भोपालमध्यप्रदेश

MP में 2027 चुनाव में सरपंचों की बढ़ी मुश्किलें, फर्जी विकास कार्यों पर होगा नामांकन निरस्त

MP में 2027 चुनाव में सरपंचों की बढ़ी मुश्किलें, फर्जी विकास कार्यों पर होगा नामांकन निरस्त

(जीएस साँवलिया) मध्य प्रदेश में साल 2027 में होने वाले आगामी त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर हलचल शुरू हो गई है। इस बार का चुनाव वर्तमान सरपंचों के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावी प्रक्रिया में किए जा रहे संभावित बदलावों के तहत अब सरपंचों को दोबारा चुनाव लड़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

*नामांकन के लिए ‘धरातल पर कार्य’ का प्रमाण अनिवार्य*

आगामी चुनाव में यदि कोई वर्तमान सरपंच पुनः चुनाव लड़ने का मन बनाता है, तो उसे नामांकन प्रक्रिया के दौरान एक विशेष ‘कार्य प्रमाण पत्र’ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह प्रमाण पत्र संबंधित ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जारी किया जाएगा।

इस प्रमाण पत्र में मुख्य रूप से यह प्रमाणित करना होगा कि सरपंच के कार्यकाल के दौरान कराए गए सभी विकास कार्य न केवल कागजों में दर्ज हैं, बल्कि वे धरातल (ग्राउंड लेवल) पर भी मौजूद हैं। यह दस्तावेज निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

*आपत्तियों पर होगी एसडीएम स्तर की जांच*

नई व्यवस्था के तहत, यदि विपक्षी प्रत्याशी या कोई अन्य व्यक्ति इस बात पर आपत्ति दर्ज कराता है कि सरपंच द्वारा बताए गए कार्य केवल फाइलों तक सीमित हैं और धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है, तो मामला गंभीर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में,

*एसडीएम (SDM) द्वारा जांच*

आपत्ति मिलने पर उप-विभागीय अधिकारी (SDM) को मामले की भौतिक जांच करने के निर्देश दिए जाएंगे।

*नामांकन निरस्त-* यदि जांच में यह पाया जाता है कि कार्य केवल कागजों में हुए हैं और धरातल पर काम नदारद हैं, तो संबंधित सरपंच का नामांकन पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।

*सचिव पर भी गाज-* यदि कार्य में गड़बड़ी पाई जाती है, तो न केवल सरपंच का चुनाव लड़ने का सपना टूटेगा, बल्कि फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने के आरोप में संबंधित ग्राम पंचायत सचिव की नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।

यह कदम पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अब तक कई बार विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ राशि का आहरण होने की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस नई व्यवस्था के लागू होने से उन सरपंचों की मुश्किलें बढ़ना तय है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में विकास कार्यों को केवल फाइलों तक सीमित रखा है।

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