आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

मन की शुद्धि के लिए मंत्र जाप और प्रभु सुमिरन जरूरी- संत श्री मनोरथराम जी

Chanting mantras and remembering the Lord are essential for the purification of the mind.

भव्य कलश पोथी यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानामृत महोत्सव प्रारंभ

सीतामऊ। धर्म कि नगरी छोटी काशी में नगर के लघुतीर्थ श्री हांडियां बाग गौशाला से मंगलवार को गुप्ता परिवार द्वारा संत श्री कि अगवानी कर स्वागत वंदन अभिनंदन करते हुए रथ बग्गी में पदार्पण करा कर कलश पोथी यात्रा प्रारम्भ होकर पोरवाल मांगलिक भवन पहुंची जहां पर व्यास पीठ पर श्रीमद् भागवत पोथी विराजमान कर कलश स्थापना कर दोपहर 01 बजे से सात दिवसीय भव्य श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव का संत श्री मनोरथराम जी महाराज के मुखारविंद से कथा का ज्ञानमृत प्रवाहित किया गया। कथा के दूसरे दिन बुधवार को गौभक्त संत श्री मनोरथराम जी महाराज ने राजा दक्ष के यज्ञ, भगवान भोलेनाथ के अपमान और माता सती (पार्वती जी) के तिरस्कार के प्रसंग पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति और ईश्वर भक्ति के महत्व को विस्तार से समझाया।

व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए परम पूज्य गुरुदेव ने कहा, “हम अपने इस नश्वर शरीर को स्वच्छ रखने के लिए साबुन, शैम्पू और पाउडर का उपयोग करते हैं, लेकिन हमें अपने मन को उजला (शुद्ध) करने की भी चिंता होनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि मन की शुद्धि किसी भौतिक वस्तु से नहीं, बल्कि केवल मंत्र जाप और भगवान का नाम जपने से ही संभव है।

सृष्टि के विस्तार की कथा सुनाते हुए गुरुदेव ने बताया कि जब ब्रह्मा जी की इच्छा से राक्षस, रीछ और प्रमथगण जैसी तामसी सृष्टियां उत्पन्न हुईं, तो वे स्वयं अपने रचयिता ब्रह्मा जी को ही कष्ट देने लगीं। इस संकट से व्याकुल होकर ब्रह्मा जी ने भगवान नारायण का स्मरण किया, जिसके बाद प्रभु की कृपा से सृष्टि का सात्विक विस्तार हुआ।

संत श्री ने समाज को सीख देते हुए कहा कि आज का मनुष्य दुनियादारी के लोगों से कृपा और उपकार की व्यर्थ आशा रखता है। संसार का नियम है कि जब आप स्वयं सक्षम बनेंगे, तो लोग आपसे उम्मीद रखेंगे। इस ब्रह्मांड में केवल परमात्मा ही सबसे अधिक सक्षम और दयालु हैं, इसलिए मनुष्य को अपनी सच्ची भावना और लौ केवल ईश्वर के प्रति रखनी चाहिए।

कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। इस अवसर पर नगर एवं ग्राम अंचल से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष भक्तों ने कथा का ज्ञानामृत लाभ लिया।आयोजक गुप्ता परिवार ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।

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