विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित किए जा रहे औद्योगिक नोड्स प्रदेश की औद्योगिक अधोसंरचना को नई गति प्रदान कर रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से विकसित हो रही इन परियोजनाओं तथा राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियों का समन्वय प्रदेश में निवेश प्रस्तावों को तेजी से धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने भी किया संबोधित

बैठक में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री तथा एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की अध्यक्ष श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विशेष संबोधन दिया। बैठक में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल तथा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी ने भी संबोधित किया।

बैठक में DPIIT के सचिव एवं NICDIT के चेयरमैन श्री अमरदीप सिंह भाटिया के स्वागत उद्बोधन दिया। इसके बाद NICDIT के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रजत कुमार सैनी ने औद्योगिक कॉरिडोर एवं परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तुतिकरण दिया।

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किसानों की मेहनत का सम्मान बनाये रखने ढ़ाल है कवच योजना

किसानों के हित में एक बड़ा फैसला
‘कवच’ बनी मध्यप्रदेश सरकार, फिर खुला संस्थागत ऋण का रास्ता
4 अगस्त को मिली कवच योजना को मंजूरी

अन्नदाता किसान हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए किसान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए खेत से बाजार तक कृषि मूल्य संवर्धन श्रृंखला को सुदृढ़ करने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने, आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीक सहित प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन और संस्थागत वित्त की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश में निरंतर काम हो रहा है।

किसानों के हित में ‘कवच योजना’ राज्य सरकार की एक बड़ी पहल है। किसान की मेहनत का सम्मान हो, उनकी खेती-किसानी मजबूत हो और उसे आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी मिले, ‘कवच योजना’ इसी संकल्प को धरातल पर उतारने वाला कदम है। इस योजना का उद्देश्य प्रभावित किसानों को राहत देने के साथ उन्हें फिर से सहकारी बैंकिंग प्रणाली एवं ऋण व्यवस्था की मुख्यधारा में लाना है, ताकि वे अपनी कृषि गतिविधियों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ा सकें और सरकार की योजनाओं का लाभ भी प्राप्त कर सकें।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष (2026) में लिया गया यह महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश के उन हजारों किसानों के लिए नई उम्मीद की तरह है, जिनके लिए लंबित जांच के कारण नये ऋण प्राप्ति का रास्ता बाधित हो गया था। अब ‘कवच योजना’ उनके लिए आर्थिक गतिविधियों को पुनः गति देने और संस्थागत वित्त व्यवस्था से फिर से जुड़ने का माध्यम भी बनेगी।

योजना को कब मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में 4 अगस्त 2026 को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसान हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सहकारिता विभाग की ‘कवच योजना’ को मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों की आमदनी बढ़ाना, उनका सम्मान एवं आर्थिक सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में है।

किन्हें मिलेगा लाभ

कवच योजना से सहकारी समितियों से जुड़े ऐसे लगभग 5 हजार किसान लाभान्वित होंगे, जिनके ऋण खातों में हुई गड़बड़ियों की जांच लंबित रहने के कारण वे शासकीय योजनाओं और नई ऋण सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे थे। सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी प्रक्रिया अथवा जांच के लंबित रहने का प्रतिकूल प्रभाव किसान की खेती और आजीविका पर अनिश्चितकाल तक न पड़े। इसी भावना के अनुरूप ‘कवच योजना’ के जरिए प्रभावित किसानों को पुनः मुख्यधारा में लाकर उन्हें संस्थागत ऋण व्यवस्था से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। योजना के अंतर्गत प्रभावित किसानों को नया ऋण उपलब्ध कराने का रास्ता बनाया जाएगा। इसके लिए अपेक्स बैंक और जिला सहकारी बैंक अपने स्तर पर 50 करोड़ रुपये की सीमा तक विशेष निधि का निर्माण करेंगे। किसान हित में राज्य सरकार द्वारा 25 करोड़ रुपये की एकमुश्त अंशपूंजी सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है।

योजना का उद्देश्य

राज्य सरकार की किसान कल्याण नीति का मूल उद्देश्य किसान को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उसकी मेहनत को सुरक्षित वित्तीय आधार उपलब्ध कराना है। सरकार का प्रयास है कि किसान को समय पर ऋण, कृषि आदान और उनके हित की सभी योजनाओं का लाभ मिले, ताकि खेती-किसानी की गतिविधियां कतई बाधित न हों। यह योजना संस्थागत कृषि ऋण किसान की खेती के लिए महत्वपूर्ण आधार है। समय पर ऋण उपलब्ध होने से किसान बीज, खाद, कृषि यंत्र, सिंचाई तथा अन्य आवश्यक कृषि गतिविधियों के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था कर सकता है। इससे किसानों को महंगे कर्ज पर निर्भरता से बचाने में भी मदद मिलती है।

13 नवम्बर तक चलेगा बलराम कृषि महोत्सव

किसान कल्याण वर्ष-2026 में किसानों के जीवन में खुशहाली लाने और उनके घरों में समृद्धि लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय कृषि के आदि पुरूष, भूमि पुत्र और हलधर भगवान बलराम किसानों के आदि देवता हैं। अन्नदाता किसानों के सम्मान में राज्य सरकार के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। यह महोत्सव 15 जुलाई से प्रारंभ हो गया है, जो 13 नवम्बर 2026 तक चलेगा। कुल 122 दिन के इस बलराम कृषि महोत्सव में प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडी परिसरों में विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों से संवाद किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई-नई तकनीक के बारे में गाइड कर रहे हैं। खेती को लाभ का धंधा और एक टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, मौसम आधारित सलाह, मृदा परीक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, ड्रोन तकनीक और फसल विविधिकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है। अन्नदाताओं को ऊजादाता बनाने के लिए सोलर पम्प कनेक्शन लेने तथा उनके लिए विकसित की गई एग्री-स्टैक प्रणाली का उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

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