
आलोट के डॉक्टर, देश की शान: सेवा, समर्पण और संकल्प की तीन मिसालें
किशनगढ़ ताल
ठा शंभू सिंह तंवर
1 जुलाई डॉक्टर डे पर आलोट के तीन चिकित्सकों ने अपनी सेवा और उपलब्धियों से कस्बे का नाम रोशन किया है। कोई रिटायरमेंट के बाद योग से समाज जोड़ रहा है, कोई दिल्ली में दिल संभाल रहा है, तो कोई गांव-गांव जाकर नशामुक्ति का अलख जगा रहा है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा जारी, योग गुरु बने पूर्व सीएमएचओ डॉ. फुलंब्रीकर
पूर्व सीएमएचओ शाजापुर डॉ. प्रकाश विष्णु फुलंब्रीकर वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले 16 वर्षों तक आलोट सरकारी अस्पताल में बीएमओ रहे। मूलतः महाराष्ट्र के रहने वाले डॉ. फुलंब्रीकर ने आलोट को ही अपना घर बना लिया।
पिछले 4-5 वर्षों से गायत्री शक्तिपीठ आलोट में प्रतिदिन योग कर रहे हैं। खुद योग को अपनाकर लोगों को स्वास्थ्य के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा कभी रिटायर नहीं होती।
दिल्ली में दिल के डॉक्टर बने आलोट के लाल डॉ. ओजस जैन
आलोट की मिट्टी से निकले डॉ. ओजस जैन ने कार्डियोलॉजी में डीएम की सुपर स्पेशलिटी डिग्री हासिल की है। वर्तमान में ABVIMS डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली में सेवारत हैं।
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल से एमबीबीएस और एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर से एमडी की पढ़ाई पूरी की। छोटे कस्बे से दिल्ली तक का सफर मेहनत से तय किया। आलोट के युवा उन्हें आदर्श मानते हैं।
. सेवा और जागरूकता की मिसाल बने डॉ. अंशुल चोपड़ा
दंत चिकित्सक डॉ. अंशुल चोपड़ा ने 2017 से आलोट में प्रैक्टिस शुरू की, लेकिन क्लिनिक तक सीमित नहीं रहे। आलोट और महिदपुर जनपद के 30 से अधिक गांवों में फ्री डेंटल कैंप लगाए। शिविर में आए सभी लोगों का निशुल्क उपचार किया
हर कैंप में तंबाकू, गुटखा से होने वाले मुंह के कैंसर के खतरे बताए। युवाओं को नशा छोड़ने की शपथ भी दिलाई। इस अभियान के लिए जनपद पंचायत आलोट ने 15 अगस्त 2024 को सम्मानित किया। मानसरोवर डेंटल कॉलेज भोपाल से बीडीएस किया है।



