मप्र राजस्थान को जोड़ने वाली चंबल पुल निर्माण के 115 दिन में एक भी कॉलम नहीं बना

बरसात सामने और कॉफर डेम से झरने लगा पानी, जनता के अरमानों फिर सकता पानी
सीतामऊ। मध्यप्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाले धतुरिया चंबल पुल निर्माण में दूसरी ड्रिल मशीन भी चट्टानी सतह पर काम करने में रही असफल इससे निर्माण कार्य में फिर हुई देरी अब सेतु विकास निगम ने बड़ी विंच ड्रिल मशीनें मंगाने की बात कही है ! जानकारी के अनुसार दो माह पहले 220 क्षमता की डिलर मशीन लाई गई थी लेकिन नदी में चट्टानी परत होने से वह ड्रिलिंग नहीं कर पाई इसके बाद 240 क्षमता कि ड्रिलर मशीन मंगाई गई लेकिन वह भी 115 दिन में एक पिलर के लिए आवश्यक ड्रिलिंग नहीं कर पाई यह भी एक आश्चर्य एवं शोभ का विषय है जहां पिलर के लिए 13 मीटर तक खुदाई जरूरी है वहीं मशीन डेढ़ मीटर से अधिक नहीं पहुंच सकी।22 फरवरी रविवार 2026 को भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ था पुल निर्माण जिसको आज 115 दिन होने आए यानी तीन माह 25 दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक पिलर निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है।बारिश दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है पर चंबल में लगातार बहाव बना है ऐसे में अगले सप्ताह मशीन आने का दावा किया जा रहा है।
लेकिन बारिश शुरू होने के बाद नदी के बीच चिकनी और ढलान वाली मिट्टी पर मिट्टी खिसकने लगी साथ ही पानी झरने लगा।नदी से बाहर खड़ी दूसरी बार फेल हुई ड्रिल मशीन इतनी भारी मशीनें उतारना चुनौतीपूर्ण होगा इधर निर्माण स्थल पर बनाया मिट्टी का कॉफर डेम भी खतरा बनता जा रहा है डेम के नीचे से पानी का कटाव शुरू हो गया है और कई स्थानों पर मिट्टी पोली हो चुकी है बावजूद लोगों कि इसी रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं। नदी का बहाव बढ़ने पर डेम टूटने का खतरा बना हुआ है
सीतामऊ एसडीएम शिवानी गर्ग ने ठेकेदार को तत्काल कॉफर डेम मार्ग बंद करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं सेतु विकास निगम के इंजीनियर प्रवीण नरवरे ने बताया कि चट्टानी क्षेत्र के कारण दिक्कतें आ रही है एक साथ 10 बड़ी मशीनें बुलाई गई हैं जिनके आने के बाद काम शुरू करने का प्रयास किया जाएगा वो भी प्रयास शुरू करेंगे ।


