अंजनी नदी पुनर्जागरण के शिल्पकार बने राजेश सेठिया

42 दिनों के अथक श्रमदान ने रचा इतिहास,* *नाले से फिर बनी जीवनदायिनी नदी
पुलिया की पुताई के बाद सामने आया अंजनी* *नदी का मनमोहक विहंगम दृश्य, गरोठ में* *विकास और जनसहभागिता की नई मिसाल
गरोठ- इतिहास उन्हीं लोगों को याद रखता है, जो असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को अपने संकल्प, परिश्रम और जनसहभागिता से संभव बना देते हैं। गरोठ की अंजनी नदी के पुनर्जीवन की गाथा भी अब ऐसे ही स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज होने जा रही है, जिसके केंद्र में नगर परिषद अध्यक्ष राजेश सेठिया का दूरदर्शी नेतृत्व और अथक मेहनत दिखाई दे रही है।
एक समय ऐसा था, जब अंजनी नदी अपनी पहचान खोकर गंदे नाले का स्वरूप धारण कर चुकी थी। नदी का अस्तित्व संकट में था और लोगों की स्मृतियों में ही उसका पुराना वैभव शेष रह गया था। लेकिन नगर परिषद अध्यक्ष राजेश सेठिया ने इसे केवल एक नदी नहीं, बल्कि गरोठ की सांस्कृतिक धरोहर और आने वाली पीढ़ियों की अमानत मानकर इसके कायाकल्प का बीड़ा उठाया।
अंजनी नदी कायाकल्प अभियान के अंतर्गत लगातार 42 दिनों तक चले श्रमदान ने वह कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी कुछ समय पहले कठिन लगती थी। जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों के सहयोग से नदी की सफाई, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य निरंतर जारी रहा।
रविवार को अभियान के 42वें दिन पुलिया की पुताई के बाद जब अंजनी नदी का विहंगम दृश्य सामने आया तो हर कोई उसकी सुंदरता देखकर अभिभूत हो गया। स्वच्छ जल, चौड़ा पाट और सुसज्जित तट नदी के पुनर्जन्म की कहानी स्वयं बयां कर रहे हैं।
नगर परिषद अध्यक्ष राजेश सेठिया ने केवल नदी की सफाई तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने अंजनी नदी को भविष्य में धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने की व्यापक योजना तैयार की है। उज्जैन की तर्ज पर यहां भव्य घाट निर्माण का प्रस्ताव भी नगर परिषद द्वारा पारित किया जा चुका है। आने वाले समय में यह क्षेत्र स्थानीय नागरिकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।
विशेष बात यह है, कि इस अभियान में केवल विकास ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का अनूठा संगम भी देखने को मिला। बच्चों के मनोरंजन, तैराकी प्रशिक्षण और पारिवारिक वातावरण को बढ़ावा देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से झालमुड़ी मंगवाकर बच्चों में वितरण की योजना भी इस आयोजन को जनउत्सव का स्वरूप प्रदान कर रही है।
राजेश सेठिया के नेतृत्व में चला यह अभियान अब केवल नदी संरक्षण का प्रयास नहीं, बल्कि जनशक्ति की सामूहिक ऊर्जा का प्रतीक बन चुका है। गरोठ के नागरिकों का मानना है, कि जिस प्रकार इस अभियान ने एक मृतप्राय नदी में नया जीवन फूंका है, उसी प्रकार यह आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रेरणा देता रहेगा।
अंजनी नदी का यह कायाकल्प आने वाले वर्षों में गरोठ की पहचान बनेगा, और नगर परिषद अध्यक्ष राजेश सेठिया का नाम उस व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिसने जनसहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर एक ऐतिहासिक परिवर्तन की नींव रखी। यह उपलब्धि निश्चित रूप से इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने योग्य है।



