पद्म वसुधा आरण्य : 5100 पौधों से साकार हुआ प्रकृति संरक्षण का संकल्प

पद्म वसुधा आरण्य : 5100 पौधों से साकार हुआ प्रकृति संरक्षण का संकल्प
सुवासरा ।ग्राम पंचायत घसोई के खेड़ा में 5100 पौधों का एक साथ रोपण कर ‘पद्म वसुधा आरण्य’ के रूप में विकसित किया गया प्रकृति संरक्षण का एक अनूठा प्रयास वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु की दो प्रमुख सहचरी शक्तियाँ श्रीदेवी और भूदेवी मानी जाती हैं। श्रीदेवी समृद्धि, सौंदर्य और मंगल की प्रतीक हैं, जबकि भूदेवी धैर्य, सहनशीलता, पोषण, उर्वरता और जीवन को धारण करने वाली शक्ति का स्वरूप हैं। ‘ *पद्म वसुधा आरण्य* ’ की संकल्पना इसी दर्शन को धरातल पर उतारने का एक प्रयास है जहाँ प्रकृति का संरक्षण और समृद्धि का संवर्धन साथ-साथ आगे बढ़े।ग्राम पंचायत घसोई के खेड़ा में 5100 पौधों का एक साथ पौधारोपण कर इस क्षेत्र को ‘पद्म वसुधा आरण्य’ नाम दिया गया है। इसका मूल उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि एक ऐसा प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण का आधार बने।
इस पहल में मदर नेचर के संरक्षण, पशु-पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास विकसित करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने को विशेष प्राथमिकता दी गई है। पौधारोपण से पूर्व भूमि का चयन, संपूर्ण क्षेत्र की फेंसिंग तथा पौधों के लिए आवश्यक जल व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसके पश्चात मियावाकी पद्धति से 5100 पौधों का रोपण किया गया।
इस अभ्यारण्य में मुख्य रूप से स्थानीय एवं देशज प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें पीपल, बरगद, करंज, जंगल जलेबी, चिरौंजी, महुआ, खिन्नी, गूलर सहित अनेक प्रजातियां शामिल हैं। इन देशज प्रजातियों का चयन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि वे स्थानीय जलवायु एवं मिट्टी के अनुरूप विकसित होकर पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों तथा अन्य जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक आश्रय और भोजन का स्रोत बन सकें।
‘पद्म वसुधा आरण्य’ इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह केवल एक पौधारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती और मानव के बीच संतुलन को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।
इस संपूर्ण परिकल्पना और दर्शन के पीछे तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत श्री प्रभांशु कुमार सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका एवं परिश्रम रहा है। उनके द्वारा प्रकृति संरक्षण को केंद्र में रखते हुए इस अभिनव पहल की संकल्पना को दिशा दी गई।
वहीं,अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), उपखण्ड सीतामऊ श्रीमती शिवानी गर्ग एवं उनकी टीम के समन्वित प्रयासों और मैदानी स्तर पर किए गए निरंतर सहयोग से भूमि चयन से लेकर फेंसिंग, जल व्यवस्था एवं पौधारोपण तक की कार्यवाही को सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।


