जबरिया हनुमान जी कि पूजा अर्चना कर बैंड बाजे के साथ निकली भव्य पौथी कलश यात्रा

जहां भाव है वहां सब है जहां भाव नहीं वहां कुछ नहीं- संत श्वासानंदजी महाराज
सीतामऊ। केसरिया हिंदू वाहिनी सनातन कल्याण समिति के तत्वाधान में महंत जितेंद्र दास महाराज के उपस्थिति में समाजसेवी सत्यनारायण सोनी काका स्वर्णकार समाज अध्यक्ष महेश सोनी के द्वारा कथा प्रवक्ता संत श्री श्वासानंदजी महाराज के आगमन पर भव्य स्वागत अभिनंदन किया तत्पश्चात बस स्टैंड जबरिया हनुमानजी कि पूजा अर्चना कर बैंड बाजे रथ बग्गी में संत श्री का पदार्पण करा कर कलश पोथी यात्रा प्रारम्भ होकर पोरवाल मांगलिक भवन पहुंची जहां पर प्रथम दिवस कथा यजमान श्री सत्यनारायण सोनी काका दम्पति द्वारा श्रीमद्भागवत पोथी व्यास पीठ पर पदार्पण कर पूजन कर सामुहिक महाआरती कर कथा प्रारम्भ हुई।कथा का ज्ञानामृत श्रवण कराते हैं संत श्री ने कहा कि रोड़पति हो या करोड़पति कोई आनंद का जीवन नहीं जी रहा है सुख और दुख में रह रहा कभी सुख कि हवा कभी दुख कि हला झेल रहा है। संत श्री ने कहा कि सभी जीव आत्मा में कुछ ही आनंद में है बाकी तो आते-जाते हैं कभी मनुष्य कभी जीव-जंतु प्राणीयों का जन्म लेते मर जाते इस क्रम में है। पर जो संत महात्माओं के शरण में आ जाते वें संसार भव सागर से तर कर भगवान कि शरण को प्राप्त करता है।
संत श्री ने कहा कि नगर के चौराहा पर एक दुःखी महिला अपने बच्चों के साथ बैठी उसको धन दौलत व्यंजन सब दे रहे पर वह रोती बंद नहीं हो रही।जब देव ऋण नारद जी वहां से भगवान का भजन करते हुए निकले तो उस महिला का रोना बंद हुआ महिला ने आगे जा रहे नारद जी को बुलाकर अपने दुःखी होकर रोने को बंद करने के लिए कहा कि आप ही बंद कर कर सकते हैं। नारद जी ने महिला से उसका परिचय पूछा तो उसने अपना नाम भक्ति और बेटों का नाम ज्ञान और वैराग्य बताया और कहा कि उदर निवास महाराष्ट्र से होकर कर्नाटक से जाती हुं।
संत श्री ने कहा कि जहां भाव है वहां सब है जहां भाव नहीं वहां कुछ नहीं और भाव उदर से आता है। किसी का मान सम्मान देना भाव के पैदा नहीं हो तो कुछ नहीं हो सकता है। करोड़पति हैं पर उसका भाव परिवार के प्रति खर्च करने का नहीं है तो जो चल रहा वहीं रहेगा पर एक सामान्य व्यक्ति को आनंद में रहना है उसे भगवान पर भरोसा है तो वह भाव पूर्वक हर कार्य करता तो वह खुद और परिवार भी आनन्द में रहता है। इसलिए घर को स्वर्ग बनाना है तो बहु का सास परिवार के प्रति भाव और सास का बहू और परिवार पर भरोसा है तो झगड़े हमेशा खत्म हो जाएंगे।
संत श्री ने आत्माराम ब्राह्मण और धुंधकारी पत्नी कि कथा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उसके बेटा बेटी नहीं हो रहे थे तो संत कि कृपा आशीर्वाद स्वरूप ब्राह्मण को फल प्रदान किया ब्राह्मण ने उसकी पत्नी धुंधली को दिया धुंधली को अपने पति पर भरोसा नहीं था उसने वह फल गौ माता को खिला दिया। गौ माता से एक बालक का जन्म हुआ उसका नाम गौ कर्ण रखा वहीं धुंधकारी ने पति को बिना बताए अपना बेटा बता कर बहिन के बेटे को गोद रख लिया उसका नाम धुंधकारी रखा। अच्छा संस्कार रहन सहन में रहकर गौ कर्ण बड़ा होकर ज्ञानवान विद्वान बना। वहीं धुंधकार गलत संगत व्यसन लत वैश्याओं के साथ रहकर घर को बर्बाद कर दिया यहां तक कि अपनी चाहत में माता पिता को भी मार दिया।
संत श्री ने कहा कि यह भागवत कथा सिर्फ कथा नहीं यहा पर जो आत्मा भटकरी चाहे कथा श्रवण करते हो या नहीं कर रहे इस क्षेत्र में है उन सब का आह्वान कर यह भद्र पीठ और बांस पर नारियल बांध कर विप्र जनों ने स्थापना कि यह कथा पितृों को तारने और सबके कल्याण के लिए प्रारंभ हुई है।आप अपने समर्पण भाव से श्रवण करना है। ऐसे ही संत गौ कर्ण जी ने अपने पिता आत्माराम और माता धुंधकारी भाई धुंधकार तीनों कि भटकती हुई प्रेत आत्मा को विधिवत भागवत कथा का श्रवण करा कर मुक्ति प्रदान कि।
संत श्री ने कहा कि जैसा परिवार के माता पिता बड़े जो करेंगे उनके बच्चे भी वैसा ही करेंगे आप दिन भर मोबाइल चलाओ और बच्चे पढ़ाई करें तो यह संभव नहीं, आप खुद संस्कारित नहीं हो और बच्चे आपकी बात मानें यह नहीं हो सकता है। हम परिवार के साथ आंनद में रहें तो खुद को बदलना पड़ेगा। हमारे आचार विचार और रहन सहन कि मर्यादा होना चाहिए। तभी हमारे बच्चे आज्ञाकारी और सेवा करने वाले होंगे। नहीं तो जीवन भर धन धन करते हुए धनवान बन जाओगे पर अंतिम समय में निधन होकर ही जाना पड़ेगा।पर आप दुखी आशान्वित कि मदद पेड़ पौधों कि रक्षा धर्म में आगे रह कर परमार्थ करते हैं तो उसका नाम अमर होकर इस जन्म में मोक्ष प्राप्त कर वैकुंठ धाम को जाता है।संत श्री ने भगवान शंकर द्वारा माता पार्वती को कथा श्रवण सहित कथा के प्रसंगों द्वारा जीवन को आनंद करने का ज्ञानामृत प्रदान किया।
इस अवसर पर पोरवाल समाज अध्यक्ष कैलाश घाटिया काका लक्ष्मीनारायण मांदलिया ब्राह्मण समाज अध्यक्ष नवीन विश्वास द्विवेदी, भाजपा नेत्री श्रीमती राधा सोनी पोरवाल महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती अनुसुइया घाटिया संजय सोनी, पुरणदास बैरागी, रमेश चंद्र गुप्ता, पुरषोत्तम माहेश्वरी, प्रहलाद सिंह, कोठारीजी रामदयाल घाटिया, शिवनारायण मांदलिया,प्रभुलाल राठौर, कैलाश चंद्र बैरागी लदुना स्वागत अभिनंदन में विवेकानंद हाई स्कूल कि बालिकाएं सहित बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी जनों ने कथा लाभ प्राप्त किया।



