युगपुरूष स्वामी टेऊँराम की शक्ति अमर है और अमर रहेगी- संत शंभूलाल

गोमाता की सेवा, हवन, छप्पन भोग भण्डारे के साथ चालीसा महोत्सव का समापन
मंदसौर। युगपुरूष आचार्य सद्गुरू स्वामी टेऊँरामजी महाराज के 140वें प्रकटोत्सव (जन्म जयंती) एवं 140वें चालिसे महोत्सव देश विदेश के शहरों गांवों, कस्बों के साथ-साथ भगवान पशुपतिनाथ की धार्मिक नगरी ममंदसौर में भी 9 जून से 19 जुलाई 2026 तक श्रद्धा, समर्पण, उमंग एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी श्री गोपालकृष्ण गौशाला में गोमाता की सेवा, सत्संग के साथ गोमाताओं को हरे घास का भण्डारा, मालवांचल के विद्वान पंडित उमेश जोशी शास्त्री के आचार्यत्व में हवन, होम यज्ञ सम्पन्न किया गया। लगभग 200 श्रद्धालु परिवारों द्वारा लगभग 156 व्यंजनों का 56 भोग भगवान श्री लक्ष्मी नारायण एवं स्वामी टेऊँरामजी को नैवेद्य लगाया गया।40 दिनों तक प्रतिदिन सुबह आरती, नित्य नियम, टेऊँराम चालीसा का पाठ, जन्म साक्षी का पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ, आरती, प्रसाद वितरण तो शामको 5 से 7 बजे सत्यंग, प्रवचनों व प्रसादी के आयोजन सम्पन्न हुए। लगभग 13 आम भण्डारों का आय ोजन हुआ जिसमें श्रद्धालु संगत ने प्रसाद ग्रहण किया।उक्त आशय की जानकारी श्री प्रेमप्रकाश सेवा मण्डली के अध्यक्ष पुरूषोत्तम शिवानी ने देते हुए बताया कि इस विशाल 40 दिवसीय 40वें जन्मोत्सव एवं चालीसे महोत्सव का समापन 21 जुलाई को संत श्री शंभूलाल के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।
स्वामी टेऊँरामजी महाराज की शक्ति अमर है- श्री प्रेमप्रकाश पंथ की सिंधी हिन्दू सनातन धर्म की मंदसौर शाखा में आयोजित 40 दिवसीय जन्मोत्सव एवं 40 महोत्सव के समापन अवसर पर आश्रम के सत्संग हाल जिसमें सैकड़ों की तादाद में उपस्थित बैठी संगत पर जल-ज्योति के अवतार भगवान झूलेलाल की रिमझिम वर्षा के साथ संत श्री शंभूलाल की अमृतमयी वर्षा में संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। संत श्री ने प्रेमप्रकाश ग्रंथ की वाणी के मुखारविन्द से सुंदर भजनों के माध्यम से अपने प्रवचनों में कहा कि हमारे सद्गुरू टेऊँरामजी महाराज ऐसे विरले संत होंगे जिनकी भक्ति स्मरण की कमाई कि शक्ति है जो आप हम लगातार 40 दिन तक जन्मोत्सव मना रहे है। उनकी मानवता, सेवा, सत्य, प्रेम, सद्भावना और राष्ट्रहित के जिन दिव्य आदर्शों का संदेश दिया, वे आज भी समाज को सही दिशा प्रदान कर रहे है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सच्ची भक्ति केवल उपासना तक सीमित नहीं, बल्कि मानव सेवा, परोपकार करना ही ईश्वर की वास्तविक आराधना हैं। संत शंभूलालजी ने कहा कि प्रत्येक प्राणी में गुण अवगुण दोनों विद्यमान है किन्तु गुरू दरबार में आने वाले प्राणी के सतगुरू नाम रूपी लेप की औषधी से गुणवान बना देते है।शिवानी ने बताया कि चालीसा महोत्सव के अंतर्गत योग गुरू श्री सुरेन्द्र जैन व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सोरभ जैन ने अपनी योगशाला की मण्डली के साथ उपस्थित हुए। योग गुरू श्री जैन ने उपस्थित संगत को योग को प्रतिदिन अपनी जीवन शैली में अपनाने का आव्हान किया। आपने बताया कि योग में वह शक्ति है जो हमें शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाये रखती है, योग करने से हमें चुस्त व स्फूर्त रहते है।
अंत में आभार प्रदर्शन श्री प्रेमप्रकाश महिला मण्डली की प्रमुख पुष्पा पमनानी, माला मूलचंदानी, देवकी कोठारी एवं नन्दू आडवानी व सुरेश बाबानी ने प्रकट किया।



