भौगोलिक एवं व्यवसायिक दृष्टि से विकसित मन्दसौर को संभाग का दर्जा दिया जाए

चहुमुखी विकास के लिये मंदसौर को नगर निगम बनाया जाए, हवाई सेवा भी जल्द शुरू हो
– औंकारलाल बागड़िया
समाजसेवी मन्दसौर
मंदसौर सघन वन और कलकल करते झरनों के बीच इतिहास, आस्था और रोमांच की अद्भुत ज़िला है
मंदसौर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसके दक्षिण-पूर्व में ही अखंड पत्थर के स्तंभ हैं जिन पर शिलालेख अंकित हैं और जो 437 ईस्वी में सूर्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हैं । पूर्व में 14वीं शताब्दी का एक किला स्थित है। यह शहर ग्वालियर रियासत का हिस्सा था ।
आज मंदसौर सड़क और रेल जंक्शन होने के साथ-साथ अनाज, कपास और कपड़े के व्यापार का केंद्र है। कपास की ओटाई और पिसाई, चीनी की पिसाई, खाद्य प्रसंस्करण और हथकरघा बुनाई यहाँ के प्रमुख उद्योग हैं। मंदसौर में उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय (1957) से संबद्ध कई महाविद्यालय , एक संगीत अकादमी और एक प्रौद्योगिकी संस्थान हैं। जनसंख्या (2001) 116,505; (2011) 141,667।
भौगोलिक और क्षेत्रफल की मुख्य बातें
कुल क्षेत्रफल: 5,521 वर्ग किलोमीटर
उत्तर से दक्षिण लंबाई: लगभग 142 किलोमीटर
पूर्व से पश्चिम चौड़ाई: लगभग 124 किलोमीटर
प्रशासनिक स्थिति:
मुख्य विशेषताएँ
प्रशासनिक मुख्यालय: मंदसौर शहर खुद जिला और तहसील दोनों का मुख्य प्रशासनिक केंद्र है।
गाँवों की संख्या: इस तहसील के अंतर्गत लगभग 168 गाँव आते हैं।
विस्तार: अन्य तहसीलों की तुलना में यहाँ शहरी और ग्रामीण आबादी का घनत्व तथा क्षेत्रफल अधिक है।जिसमें कुल 8 तहसीलें (मंदसौर, मल्हारगढ़, गरोठ, शामगढ़, दलौदा, भानपुरा, सुवासरा, सीतामऊ) हैं
तहसील —गाँवो की संख्या
मंदसौर –168
मल्हारगढ़-174
सीतामऊ -173
सुवासरा -78
भानपुरा-96
गरोठ-107
शामगढ़ -98
दलौदा -61
- भगवान पशुपतिनाथ मंदिर: यह मंदसौर की सबसे प्रसिद्ध पहचान है। यहाँ शिवना नदी के तट पर भगवान शिव की एक अत्यंत दुर्लभ अष्टमुखी (आठ मुख वाली) मूर्ति स्थापित है, जिसकी तुलना नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से की जाती है।
- अफ़ीम का प्रमुख उत्पादक: मंदसौर जिला भारत में अफ़ीम (Opium) के बड़े पैमाने पर उत्पादन और खेती के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
- स्लेट पेंसिल उद्योग: यहाँ का स्लेट पेंसिल निर्माण उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक मुख्य स्तंभ है।
- भौगोलिक स्थिति: यह जिला उत्तर में नीमच, दक्षिण में रतलाम और पूर्व-पश्चिम में राजस्थान राज्य की सीमाओं से घिरा हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 5,535 वर्ग किलोमीटर है।
पुराना नाम-दशपुर (गुप्त कालीन ऐतिहासिक केंद्र)
प्रशासनिक- मुख्यालय मंदसौर शहर
संभाग (Division) -उज्जैन संभाग
प्रमुख नदी-शिवना नदी
स्थानीय- भाषाएँ मालवी, मेवाड़ी और हिंदी
परिवहन कोड-MP 14
पशुपतिनाथ मंदिर: शिवना नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में भगवान शिव की अनूठी आठ मुखों वाली प्रतिमा है।
धर्मराजेश्वर: एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया 9वीं शताब्दी का अद्भुत अखंड प्राचीन मंदिर।
मंदसौर किला: दशपुर के नाम से भी जाना जाने वाला यह ऐतिहासिक किला मालवा और मेवाड़ की सीमा पर स्थित है।15वीं शताब्दी में निर्मित, मंदसौर किला अपनी शानदार वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसे होशंग शाह गोरी ने बनवाया था, जिनकी नजर बारीक विवरणों पर रहती थी और वे मालवा क्षेत्र के पहले इस्लामी राजाओं में से एक थे।
सोधनी के स्तंभ: यहाँ गुप्तकालीन यशोवर्मा के विजय स्तंभ और शिलालेख देखे जा सकते हैं
गांधीसागर बांध: गांधीसागर आठ सेक्टर में बटा हुआ हैं। यहां गांधीसागर बांध स्थल पर बनी हुई चंबल माता की प्रतिमा व आस-पास बना गार्डन आकर्षण का केंद्र हैं। चंबल नदी पर बना यह विशाल बांध और जल जलाशय प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र है।चंबल नदी पर गांधीसागर बांध 1960 में बनकर तैयार हुआ हैं। इसकी आधारशिला रखने भी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आए थे और लोकार्पण करने भी।अपने निर्माण के समय गांधीसागर बांध एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील था। गांधीसागर झील लगभग 68 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई हैं।
तेलिया तालाब: शाम के समय शांत वातावरण और सूर्यास्त का सुंदर नजारा देखने के लिए बेहतरीन जगह।
गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य: प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों को देखने के लिए शानदार क्षेत्र।
दाल बाफले: मंदसौर का पारंपरिक और लोकप्रिय मुख्य भोजन।
पोहा-जलेबी: यहाँ का पसंदीदा और स्वादिष्ट नाश्ता।
खसखस का हलवा: यहाँ की एक खास और पारंपरिक मीठी डिश।
रेल मार्ग: मंदसौर अजमेर-रतलाम मुख्य रेल लाइन पर स्थित एक प्रमुख स्टेशन है। यह भारतीय रेलवे के माध्यम से इंदौर, भोपाल, जयपुर, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग: महू-नीमच फोरलेन सड़क (SH-31) और राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-79) इसे बेहतरीन सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं, जिससे इंदौर, उज्जैन और उदयपुर के लिए नियमित बसें उपलब्ध रहती हैं।
जिले का इतिहास
मंदसौर जिला दो कारणों से दुनिया भर में मशहूर है। सबसे पहले, इसमें मंदसौर शहर के बाहरी इलाके में सदैव बहने वाली शिवना नदी के तट पर भगवान पशुपतिनाथ (शंकर) का मंदिर है। मंदिर की मूर्ति लगभग काठमांडू नेपाल के भगवान पशुपतिनाथ के मंदिर में रखी मूर्ति के समान है। दूसरे, यह विश्व में बड़ी मात्रा में अफ़ीम का उत्पादन करता है। इसमें कई ऐतिहासिक अवशेष हैं।
जनसंख्या- जिले का नाम मुख्यालय शहर मंदसौर से लिया गया है। यह अक्षांश 230 45′ 50″ उत्तर और 250 2′ 55″ उत्तर के समानांतर और 740 42′ 30″ पूर्व और 750 50′ 20″ पूर्व देशांतर के मध्याह्न रेखा के बीच स्थित है। यह मध्य प्रदेश का औसत आकार का जिला है। वर्ष 2003 में नीमच जिले में विभाजन के बाद। यह लगभग 142 K.M तक फैला हुआ है। उत्तर से दक्षिण तथा 124 कि.मी. पूर्व से पश्चिम तक. कुल क्षेत्रफल 5521 कि.मी. है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या 1,339,832 है। यह मध्य प्रदेश के दो जिलों से घिरा है।
सीमाएं: यह जिला मालवा और मेवाड़ की सीमा पर स्थित है, जो उत्तर में नीमच, दक्षिण में रतलाम और पूर्व-पश्चिम में राजस्थान से घिरा है यह मालवा क्षेत्र और उज्जैन कमिश्नरी का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सहित सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, विधायक विपिन जैन से मांग की है, कि मंदसौर जिला हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है तथा यहां की राजनैतिक, भौगोलिक एवं व्यवसायिक स्थिति को देखकर मंदसौर को प्राथमिकता से संभाग का दर्जा दिया जाना चाहिए और नगर का काफी विस्तार हो चुका है इसलिये मंदसौर नगर के चहुमुखी विकास के लिये इसे नगर निगम का दर्जा भी दिया जाना चाहिए। श्री बागड़िया ने कहा कि मंदसौर से उज्जैन की दूरी करीब 200 कि.मी. है जिससे अपने कार्यों के लिये बार-बार उज्जैन संभाग के चक्कर मंदसौर जिले एवं आसपास के जिलेवासियों को लगाना पड़ते है, इसलिये मंदसौर को संभाग बनाया जाये जिससे आसपास के क्षेत्रों रतलाम, मंदसौर, नीमच जिलों को मिलकार मंदसौर संभाग बनने से समय की बचत व पैसे की बचत होगी व उज्जैन जाना नहीं पड़ेगा व मंदसौर संभाग बनने से इस क्षेत्र को सुविधाएं प्राप्त होगी व इस शहर का भी विकास होगा। इस बाबत् मंदसौर के सामाजिक संस्थाओं एवं मीडियाकर्मियों को भी प्रयास करना चाहिए।
श्री बागड़िया ने कहा कि मंदसौर नगर का काफी विस्तार हो चुका है। काफी दूर-दूर तक कॉलोनियां बस चुकी है तथा जनसंख्या भी काफी बढ़ गई है। इसलिये मंदसौर नगरपालिका को अब नगर निगम बनवाया जाये जिससे यहां जनता को बड़े शहरों की तरह सुविधाएं प्राप्त होगी और बरसों से पिछड़े हुए नगर में विकास हो सके।
श्री बागड़िया ने कहा कि मंदसौर में हवाई पड्डी जो निर्मित की गई है तथा यहां ट्रेनिंग सेंटर भी चालू हो गया है लेकिन अभी तक इस पट्टी पर कोई विमान का संचालन नहीं हो रहा है व मंदसौर जिला हवाई सुविधाओं में काफी समय से वंचित है। इस और उचित कदम आवश्यक कार्यवाही हेतु उठाया जाना अत्यन्त आवश्यक है। क्योंकि मंदसौर के बाद एक तरफ इंदौर और दूसरी तरफ उदयपुर में हवाई सेवा उपलब्ध है, जो मंदसौर से लगभग 200 कि.मी. दूरी पर है। जिससे मंदसौर नगरवासियों को उस सुविधा का लाभ लेने के लिये 4-5 घण्टे की यात्रा करनी पड़ती है। इसलिये मंदसौर में हवाई सेवाएं प्रारंभ करके बड़े शहरों के लिये सुचारू रूप से हवाई सेवा संचालित करवाई जावे ताकि यहां की जनता को इनका लाभ मिल सके। साथ ही बीमार व्यक्तियों को भी हवाई सेवाएं उपलब्ध हो जाने पर उन्हें जल्द उपचार मिल सकेगा।
श्री बागड़िया ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधिगण उक्त सुविधाओं को मंदसौर में लाने हेतु प्रयास करे जिससे नगर का विकास हो और नगरवासी को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सके। मुख्यमंत्री ने घोषणा करी है। हवाई अड्डे का विस्तार किया जायेगा।
औंकारलाल बागड़िया
मो.नं. 9009289332



