बिना अनुमति चल रहे अशासकीय विद्यालय, छात्रों के भविष्य को कर रहे चौपट

बिना अनुमति चल रहे अशासकीय विद्यालय, छात्रों के भविष्य को कर रहे चौपट
रीवा। अशासकीय विद्यालय को गरीब बच्चों को शिक्षा देने का अधिकार दिया जिसकी फीस विद्यालयों को सरकार भुगतान करने लगी इन सभी प्रयासों के बावजूद भी शिक्षा सभी को नहीं मिल पा रही, शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सरकार से अपने निरीक्षण दौरे का खर्च तो वसूल कर रहे हैं
लेकिन कोई भी अधिकारी कभी भी विद्यालयों के निरीक्षण में गांव तक नहीं जाते जिसका परिणाम है कि शासकीय व अशासकीय स्कूलों में पूरी तरह मनमानी चल रही है नियम कानून कायदों को मानने वाला कोई नहीं है ।
जिलेभर में चलने वाली अशासकीय विद्यालयों का हाल यह है कि अनुमति आठवीं तक और विद्यालय में छात्र बारहवीं तक के अध्ययन कर रहे हैं। इस स्थिति में उन छात्रों का भविष्य क्या होगा जो उन बिना अनुमति के स्कूलों में पढ़ रहे हैं। आर के स्कूल के संचालक राजकुमार उरमलिया जो अशासकीय स्कूल संगठन के एक जिम्मेदार पदाधिकारी हैं उन्होंने बताया कि जेपी नगर में कृष्णा पब्लिक स्कूल, एनपीएल कॉन्वेंट पडरा, सनराइज स्कूल पडरा, शिशु ज्ञान ज्योति स्कूल सोनरा, इंग्लिश वैली स्कूल जमुना जैसी सैकड़ो स्कूल जिले में संचालित है जिनकी मान्यता आठवीं तक होने के बावजूद भी बारहवीं तक के छात्रों को प्रवेश दे रखे हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारी अपना हिस्सा लेकर के अपनी जेब भर रहे हैं। जब लिखित में शिकायत की जाती है तब निरीक्षण और जांच के नाम पर लंबी रकम वसूल लेते हैं लेकिन कार्यवाही नहीं करते जबकि अशासकीय विद्यालयों के संचालन के लिए जो नियम कानून बने हैं उसमें सभी नियम स्पष्ट उल्लखित हैं किंतु किसी भी विद्यालय के विरुद्ध ठोस कार्यवाही कभी भी नहीं की जाती।
कृष्णा पब्लिक स्कूल के संचालक के के तिवारी से इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मैं हायर स्कूल के छात्रों को कोचिंग में ट्यूशन पढ़ाता हूं जो विधि विरुद्ध कार्य नहीं है उसकी लोग शिकायत करते हैं। लेकिन आर के स्कूल के संचालक एक हिन्दी स्कूल चलाने की मान्यता लेकर बगैर अनुमति लिए आर के एकेडमी अंग्रेजी माध्यम की स्कूल दूसरी जगह चला रहे हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही क्यों नहीं होती क्या वे नियम कानून कायदों से अलग हैं उनके लिए क्या कोई अलग नियम बनाए गए हैं।
इसी तरह स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी लोगों में से अनुरुद्ध शुक्ला, राघवेंद्र त्रिपाठी, राम कलेश शर्मा, राकेश सिंह, राम विश्वास द्विवेदी ,रामनिवास दुबे, आशीष तिवारी, राहुल मिश्रा आदि तमाम लोगों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर अवैध वसूली कर विधि विरुद्ध स्कूल संचालित करने में संरक्षण प्रदान करने का आरोप लगाया है उन्होंने कहा कि सोनरा में चलने वाली ज्ञान जयोति स्कूल हो या अगडाल में चलने वाली अशासकीय विद्यालय हो जिनके पास ना तो खेल का मैदान है ना ही अलग से विद्यालय भवन है वहीं परिवार का रहन-सहन है वहीं स्कूल संचालित हो रही है। बीस वर्षों से ज्यादा समय से चलने वाली इस तरह की स्कूलों के विरुद्ध शिक्षा विभाग के अधिकारी या जिला प्रशासन ने कभी कोई कार्यवाही नहीं कि इस तरह की स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य कितना उज्जवल होगा यह तो समाज के सामने है लेकिन विद्यालय संचालित करने वालों को धन वसूली से मतलब है किसी के लड़के लड़कों के भविष्य से उनका क्या लेना देना। इसी तरह शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का भी हाल है उनको अपनी वसूली मिलनी चाहिए। इस समय शासन ने आपकी सरकार आपके द्वार अभियान चला रखा है जिसका उद्देश्य यह है की विधि विरुद्ध हो रही गतिविधियों पर अंकुश लगाए और ऐसे असामाजिक तत्वों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करें लेकिन गांव में जाने वाले कलेक्टर विद्यालयों की ओर रुख नहीं कर रहे आम जनता के बीच पहुंचकर वापस हो जाते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि विधि विरुद्ध चलने वाली विद्यालयों का निरीक्षण करें और उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करते हुए विधि अनुसार विद्यालय के अनुमति को निरस्त कराकर ऐसे विद्यालयों को बंद करवाने की कार्यवाही करें जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार मय न हो सके और शिक्षा समाज के अन्तिम क्षोर के पास तक पहुंच सके।


