समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 19 अप्रैल 2026 रविवार

जिले में 19 अप्रैल को मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना अन्तर्गत 167 जोड़े बंधेंगे विवाह बंधन
विधायक श्री मथुरालाल डामर की देखरेख में होगा पूरा कार्यक्रम
रतलाम : शनिवार, अप्रैल 18, 2026,
रतलाम जिले के ग्राम कुण्डाल मे 19 अप्रैल को मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना अंतर्गत रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के 167 जोड़े विवाह बंधन में बंधेंगे। जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह कार्यक्रम रतलाम ग्रामीण विधायक श्री मथुरालाल डामर द्वारा प्रशासनिक अमले के सहयोग से करवाई जा रही है। उक्त विवाह समारोह मे मध्यप्रदेश सरकार कि प्रोत्साहन राशी के अलावा कन्यादान स्वरुप *07 घरेलु आवश्यकता के* *बर्तन* भी विधायक श्री मथुरालाल डामर द्वारा प्रदान किए जाएंगे साथ ही भोजन की व्यवस्था स्वयं के व्यय से प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में लगभग 10000 लोगों के शामिल होने का अनुमान है l
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एडीएम एवं तहसीलदार ने भरे स्व गणना पत्र
https://se.census.gov.in/ सीधे लिंक पर जाकर जनगणना फॉर्म घर बैठे जमा करे
रतलाम : शनिवार, अप्रैल 18, 2026,

जनगणना निदेशालय भारत सरकार के निर्देशानुसार जनगणना 2027 के प्रथम चरण ” मकान सूचीकारण एवं मकानों की गणना” के अंतर्गत जिले में स्व गणना 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चल रही है।
प्रत्येक नागरिक अपने घर बैठे आसानी से https://se.census.gov.in/ लिंक से फॉर्म भरकर “स्व-गणना” सुविधा का लाभ उठा सकता है। स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा जनगणना प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सुविधा के माध्यम से नागरिक बिना किसी फील्ड कर्मी के घर आए, स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज कर सकते हैं।
जिले में एडीएम डॉ शालिनी श्रीवास्तव,तहसीलदार रतलाम ग्रामीण श्री आशीष उपाध्याय ने स्व गणना पोर्टल पर स्वयं का प्रारंभिक पंजीकरण किया।
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एमपी ई-सेवा’ से डिजिटल गवर्नेस को मिला सशक्त आधारः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
56 विभागों की 1700 सेवाएँ एक ही पोर्टल पर उपलब्ध सेवा वितरण प्रणाली हुई अधिक जवाबदेह एवं सुव्यवस्थित
रतलाम : शनिवार, अप्रैल 18, 2026,
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एमपी ई-सेवा पोर्टल और मोबाइल ऐप’ के माध्यम से प्रदेश में डिजिटल गवर्नेस को सशक्त आधार मिला है। इससे नागरिक सेवाएँ अब अधिक सरल, सुगम और सुलभ हुई हैं। डिजिटल तकनीक आज सुशासन की आधारशिला बन चुकी है और प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए देश में नई पहचान स्थापित कर रहा है। अब प्रदेशवासियों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक ही मंच पर सभी सुविधाएँ सहज, जारित और पारदर्शी रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से सेवा वितरण प्रणाली अधिक जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनी है। साथ ही नागरिकों के समय एवं संसाधनों की बचत सुनिश्चित हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एकीकृत नागरिक सेवा मंच 56 विभागों की 1700 से अधिक सरकारी सेवाओं और योजनाओं को एक ही डिजिटल विंडो पर उपलब्ध करा रहा है। वर्ष 2026 तक 100 प्रतिशत ई सेवा डिलीवरी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो प्रदेश को डिजिटल गवर्नेस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अतर्गत मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एमपीएसईडीसी) के सेंटर फॉर एक्सीलेंस द्वारा विकसित यह फ्लेटफॉर्म नागरिकों, विभागों एवं सेवाओं को एकीकृत डिजिटल इको-सिस्टम में जोड़ते हुए सुशासन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
एकीकृत पोर्टल पर सभी सेवाएँ, प्रक्रिया हुई सरल
एमपी ई-सेवा पोर्टल पर विभिन्न विभागों की 1700 सेवाओं को एकीकृत कर नागरिकों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल पर जाने और दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता समाप्त की गई है। नागरिक अब eseva.mp.gov.in और मोबाइल ऐप के माध्यम से पात्रता जांच, आवेदन, स्टेट्स ट्रैकिंग और अनुमोदन जैसी सभी सुविधाएँ एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर आधार आधारित प्रमाणीकरण, ई-साइन और डिजिटल प्रमाणपत्र की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और फेसलेस बनाई गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है।
समग्र पोर्टल से एकीकरणः ऑटो-वेरिफिकेशन की सुविधा
एमपी ई-सेवा’ को समय सामाजिक सुरक्षा मिशन के समय पोर्टल से जोड़ा गया है। प्रत्येक परिवार को 8 अंकीय परिवार आईडी और हर सदस्य को 9 अंकीय सदस्य आईडी दी गई है। इससे ऑटो-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को
सक्षम बनाया गया है। इससे पात्रता निर्धारण स्वतः हो जाता है और अनावश्हाक देरी व दोहराव समाप्त होता है। पोर्टल की प्रमुख विशेषता ‘ऑटो-फेचिंग डॉक्युमेंट्स’ है, जिससे नागरिकों को बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की आवश्यकता नहीं रहती। एक बार अपलोड किए गए दस्तावेज आगे की सेवाओं में स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं।
सुगम, सुरक्षित एवं नागरिक केंद्रित ‘ऐप-डिजाइन’
एमपी ई-सेवा पोर्टल को मोबाइल फर्स्ट दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया है। इसमें बहुभाषीय सुविधा के साथ दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष डिजाइन किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिक आसानी से इसका उपयोग कर सकें। प्लेटफ़ॉर्म पर अब तक 2 लाख 14 हजार से अधिक ट्रांसेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 3 हजार 446 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 1 लाख 64 हजार 600 से अधिक ट्रैक/डाउनलोड गतिविधियों और 45 हजार 954 समग्र पात्रता जांचें की गई हैं।
डिजिटल गवर्नेस में प्रदेश की सशक्त उपस्थिति
राष्ट्रीय ई-गवर्नेस सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने 1752 ई-सेवाओं को मैप कर सभी 56 अनिवार्य विभागीय सेवाओं को 100 प्रतिशत एकीकृत करते हुए देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। प्रदेश को ‘सायबर तहसील’ के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा ‘संपदा 2.0’ के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेस सुवर्ण पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं, जो डिजिटल गवर्नेस के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों को दर्शाते हैं।
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