ई-अटेंडेंस के बाद भी स्कूलों से गायब शिक्षक ?

जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल ग्रामीणों का आरोप अंगूठा और चेहरा लगाकर विद्यालय से निकल जाते हैं शिक्षक
बच्चों की पढ़ाई कि निगरानी पर सवाल AC में बैठकर मॉनिटरिंग कर रहा शिक्षा विभाग ?
मंदसौर। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से डिजिटल एवं ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू की है। सरकार ने 23 जून 2025 को आदेश जारी कर इसे 01 जुलाई 2025 से लागू किया था। इसके बाद नए निर्देश जारी कर 01 जुलाई 2026 से सभी कार्यालयों और कर्मचारियों के लिए इस व्यवस्था के पालन पर फिर से सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। हालांकि मंदसौर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों से इस व्यवस्था को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ शिक्षक विद्यालय पहुंचकर ऐप पर बायोमेट्रिक या फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराते हैं, लेकिन इसके बाद पूरे समय विद्यालय में नहीं रुकते और अपने निजी कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई जगह बच्चों को पर्याप्त शैक्षणिक मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर शिक्षक अपने स्थान पर अन्य व्यक्तियों से पढ़ाने का कार्य करा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि इनमें सच्चाई है तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल डिजिटल उपस्थिति दर्ज कराना ही पर्याप्त नहीं है। वास्तविक निगरानी इस बात की होनी चाहिए कि शिक्षक पूरे विद्यालय समय तक कक्षाओं में मौजूद रहें और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें। उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर प्रभावी दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्कूल शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण कराया जाए, विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया जाए तथा यदि कहीं भी लापरवाही या अनियमितता पाई जाए तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। स्कूल के बच्चे आंगनवाड़ी के भरोसे और शिक्षा विभाग राम भरोसे ? यदि सरकारी स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से शिक्षक नहीं मिलेंगे, तो उनके भविष्य की नींव कैसे मजबूत होगी? शिक्षा केवल उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं, बल्कि कक्षा में पढ़ाने और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने से मिलती है। यदि कहीं भी लापरवाही हो रही है, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि मजबूत शिक्षा ही मजबूत युवा और मजबूत भारत की सबसे बड़ी पहचान है। स्कूल बने हरियाली और शिक्षा का केंद्र सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रत्येक विद्यालय में शिक्षकों के नेतृत्व में विद्यार्थियों से छायादार पौधे लगवाए जाएं तथा उनकी नियमित देखभाल की जाए। इससे स्कूल परिसर सुंदर बनेगा, बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण मिलेगा।


