आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

जब मनुष्य में घमंड आ जाता है तो जीवन का आनंद दुर होने लगता और विनाश पास आने लगता है – साध्वी सुश्री जयमाला

जब मनुष्य में घमंड आ जाता है तो जीवन का आनंद दुर होने लगता और विनाश पास आने लगता है – साध्वी सुश्री जयमाला

कथा महोत्सव एवं विश्व पर्यावरण दिवस पर शिव वाटिका में किया पौधरोपण

सीतामऊ।शिव और पार्वती कि कथा हमें क्या सिखाती है कि जीवन में सनातन धर्म को अपनाना होगा। सबसे पहले अपने मस्तिष्क पर तिलक शिखा तुलसी माला कंठी, मंदिर प्रवेश पर अपने सनातनी वस्त्र और समर्पण भाव के साथ जाना चाहिए। जिससे भगवान शिघ्र प्रसन्न होकर जीवन आनंद कि और बढता है। उक्त ज्ञानामृत साध्वी सुश्री जयमाला वैष्णव दीदी ने मुख्य यजमान महेशचंद्र पालीवाल के लदुना नगर के तालाब किनारे स्थित श्रीराम जानकी मंदिर पर शिव विवाह कथा महोत्सव में व्यक्त किए।
शिव और श्रीराम मिलाप एवं भगवान श्री गणेश अवतार प्रसंग श्रवण कराते हुए कहा कि शंकर भगवान समाधी में बैठे और श्री राम उन्हें जगाकर शंकर जी से विवाह करने प्रस्ताव रखा। तो शंकर जी ने कहा कि अब मुझसे विवाह कौन करेगा कह कर फिर ध्यान समाधि में लीन हो गए।इधर ब्रह्मा जी से असुर ने शंकर जी के पुत्र से मृत्यु का वरदान प्राप्त कर लिया था।
जब मनुष्य में घमंड आ जाता है तो जीवन का आनंद दुर होने लगता और विनाश पास आने लगता है।दक्ष प्रजापति जो भी करता कहता कि मैं मैं घमंड बढ़ गया और अंत में विनाश कि और बढ़ा और अपना शिश गंवा कर बकरे का शिश लगवाया। अगली कथा प्रसंग भगवान विष्णु और ब्रह्मा के बीच में बढ़ा बताते कि होड़ लग गई।वो महादेव के पास गये महादेव ने ज्योतिर्लिंग के छोर देखने कि कहा तोदोनों नहीं देख पाये भगवान नारायण ने अपनी हार मानकर अपने को छोटा मान लिया। वही ब्रह्मा जी ने झूठ बोले और कहा कि हां मैंने छोर ढूंढ लिया है।केतनी पुष्प ने देखा है। ऐसे में झूठ से शंकर भगवान क्रोधित हुए और उन्होंने ने ब्रह्माजी के पांच मुख मेसे एक जिससे झूठ बोले उसे काट दिया।
साध्वी वैष्णवी ने कहा कि त्रेतायुग में शंकर जी सती को श्रीराम कि कथा सुनने कि कहा तो सती का मन नहीं था पर पति कि आज्ञा का पालन करना पत्नी का फर्ज है।सती जी ने कुंभज ऋषि के यहां कथा श्रवण करने कि हां कर दी। कथा वृतांत मे भगवान शिव ने विवाह ताड़कासुर का संवहार करने के लिए किया। ताड़कासुर ने ब्रह्माजी से शंकर जी पुत्र से मरने का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया था।रानी मैना देवी कि भक्ति से प्रसन्न होकर भवानी ने पुत्री के रुप में सहज सुंदर सुशील निपूर्ण कन्या के रुप में उमा अम्बिका भवानी अवतरित हुई। जिससे भोले बाबा ने विवाह किया।
साध्वी जी ने कहा कि मन के अंदर विचार अच्छे रखने से जीवन अच्छा रहता है। जहां पर जाते वह सभी धरा पवित्र होती है ‌। ब्रह्म लोक से शिव लोक आने में 48 मिनट लगते अभी के 24 घंटे एक दिन रात लग जाते हैं। महादेव कि समाधी समाप्त करने को लेकर कामदेव का बुलाया गया। कामदेव कि भी शंकर जी को जगाने कि कि ताकत नहीं पर शंकर जी कि प्रार्थना कर जगाया है शंकर जी ने क्रोधित होकर कामदेव को मार दिया।
शंकर ने श्रीराम गुरु कि बात मानकर विवाह के लिए राजी हो गए।आज के समय में गुरु को तो मानते पर गुरु कि नहीं मानते हैं।
वैशाख महिने कि पंचमी गुरुवार को शंकर जी का विवाह हुआ था। शिवरात्रि लोकिक रिवाज में है। पत्रिका में जो विवाह का समय लिखा उसी समय विवाह होना चाहिए है अब होता ही नहीं। फिर वह लिखना का क्या है।
कथा प्रसंग आगे श्रवण कराते हुए कहा कि देवता गणों भूत प्रेत के साथ भोले बाबा कि बारात राजा हिमाचल रानी मेनावती के यहां पहुंचीं।रानी मैना देवी ने दुल्हा बनकर आए शंकर भगवान जमाई का स्वागत आरती करने ग ई वहां दुल्हे को ऐसे विचित्र स्वरुप में देखा तो अचरज में पड़ ग ई और रिश्ता करने वाले नारद जी को भली बुरी सुनाई। कथा के माध्यम से कहा कि रिश्ता अपने अनुसार अच्छा होता तो हमने किया और खराब तो उसको सुनाने में कसर नहीं छोड़ते है। नारद जी ने कहा कि माताजी जो कन्या आपके यहां आई वो तो जगत जननी है उसका तो पहले से ही बाबा के साथ विवाह लिखा हुआ है।बस आप हम तो माध्यम है।
कन्यादान पाणिग्रहण संस्कार के पश्चात मां मैना देवी ने बेटी पार्वती से कहा कि अब सास को मां मानना और ससुर जी तेरे पिता तुझे बहू बनकर नहीं बेटी बनकर रहना है। पहले तो सास भी कभी बहू थी अब तो सास बहू बन गई और बहु सास बन गई।मान सम्मान खत्म हो गया पर वह यह नहीं जानती है कि उसे भी आगे सास बनना है। अभी क ई घरों में अपनी बेटी को ससुराल भेजने से पहले संस्कार नहीं देते और कहते हैं कि कोई कुछ बोले तो फोन लगा देना। उसका घर बनने से पहले ही बिगाड़ने कि शुरुआत कर देते हैं।
साध्वी जी ने कहा कि हमारी दैनिक दिनचर्या संस्कारों से होना चाहिए।सबसे पहले प्रातः काल उठकर अपने इष्टदेव हाथों के दर्शन करे दैनिक चर्या स्नान आदि से निवृत्त होकर के सूर्य देव जल चढ़ाएं भोजन से पहले भोग लगाएं,
साध्वी जी ने परिवारो में बात बात पर झगड़े को लेकर कहा कि शंकर भगवान परिवार के वाहन सबके एक-दुसरे के दुश्मन है फिर भी सभी मिलकर रहते हैं। ऐसा परिवार एक दुसरे के दुश्मन नहीं है तो हम सब मिलकर रह सकते हैं। लड़ाई झगडे हो जाएं पर बिना बोले नहीं रहना चाहिए। बोलना बंद करने से रास्ते बंद हो जाते हैं। संतों कि सेवा करने से उनके भाव आत्मा से जो निकलता है वह हमारी कष्टों को दूर कर देता है।दिक्षा गुरु एक हो सकतें और जिनसे शिक्षा मिलती है वो शिक्षा गुरु होते हैं जो अधिक हो सकतें हैंजो दुसरो में बुराईयां खोजता है वह बुराईयों में ही रह जाता है। पर जब अपने में बुराईयां देखता है वह विनम्र हो जाता है।

ज्ञान और डॉक्टर कि पर्ची कि दवाईयां समय समय पर लेने से विकार बिमारी नष्ट हो जाती
कथा महोत्सव में सुश्री फाल्गुनी वैष्णव दीदी ने अपने ज्ञानामृत में कहा कि पतियों में स्व का भाव और पत्नीयों में परे का भाव है। इसलिए महिलाएं अपने पति के घर आने आनंद महसूस करती है। कहते हैं कि जहां नारीयों कि पूजा कि जाती है वहां देवता रमते हैं। कथा श्रवण करने से आत्मा का अंजन होकर विकार नष्ट होते हैं।कब नष्ट होते जैसे डाक्टर कि पर्ची पर लिखी दवाईयां समय समय पर लेते हैं तो बिमारी खत्म हो कर स्वस्थ हो जाते हैं।
वैष्णव दीदी ने कहा कि तेरा मेरा एक नूर तो फिर काहे का हजूर, तुने शक्ल बनाई श्वान की, मुझे ओढादी मनुष्य की, फिर तु क्यों जा रहा दूर है…

श्रीमती पालिवाल के सेवानिवृत्त पर, एवं गणमान्य जनों का  किया सम्मान

कथा विश्राम के पश्चात शिक्षिका श्रीमती कमला महेशचंद्र पालीवाल के सेवानिवृत्त होने पर उनका साध्वी जयमाला दीदी द्वारा सम्मान किया तथा इस अवसर पर महंत जितेंद्र दास जी महाराज राष्ट्रीय संयोजक श्री बोहरा सहित गणमान्य जनों का सम्मान किया गया।महाआरती एवं महाप्रसादी के साथ कथा महोत्सव का समापन किया गया।

कथा महोत्सव एवं विश्व पर्यावरण दिवस पर किया पौधरोपण–

लदुना नगर के तालाब स्थित मशहूर मोटी दुकान श्री राम जानकी मंदिर पर विश्व पर्यावरण दिवस एवं पुरषोत्तम मास पर पर्यावरण के अधिष्ठाता देवता देवाधिदेव महादेव कि शिव विवाह कथा महोत्सव का आयोजन किया गया तथा महंत जितेंद्र दास जी महाराज के सानिध्य में साध्वी सुश्री जयमाला वैष्णव दीदी, सुश्री फाल्गुनी वैष्णव बरखेड़ा कला, पुजारी महेश पालीवाल आनंद सोसायटी अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मांदलिया, सत्यनारायण बैरागी अखंड भारत पालीवाल ब्राह्मण महासभा राष्ट्रीय संयोजक ब्रजमोहन बोहरा खुरज राजसमंद राजस्थान, नटवरलाल जी ओमप्रकाश धनोतिया भेरुलाल मकवाना नवीन विश्वास द्विवेदी, अंबालाल मकवाना कैलाश बैरागी पुष्कर बैरागी उमा कुंवर द्वारा शिव वाटिका में पौधारोपण किया गया। कथा के पूर्व गायत्री परिवार द्वारा यज्ञ हवन किया गया।

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