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चुनौतियां ही आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं : पं. दशरथ शर्मा ‘भाई जी’ जय जय कर से उठा पंडाल

चुनौतियां ही आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं : पं. दशरथ शर्मा ‘भाई जी’ जय जय कर से उठा पंडाल

 

✍️पंकज बैरागी रिपोर्टर सुवासरा

 

सुवासरा(निप्र) शिक्षक परिवार सुवासरा के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस दशपुर धरा से पधारे लोकप्रिय मानस मर्मज्ञ पंडित दशरथ शर्मा ‘भाई जी’ ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि चुनौतियां ही आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। संघर्ष व्यक्ति के जीवन को निखारता है और उसे महानता की ओर अग्रसर करता है।

उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि किशोर अवस्था में ही श्रीराम महर्षि विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा के लिए गए और ताड़का, सुबाहु सहित अनेक राक्षसों का संहार कर धर्म की रक्षा की। उन्होंने कहा कि वास्तव में बड़े वही होते हैं जो सभी का सम्मान करते हैं। केवल धन बढ़ने से अभिमान बढ़ता है, लेकिन धन के साथ विनम्रता भी बढ़नी चाहिए।

कथा के दौरान अहिल्या उद्धार का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। वहीं जनकपुर में सीता-राम विवाह उत्सव का वर्णन होते ही पूरा पांडाल भक्ति और उत्साह से झूम उठा। श्रद्धालु भजनों पर नृत्य करते हुए राम नाम के रंग में रंग गए।

पं. दशरथ शर्मा ने कहा कि व्यक्ति के कर्मों का प्रभाव नाम जप और कीर्तन से धीरे-धीरे समाप्त होता है। उन्होंने सेवा, धर्म, संस्कार और तीर्थ जैसे पुण्य कार्यों को समय पर करने का संदेश दिया।

युवा पीढ़ी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति से दूर कर रहा है। आज स्थिति यह है कि कई छोटे बच्चे मोबाइल के बिना भोजन तक नहीं करते। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया।

पुरुषोत्तम मास का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पवित्र मास में जप, तप, दान और भक्ति का विशेष महत्व है। धार्मिक आयोजनों में बढ़ती आडंबर प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उन्होंने सादगी और आध्यात्मिकता को अपनाने की बात कही।

कथा में सीता वनवास, माता-पिता एवं गुरु सेवा, तथा हनुमानजी के पराक्रम जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। उन्होंने परिवारों में बढ़ती दूरियों को समाप्त कर प्रेम, सम्मान और संस्कारों को मजबूत करने का संदेश दिया।

कथा के दौरान “मां तू कितनी अच्छी, मां तू कितनी भोली” सहित अनेक भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा का लाभ सुवासरा सहित मंदसौर, सीतामऊ, गरोठ, भानपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया।

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