आदिकवि महाऋषि वाल्मीकि जी कि निकाली शोभायात्रा, मनाई जयंती

नपं अध्यक्ष ने घोषणा करते हुए कहा कि महाऋषि वाल्मीकि धर्मशाला मंदिर में प्रतिमा होगी स्थापित
अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने समाज को जातियों में बांटने का काम किया, अब एक होने का समय – श्री बामनिया
सीतामऊ। वाल्मीकि समाज द्वारा आदिकवि महाऋषि वाल्मीकि जी कि जयंती पर मोड़ी माताजी मंदिर प्रांगण से बेंड बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा गणपति चौक होते हुए सदर बाजार होकर महाराणा प्रताप चौराहा बस स्टैंड होकर नगर परिषद सभागार पहुंची। जहां पर मुख्य अतिथि नपं अध्यक्ष मनोज शुक्ला उपाध्यक्ष सुमित रावत भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र बामनिया सांसद प्रतिनिधि राजेन्द्र राठौड़, समाचार पत्र संघ जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मांदलिया जनपद सदस्य विष्णु पाटीदार, भाजपा पिछड़ा मोर्चा मंडल अध्यक्ष मंगलेश पाटीदार महामंत्री दशरथ गुर्जर के अतिथि में जयंती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का संचालन अतिथि नपं सभापति विवेक सोनगरा ने किया एवं आभार अर्जून कल्याणें ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर नपं अध्यक्ष ने कहा कि हमारे महाऋषि वाल्मीकि जी का समाज आज हमारे लिया गर्व का विषय है। वाल्मीकि समाज सफाई जन सफाई करने से छोटे नहीं होते हैं। सफाई करने वाले का स्थान समाज ही नहीं परिवार में भी ऊंचा होता है। वाल्मीकि जी ने पहले स्वयं के भीतर और बाद में संपूर्ण समाज के अंदर अज्ञानता कि सफाई का हमें अनुपम ग्रंथ प्रदान किया है। इस अवसर पर अध्यक्ष श्री शुक्ला ने नव निर्मित वाल्मीकि धर्मशाला में मंदिर महाऋषि वाल्मीकि जी कि प्रतिमा लगाने कि घोषणा की।
भाजपा मंडल अध्यक्ष जितेंद्र बामनिया ने कहा कि समाज में पहले भेदभाव छुआछूत नहीं था राम राजपूत होने पर भी शबरी के झूठे बैर खाकर शबरी को माता का दर्जा प्रदान किया। पहले केवल कार्य के आधार पर चार वर्ण व्यवस्था थी। पर आरक्षण कि वजह से आज जातिया बन गई केवल जातिया ही नहीं बनी बल्कि एक दूसरे से दुरी बन गई। रत्नाकर डाकु थे नारद जी के ज्ञान प्रकाश से महाऋषि वाल्मीकि बने। और उनके आश्रम पर माता सीता रही जहां पर लव कुश को जन्म दिया और लव कुश के पालन पोषण और शिक्षा दिक्षा वाल्मीकि जी ने प्रदान कर निपुण बनाया। ऐसे कई उदाहरण हैं कि सनातन धर्म में हम सब एक ही रहें हैं। आज पुनः एक होकर मानव समाज कल्याण हेतु कार्य करना है। कुछ समाज विरोधी लोग हैं जो जातियों में हमें बांट रहे हैं उनसे संभल कर रहना है। नहीं तो हम पहले भी पिछड़े थे फिर पिछड़े रह जाएंगे।आज हम सब उच नीच जाति भेद भाव छोटा बड़ा का भेद भाव मिटा कर एक होकर सामाजिक समरसता लाना है।
नपं उपाध्यक्ष सुमित रावत ने कहा कि मनुष्य चाहे तो अच्छा और चाहे तो बुरा बन जाता है। रावण विद्वान होते हुए भी राक्षस बना और रत्नाकर डाकु से महाऋषि वाल्मीकि बन गए।समाचार पत्र संघ जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मांदलिया ने कहा कि समाज में जिसने मर्यादा और परिवार समाज के संचालन कि आदर्शता देने वाले भगवान श्री राम के जीवन का संपूर्ण वृतांत लिखकर रामायण ग्रंथ के रचयिता आदिकवि महाऋषि वाल्मीकि जी कि जयंती आज हम मना रहे हैं। हम सबको अपने बच्चों परिवार को रामायण आदि ग्रंथों का प्रतिदिन पाठ करने का संकल्प लेना चाहिए जिससे परिवार संस्कृति और संस्कारोंवान बनेंगे और परिवार आनंदमय होगा।
सांसद प्रतिनिधि राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि वाल्मीकि जी कोई सामान्य व्यक्ति नहीं थे।वे भगवान श्री के जीवन को लिखकर रामायण जैसे महान ग्रंथ के रचनाकार थे। रामायण को जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
शोभायात्रा का पोरवाल समाज संरक्षक डॉ गोवर्धनलाल दानगढ़ अध्यक्ष कैलाश घाटिया काका वरिष्ठ उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मांदलिया सहित जगह जगह स्वागत किया गया।

प्रारंभ में अतिथि गणों द्वारा महाऋषि वाल्मीकि जी कि तस्वीर पर माल्यार्पण दिप प्रज्वलित एवं पूजा अर्चना कर समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मिडिया प्रभारी रोहित गुप्ता वाल्मीकि समाज जन सीताराम कल्याणें कचरुलाल कल्याणें मुकेश गोसर अर्जून कल्याणें पंकज लदोदिया, राजकुमार नरवाले मुकेश कोड़ावत आदि समाजजनों ने अतिथियों को फुल माला एवं साफा पहनाकर कर स्वागत अभिनंदन किया।



