मंदसौरमध्यप्रदेश

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 09 जुलाई 2026 गुरुवार

कृषि विभाग की कार्यवाही

मेसर्स पाटीदार कृषि सेवा केन्द्र का लाइसेंस निलंबित

किसानों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए लाइसेंस अथॉरिटी एवं उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री भगवान सिंह अर्गल ने मेसर्स पाटीदार कृषि सेवा केन्द्र, मांगरोल (विकासखंड रतलाम) का कीटनाशी लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

उप संचालक श्री अर्गल ने बताया कि कृषकों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मेसर्स पाटीदार कृषि सेवा केन्द्र द्वारा विक्रय की गई बीज उपचार दवा PCT-410 से उपचारित सोयाबीन फसल में अपेक्षित अंकुरण एवं वृद्धि नहीं हो रही है। शिकायत के परीक्षण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, कालूखेड़ा के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों का संयुक्त जांच दल गठित किया गया।

जांच के दौरान पाया गया कि उक्त दवा से उपचारित सोयाबीन फसल की वृद्धि अपेक्षित नहीं थी। जांच में कीटनाशक अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर मेसर्स पाटीदार कृषि सेवा केन्द्र, मांगरोल के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उसका कीटनाशी लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

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रतलाम जिले में बीज उपचार दवा PCT-410 के विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू

किसानों की शिकायतों के आधार पर कृषि विभाग ने जिले में बीज उपचार दवा PCT-410 के विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। लाइसेंस अथॉरिटी एवं उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री भगवान सिंह अर्गल ने बताया कि मेसर्स जय किसान फर्टिलाईजर, धराड़ एवं मेसर्स पाटीदार कृषि सेवा केन्द्र, मांगरोल द्वारा उक्त दवा का विक्रय किया गया था। किसानों ने शिकायत की थी कि PCT-410 से उपचारित सोयाबीन फसल में अपेक्षित अंकुरण एवं वृद्धि नहीं हो रही है।

शिकायत के बाद कृषि विज्ञान केन्द्र कालूखेड़ा के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के संयुक्त जांच दल ने निरीक्षण किया। जांच में PCT-410 से उपचारित सोयाबीन फसल की वृद्धि प्रभावित पाई गई। इसके आधार पर दवा निर्माता कंपनी GSP Crop Science Ltd., अहमदाबाद द्वारा निर्मित बीज उपचार दवा PCT-410 के विक्रय पर कीटनाशी अधिनियम, 1968 की धारा 18 के तहत संपूर्ण रतलाम जिले में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है।

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कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने पीएम प्रगति पोर्टल की समीक्षा

करियर काउंसलिंग, ड्रॉप आउट, खेल गतिविधियों, लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रचार और कौशल प्रशिक्षण पर दिया जोर

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने शिक्षा विभाग के पीएम प्रगति पोर्टल की समीक्षा करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार एवं विद्यालयों में बच्चों की निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत की सीईओ सुश्री वैशाली जैन तथा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर ने विद्यालयों में ड्रॉपआउट की स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों के वास्तविक कारणों का फील्ड में जाकर पता लगाया जाए। स्थानीय शिक्षकों एवं अभिभावकों से फीडबैक लेकर ब्लॉकवार अध्ययन किया जाए तथा ड्रॉपआउट रोकने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। आवश्यकता अनुसार बच्चों को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में करियर काउंसलिंग की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि विद्यार्थियों को भविष्य के अवसरों की सही जानकारी मिल सके। लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए बालिकाओं एवं उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाए। कलेक्टर ने विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों से जोड़ने, खेल मैदान की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने मुस्कान अभियान के कार्यों की मैदानी स्तर पर समीक्षा करने तथा वोकेशनल एजुकेशन एवं स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। बैठक में विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण मिड-डे मील की भी समीक्षा की गई तथा इसके प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

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स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें : अपर कलेक्टर श्री रावत

बरसात में पुल-पुलियों पर पानी होने पर स्कूली वाहन न निकालें

स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर सभागार में जिले के स्कूल संचालकों एवं बस ऑपरेटरों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर कलेक्टर श्री बृजेंद्र रावत, सीएसपी, जिला परिवहन अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, डीसी होमगार्ड, ट्रैफिक पुलिस सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी स्कूली वाहनों के दस्तावेज, फिटनेस, बीमा, परमिट, पीयूसी एवं अन्य आवश्यक अभिलेख अद्यतन रहें। बस चालक एवं परिचालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तथा पुलिस सत्यापन होना अनिवार्य है। बसों में स्पीड गवर्नर, इमरजेंसी विंडो, पैनिक बटन, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, सीसीटीवी कैमरे सहित सभी सुरक्षा उपकरण कार्यशील अवस्था में रहें।

निर्देश दिए गए कि बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जाए तथा बच्चों को चालक के केबिन में न बैठाया जाए। बसों पर शिकायत नंबर, स्कूल बस का स्पष्ट उल्लेख एवं आवश्यक रिफ्लेक्टिव टेप लगाए जाएं। चालक एवं परिचालक निर्धारित वर्दी व नेम प्लेट पहनें तथा निर्धारित गति सीमा का पालन करें।

बैठक में विशेष रूप से वर्षा ऋतु के दौरान पुल-पुलियों अथवा रपटों पर पानी होने की स्थिति में किसी भी स्कूली वाहन को पार नहीं कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने सभी स्कूल संचालकों एवं बस ऑपरेटरों से बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।

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संत रविदास स्वरोजगार योजना में रतलाम जिले ने हासिल की शत-प्रतिशत उपलब्धि

35 हितग्राहियों को 1.55 करोड़ रुपये का ऋण वितरित, नए आवेदनों के लिए आवेदन आमंत्रित

जिला अन्त्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित, रतलाम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में संचालित संत रविदास स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जिले में निर्धारित लक्ष्य की शत-प्रतिशत उपलब्धि प्राप्त की है। योजना के तहत 35 हितग्राहियों का लक्ष्य निर्धारित था। इसके विरुद्ध 100 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 35 प्रकरण स्वीकृत कर सभी हितग्राहियों को कुल 1 करोड़ 55 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। योजना के माध्यम से पात्र युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

कार्यपालन अधिकारी, जिला अन्त्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी संत रविदास स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति वर्ग के युवक-युवतियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना के तहत 18 से 45 वर्ष आयु के ऐसे आवेदक, जिन्होंने न्यूनतम 8वीं कक्षा उत्तीर्ण की हो, जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक न हो तथा जो आयकरदाता न हों, वे स्वयं का व्यवसाय अथवा सेवा इकाई स्थापित करने के लिए 1 लाख से 50 लाख रुपये तक के ऋण हेतु आवेदन कर सकते हैं। नियमित ऋण भुगतान करने पर अधिकतम 7 वर्ष तक 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।

योजना के लिए आवेदन एमपीऑनलाइन पोर्टल samast.mponline.gov.in के माध्यम से किए जा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जिला अन्त्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित, महलवाड़ा, रतलाम कार्यालय अथवा दूरभाष क्रमांक 07412-235380 पर संपर्क किया जा सकता है।

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प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के लिए योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पशुपालक तक पहुँचाएं : प्रमुख सचिव श्री उमराव

13 जुलाई से प्रदेश में शुरू होगा ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’, पशुपालकों को नस्ल सुधार, टीकाकरण और आधुनिक डेयरी तकनीकों की दी जाएगी जानकारी पशुपालन एवं डेयरी विभाग की किसानों के साथ हुई बैठक

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, किसानों, पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पशुपालक तक आसानी से पहुंचे, इस उद्देश्य से बुधवार को पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी सभागार में किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक की। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उनके सुझाव भी प्राप्त किए। बैठक में श्री महेश चंद्र चौधरी सहित जिलों के किसान भी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रमुख सचिव श्री उमराव ने किसान संघ के पदाधिकारियों को प्रदेश में पशुपालन को बढ़ावा देने, प्रदेश को दूध की राजधानी बनाने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पशुओं के नस्ल सुधार, पशु पोषण, टीकाकरण एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी देने के लिए प्रदेश में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के दो चरण पूरे हो गए है। तीसरा चरण 13 जुलाई से शुरू होगा। इसके अंतर्गत विभाग के अधिकारी कर्मचारी पशुपालकों के घर जाएंगे और उन्हें नस्ल सुधार, पशु पोषण, टीकाकरण एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी देंगे। तीसरे चरण में 3 से 4 पशु (गौवंश एवं भैंसवंश) रखने वाले पशुपालकों के यहां प्रशिक्षित विभागीय अमले द्वारा घर जाकर भेंट की जाएगी।

तीसरे चरण में प्रदेश के 5 लाख 72 हजार पशुपालकों के घर जाकर भेंट करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने 13 जुलाई से शुरू होने वाले इस अभियान में मंत्री, सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से सहभागिता करने का आग्रह किया। इसके साथ ही प्रमुख सचिव श्री उमराव ने प्रदेश में चलाई जा रही क्षीरधारा योजना सहित अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

प्रमुख सचिव श्री उमराव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाते हुए ‘मिल्क कैपिटल’ के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि विभाग की योजनाओं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

इस अवसर पर संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पी.एस. पटेल, सांची बोर्ड के एमडी श्री डॉ. संजय गोवाणी, कुक्कुट विकास निगम के एमडी श्री सत्यनिधि शुक्ला, नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय जबलपुर के कुल सचिव श्री एसएस तोमर, गौ-संवर्धन बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. अनुपम अग्रवाल उपस्थित रहे।

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मेसर्स जय किसान फर्टिलाईजर का लाइसेंस निलंबित

लाईसेंस अथॉरिटी एवं उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री भगवान सिंह अर्गल ने बताया कि मेसर्स जय किसान फर्टिलाईजर धराड़, विकास खण्ड रतलाम जिला रतलाम द्वारा कृषको को दवा कंपनी GSP Crop Science Itd. 352/3 Rasala Road Navranpura Ahmedabad 380009 Gujrat द्वारा निर्मित बीज उपचार दवा PCT-410 विक्रय की गई, जिसकी कृषको द्वारा शिकायत की गई कि PCT-410 दवा से उपचारित सोयाबीन फसल में आपेक्षित अंकुरण एवं वृद्धि नहीं हुई है। शिकायत की जांच हेतु कृषि वैज्ञानिक के.वी. के कालूखेडा एवं कृषि विभाग के अधिकारियो का संयुक्त दल का गठन किया गया। जांच दल द्वारा जांच में पाया गया कि PCT-410 दवा से उपचारित सोयाबीन फसल में वृद्धि कम हो रही है। मेसर्स जय किसान फर्टिलाईजर धराड़, विकास खण्ड रतलाम द्वारा कीटनाशक अधिनियम 1968 का उल्लघन किया गया है। दवा विक्रेता मेसर्स जय किसान फर्टिलाईजर धराड़, विकास खण्ड रतलाम को जारी कीटनाशी लायसेंस को लाईसेंस अथॉरिटी एवं उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री भगवान सिंह अर्गल द्वारा तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया।

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मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में अधोसंरचनात्मक विकास और पुनर्वास कार्यों के लिये दी 2,300 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रूपये मंजूरी नमो हरित नगर योजना के लिये 100 करोड़ रूपये की स्वीकृति मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूँ,चना ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति : 2026 को मिली स्वीकृति राज्य डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आई.टी एवं डिजास्टर रिकवरी सहित अन्य कार्यों के लिए 800 करोड़ रूपये की मंजूरी विज्ञान पार्क, एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नॉलाजी पार्क की स्थापना एवं संचालन की निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी : 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राजपत्रित सेवा भर्ती नियम : 2022 के तहत भर्ती प्रक्रिया स्वीकृत कमजोर वर्गों को प्रभावी और कुशल विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए 42 करोड़ रूपये की स्वीकृति पन्ना जिले के केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज सिंचाई परियोजना और मझगांव सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और विस्थापन के लिए अतिरिक्त 202 करोड़ 50 लाख की राशि स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए अनेक निर्णय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को संपन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में अनेक निर्णय लिए गए है। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास और पुनर्वास कार्यों को 2300 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसी तरह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रस्ताव अनुसार राज्य डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आई.टी एवं डिजास्टर रिकवरी सहित अन्य कार्यों के लिए मंत्रि-परिषद ने 800 करोड़ की मंजूरी दी है। विभाग के ही तीन अन्य प्रस्तावों पर विज्ञान पार्क- एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं संचालन के लिए वर्ष 2031 तक निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

मंत्रि-परिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक और प्रस्ताव अनुसार ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत स्वामित्व योजना के निष्पादित हस्तांतरण अभिलेखों पर अतिरिक्त स्टांप शुल्क से छूट दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा प्रस्तुत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक :2026 को भी मंत्रि-परिषद ने मंजूरी दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव अनुसार मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इसी तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूँ, चना, ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति : 2026 को भी मंत्रि-परिषद ने स्वीकृति दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रस्ताव अनुसार मध्यप्रदेश के 65 नगरीयों निकायों और उनके आस-पास के वन क्षेत्रों में नगरीय वन विकसित करने के लिए नमो हरित नगर योजना को 100 करोड़ की स्वीकृति दी है।

जल संसाधन विभाग द्वारा पृथक-पृथक 3 सिंचाई परियोजनाओं में पुनर्वास और पुन: विस्थापन के लिए 3 प्रस्ताव अनुसार मंत्रि-परिषद ने पन्ना जिले की केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज सिंचाई परियोजना और मझगांव सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और विस्थापन के लिए अतिरिक्त रूप से 202 करोड़ 50 लाख रूपये की राशि स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राजपत्रित सेवा भर्ती नियम : 2022 के तहत भर्ती प्रक्रिया को स्वीकृति दी। इसी तरह मंत्रि-परिषद द्वारा लीगल और डिफेंस काउंसिल सिस्टम योजना की वर्ष 2031 तक निरंतरता के लिए 42 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। वित्त विभाग के प्रस्ताव अनुसार विभिन्न लिखतों पर देय उपकार में छूट देने का निर्णय लिया गया है। मंत्रि-परिषद ने शिक्षा विभाग की लोक-वित्त पोषित कार्यक्रमों योजनाओं एवं परियोजनाओं के परिक्षण की योजना को 1 अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 543 करोड़ रूपये की मंजूरी दी है।

स्टेट डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आईटी एवं डिजास्टर रिकवरी सहित अन्य कार्यों के लिए 800 करोड़ रूपये की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने एमपीएसईडीसी द्वारा संचालित एवं संग्रहीत म.प्र. स्टेट डाटा सेंटर के विस्तार और अद्यतन डाटा सेंटर 3.0 परियोजना के लिए 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार म.प्र. स्टेट डाटा का आधुनिकीकरण, आईटी एवं डिजास्टर रिकवरी क्षमता विस्तार तथा संबंधित नॉन-आईटी अवसंरचना विकास किया जाएगा।

प्रदेश में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस परियोजना अंतर्गत सरकार की सेवाओं को संगठित करने व दक्ष इलेक्ट्रॉनिक सर्विस प्रदान करने के लिए भारत सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं मध्यप्रदेश शासन की संयुक्त भागीदारी से भोपाल में स्टेट डाटा सेंटर की स्थापना की गई है। प्रदेश स्टेट डाटा सेंटर 12 दिसंबर 2012 से सफलतापूर्वक संचालित है।

परियोजना अंतर्गत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के आई.टी. एप्लीकेशन्स के लिए होस्टिंग सेवाएं प्रदान की जाती है। स्टेट डाटा सेंटर ई-गवर्नेंस क्षेत्र की बहु-उपयोगी एवं डिजिटल भारत की अवधारणा को साकार करने हेतु डिजीटल मध्यप्रदेश के लिये अति आवश्यक अधोसंरचना है। उक्त अधोसंरचना पूर्णतः सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी आधारित है, जो 365 दिन 24 घंटे निरंतर संचालित रहती है। स्टेट डाटा सेंटर के माध्यम से ही प्रदेश में विभिन्न विभागों द्वारा प्रदत्त की जाने वाली नागरिक सेवाओं को नागरिकों को उनके निकटतम स्थल पर सुगमता पूर्वक ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है।

बदलते तकनीकी परिदृश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कम्प्यूटिंग आदि इमर्जिंग फ्रंटियर टेनोलॉजीज़ के परिप्रेक्ष्य में ऐसी नवीन अधोसंरचना स्थापित किये जाने की आवश्यकता है, जो राज्य शासन को नागरिक सेवाओं को अधिक दक्षतापूर्वक प्रदान करने हेतु इन तकनीकों को अपनाने में सक्षम बनाए। अधोसंरचना में वृद्धि के फलस्वरूप विद्युत आपूर्ति, कूलिंग अधोसंरचना आदि संबंधित नॉन-आईटी अधोसंरचना के संवर्द्धन की आवश्यकता भी होगी। उक्त परिप्रेक्ष्य में डाटा सेंटर के विस्तार के लिए एसडीसी 3.0 परियोजना का अनुमोदन प्रदान किया गया।

एमपीएसडीसी 3.0 डाटा सेंटर एक्पैंशन परियोजना को चरणबद्ध रूप से लागू किया जायेगा। प्रत्येक चरण के अंतर्गत डेटा सेंटर के विभिन्न घटकों का क्रमिक विकास एवं सुदृढ़ीकरण किया जायेगा। पहले चरण में डाटा सेंटर साइट के लिए कोर नॉन आईटी एवं आईटी इंफ्रॉस्ट्रक्चर, कंप्यूटर स्टोरेज और नेटवर्क, दूसरे चरण में डीआर साइट का निर्माण एवं डिजास्टर रिकवरी क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण और तीसरे चरण में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा।

यह स्वीकृति राज्य में बढ़ती डिजिटल सेवाओं, डेटा प्रोसेसिंग मांग एवं भविष्य की उन्नत तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित किया गया है, जिससे एक स्केलेबल, सुरक्षित एवं उच्च दक्षता युक्त डेटा सेंटर वातावरण का विकास सुनिश्चित किया जा सके।

विज्ञान पार्क- एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं संचालन की निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत विज्ञान पार्क, एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2029 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए संचालन की निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार विज्ञान पार्क की स्थापना संबंधी योजना के लिए 39 करोड़ 39 लाख रूपये, एकल नागरिकता डाटाबेस के लिए 75 करोड़ और बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना और संचालन संबंधी योजनाओं के लिए 8 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

उज्जैन स्थित आचार्य वराह मिहिर न्यास परिसर में अत्याधुनिक तारामंडल एवं खगोलीय वेधशाला स्थापित की जा रही है। इसमें 1 मीटर ऑप्टिकल टेलीस्कोप एवं 4.5 मीटर रेडियो टेलीस्कोप जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं युवाओं को उच्चस्तरीय अध्ययन एवं अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। विज्ञान पार्क संबंधी योजना खगोल विज्ञान के अध्ययन, अनुसंधान एवं जन-जागरुकता को बढ़ावा देने के साथ समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अंधविश्वासों के निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख खगोलीय अनुसंधान एवं विज्ञान प्रसार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

समय एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के नागरिकों का एकीकृत डेटाबेस विकसित किया जा रहा है, जिससे शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ अधिक त्वरित, पारदर्शी एवं सुगम रूप से उपलब्ध कराया जा सके।

परियोजना से नागरिकों की मूलभूत जानकारी का एकल एवं समेकित स्रोत उपलब्ध होगा, जिससे विभागीय स्तर पर पृथक-पृथक पंजीयन की आवश्यकता कम होगी तथा सेवाओं का प्रदाय अधिक सरल, समयबद्ध एवं नागरिक-केंद्रित बन सकेगा। डेटाबेस में उपलब्ध प्रमाणित जानकारी के आधार पर विभिन्न सेवाएँ एवं योजनाओं का लाभ नागरिकों को “सिंगल क्लिक” पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

एस.सी.डी परियोजना के साथ-साथ “परिचय” परियोजना के माध्यम से आधार आधारित ऑथेंटिकेशन एवं ई-केवाईसी सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे डी.बी.टी प्रक्रियाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। दोनों परियोजनाएँ डेटा समेकन, आधार प्रमाणीकरण एवं विभागीय डेटा साझाकरण के माध्यम से राज्य की ई-गवर्नेंस व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं तथा भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस प्रणाली एवं विजन@2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

मध्यप्रदेश बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना तथा संचालन से संबंधित योजना का उद्देश्य प्रदेश में बॉयो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास, नवाचार एवं उ‌द्यमिता को बढ़ावा देना है। भारत सरकार के जैव प्रौ‌द्योगिकी विभाग की नेशनल बॉयो टेक्नोलॉजी पार्क स्कीम के अंतर्गत संचालित इस योजना के तहत स्टार्ट-अप, नवोन्मेषकों तथा सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यमियों को इन्क्यूबेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रूपये की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्रथम स्थान पाने वाली बालिकाओं एवं बालक को मुख्यमंत्री स्कूटी योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-2031 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की है।

प्रदेश मे स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्रथम प्रयास में नियमित परीक्षार्थी के रूप में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान पाने वाली बालिका एंव बालक को मुख्यमंत्री स्कूटी प्रदाय योजना के अन्तर्गत लाभांवित किया जाएगा। प्रदेश में संचालित मुख्यमंत्री स्कूटी प्रदाय किये जाने के लिए संचालित योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए राशि 495 करोड रूपये पर मंत्रि-परिषद् की स्वीकृति प्रदान की गई ।

मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूँ, चना ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति : 2026 को स्वीकृति

भारत सरकार द्वारा राज्य में गेह, धान (चावल), ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन खाद्य विभाग द्वारा किया जाता है। विक्रय कार्य व्यवस्थित रूप से किये जाने एवं उपज का अधिकतम मूल्य दिलाये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश उपार्जित खाद्यान्न (गेहूँ, धान, ज्वार एवं बाजरा) निस्तारण नीति 2026 को मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी गई है।

नीति अनुसार एक राज्य स्तरीय कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित होगी। समिति द्वारा उपज के मात्रा निर्धारण के बाद प्रस्तावित उक्त मात्रा विक्रय करने के पूर्व रिजर्व प्राईज अपसेट मूल्य तय करना एवं ई-निविदा/ई-ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से दरें आमंत्रित करना, प्राप्त दरों का परीक्षण के बाद अनुमोदन तथा निस्तारण की कार्यवाही का अनुमोदन किया जाएगा।

मध्यप्रदेश आईटी, आईटीइएस एंड ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी : 2023 का संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश आईटी, आईटीइएस एंड ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी : 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। नीति की कंडिका 15, 12.6 और 12.11 में नए प्रावधान प्रतिस्थापित किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नीति को निवेश प्रोत्साहन विभाग की मध्यप्रदेश इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी अनुरूप बनाकर ईएसडीएम इकाइयों के लिए अधिक आकर्षक एवं अनुकूल बनायी गई है। ताकि इस नीति के तहत निवेशकर्ता एवं प्रदेश को लाभ प्राप्त हो सके।

स्वीकृति अनुसार, अगर कोई पुरानी आईटी या डेटा सेंटर कंपनी अपना काम बढ़ाना चाहती है, तो उसे अपने मौजूदा निवेश में कम से कम 30% और पैसा लगाना होगा या अपनी जगह का एरिया 30% बढ़ाना होगा। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली (ईएसडीएम) कंपनियों को अपनी मशीनों में कम से कम 30% (न्यूनतम 15 करोड़ रूपये) या 50 करोड़ रूपये (जो भी कम हो) का नया निवेश करना होगा और उत्पादन क्षमता 20% बढ़ानी होगी। ऐसा करने पर इन सभी कंपनियों को नई कंपनी की तरह ही सरकारी मदद मिलेगी।

जमीन मिलने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ऑनलाइन और आसान बनाया गया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। अगर एक ही जमीन के लिए एक से ज्यादा कंपनियां आवेदन करेंगी, तो ऑनलाइन बोली (ई-बिडिंग) लगाई जाएगी। हालांकि, बहुत बड़े प्रोजेक्ट्स (मेगा प्रोजेक्ट) को इस बोली से छूट मिलेगी और उन्हें ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर सीधे जमीन मिल सकेगी। कंपनियां एमपीआइडीसी या अन्य सरकारी विभागों की जमीन भी ले सकती हैं, लेकिन किराया और बाकी शर्तें उसी विभाग के नियमों के मुताबिक ही तय होंगी।

स्वामित्व योजना के अंतर्गत अभिलेख पंजीयन पर उपकर और अतिरिक्त स्टॉम्प ड्यूटी से छूट को मंजूरी

मंत्रि-परिषद द्वारा राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना अंतर्गत अभिलेखों के पंजीयन पर देय उपकर और अतिरिक्त स्टॉम्प ड्यूटी से छूट प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है।

“भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक : 2026” का अनुमोदन

मंत्रि-परिषद द्वारा “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक : 2026” का अनुमोदन दिया गया है।

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