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भाटखेड़ी बुजुर्ग पंचायत बनी जीवीपी मुक्त

कचरा अड्डा हटाकर बनाया पिकनिक स्पॉट


*मनासा*
*भाटखेड़ी*

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्राम पंचायत भाटखेड़ी बुजुर्ग ने अनूठी पहल करते हुए गांव को जीवीपी मुक्त बना दिया है। पानी की टंकी एवं नाले के पास वर्षों से बने कचरा अड्डे को हटाकर उसे आकर्षक पिकनिक स्पॉट में बदल दिया गया है।
*कचरे के ढेर से ‘पिपलेश्वर महादेव’ तक*
गांव में प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्था एवं पानी की टंकी के पास खाली जगह को ग्रामीणों ने कचरा अड्डा बना रखा था। मुख्य चौराहे पर दिनभर कचरे की बदबू, मच्छर-मक्खियां और बारिश में नाला चौक होने से गंदा पानी घरों में चला जाता था।
सरपंच मनोज पुरोहित और सचिव गोपाल मेहता ने स्थाई हल निकाला। सफाई मित्रों और जेसीबी की मदद से जीवीपी पाइंट हटाया गया। गंदगी के ढेर के बीच बनी कुइयां के आसपास सफाई कर बाउंड्रीवाल बनाई गई। लोहे की रैलिंग लगाई, फर्श पर पेवर ब्लॉक बिछाए और सीमेंट की कुर्सियां लगाईं।
*तिरंगे में रैलिंग, कैलाश पर्वत की पेंटिंग*
रैलिंग को तिरंगे के रंग में पेंट करवाया गया। कुइयां को ढककर उसके ऊपर महादेव की मूर्ति स्थापित की गई। मूर्ति के पीछे की दीवार पर कैलाश पर्वत की डिजाइन में पेंटिंग कराई गई। इस स्थान का नाम ‘पिपलेश्वर महादेव’ रखा गया है। अब यहां रोज पूजा-अर्चना होती है।


*डोर टू डोर कचरा कलेक्शन शुरू*
सरपंच मनोज पुरोहित ने बताया कि पंचायत को जीवीपी मुक्त बनाने के लिए घर-घर कचरा संग्रहण शुरू किया गया। मिनी ट्रैक्टर रोजाना सुबह गांव में निकलता है और सूखा-गीला कचरा एकत्र करता है। ग्रामीणों को खुले में कचरा न फेंकने की जानकारी दी गई।
*एनजीओ ने भी दिया साथ*
गांव की एनजीओ संस्था विश्वकर्माजी सोशल केयर एसोसिएशन ने भी स्वच्छता अभियान में सहयोग किया। डायरेक्टर कमलेश कारपेंटर एवं पंचायत ने भाटखेड़ी बुजुर्ग को स्वच्छता में नंबर-1 बनाने की योजना बनाई है। कचरा सेग्रीगेशन शेड को नियमित संचालन करने की तैयारी है।
*अब होती है पीपल की पूजा*
गंदगी हटने से वहां लगे पीपल के पेड़ की भी पूजा होने लगी है। धार्मिक मान्यता अनुसार पीपल में ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास होता है। महिलाएं जल चढ़ाने आती हैं। दशा माता, वट सावित्री और सोमवती अमावस्या पर सुहागिनें परिक्रमा कर पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
वर्तमान में यह पिकनिक स्पॉट लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सुबह-शाम बच्चे, युवा और बुजुर्ग यहां पहुंचते हैं। दूसरी ग्राम पंचायतों के लिए भी यह प्रयोग प्रेरणा बन गया है।

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