गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ में महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा’ विषय पर स्मृति व्याख्यान

गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ में महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा’ विषय पर स्मृति व्याख्यान
गोरखपुर युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा’ विषय पर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दोनों महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्रसेवा को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता आयुष चौरसिया, सीईओ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MPIT), गोरखपुर ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं और उसके रचनात्मक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सुरक्षा और अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बदलाव ला रहा है। विद्यार्थियों को इसका उपयोग ज्ञानवर्धन, नवाचार, रचनात्मकता और समस्या समाधान के लिए करना चाहिए।मुख्य वक्ता ने साइबर सुरक्षा के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए फिशिंग, फर्जी लिंक, संदिग्ध फोन कॉल और संदेशों से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, बैंकिंग विवरण अथवा निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। डिजिटल दुनिया में की गई छोटी-सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान और गंभीर साइबर अपराध का कारण बन सकती है।आयुष चौरसिया ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को लेकर विद्यार्थियों को विशेष रूप से सतर्क किया। उन्होंने बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई वास्तविक कानूनी व्यवस्था नहीं है। साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल अथवा फोन के माध्यम से लोगों को डराते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे की मांग करते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत कॉल समाप्त करें और किसी भी परिस्थिति में धनराशि, ओटीपी या निजी जानकारी साझा न करें। संबंधित विभाग या एजेंसी से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना ही सुरक्षित उपाय है।उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग सजगता, संयम और जिम्मेदारी के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही ज्ञान और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार विद्यार्थियों को भविष्य की साइबर चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएग।विद्यालय के प्रधानाचार्य मनीष कुमार दूबे ने कहा कि बदलते तकनीकी युग में विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक तकनीक का उपयोग ज्ञान, नवाचार और राष्ट्रहित में करने तथा साइबर अपराधों से सतर्क रहने का आह्वान किया।प्रधानाचार्य ने मुख्य वक्ता के प्रति विद्यालय परिवार की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के आदर्शों से प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और आधुनिक तकनीकी दक्षता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।



