नेटवर्क विहीन स्कूलों की जानकारी जुटा रहा शिक्षा विभाग, अतिथि शिक्षकों का वेतन और री-ज्वाइनिंग अटकी

मोबाइल नेटवर्क न होने से ऑनलाइन काम नहीं हो पा रहा। भोपाल से मांगी गई रिपोर्ट, DEO कार्यालय जुटा रहा डेटा
रीवा। जिले के सरकारी स्कूलों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी बाधा बन गई है। स्कूल शिक्षा विभाग अब ऐसे स्कूलों की सूची बना रहा है जहां नेटवर्क नहीं है या बहुत कमजोर है। इस कारण अतिथि शिक्षकों को मानदेय मिलने और री-ज्वाइनिंग कराने में भारी परेशानी हो रही है।
दरअसल आजकल स्कूलों का लगभग सारा काम ऑनलाइन हो गया है। हाजिरी, छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन, रिपोर्ट और सैलरी का भुगतान सब पोर्टल पर होता है। लेकिन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के कई स्कूल ऐसे हैं जहां मोबाइल नेटवर्क ही नहीं आता। इसी समस्या को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने जिला शिक्षा अधिकारी रीवा को पत्र लिखकर जिले के नेटवर्क विहीन स्कूलों की पूरी जानकारी मांगी है। पत्र में कहा गया है कि ऐसे स्कूलों की पहचान की जाए जहां नेटवर्क की समस्या है, ताकि उसका समाधान निकाला जा सके। DEO कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि डेटा जुटाने का काम शुरू कर दिया गया है। ब्लॉक स्तर से जानकारी मंगाई जा रही है कि कौन-कौन से स्कूल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं।
सबसे ज्यादा दिक्कत किसे:
नेटवर्क न होने से सबसे ज्यादा परेशानी अतिथि शिक्षकों को हो रही है। उनका मानदेय ऑनलाइन प्रक्रिया से ही आता है। पोर्टल न खुलने के कारण उनका भुगतान महीनों लटक रहा है। साथ ही सत्र के बीच में री-ज्वाइनिंग भी ऑनलाइन होती है, जो नेटवर्क न होने के कारण नहीं हो पा रही।
शिक्षकों का कहना है कि सरकार डिजिटल शिक्षा की बात करती है, लेकिन बुनियादी सुविधा ही नहीं है। अब देखना होगा कि भोपाल से रिपोर्ट भेजने के बाद नेटवर्क की समस्या का कोई समाधान निकलता है या नहीं।



