समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 29 मई 2026 शुक्रवार

नकली खाद, बीज एवं कीटनाशक दवाई बेचने वालों पर होगी कार्यवाही
रतलाम : गुरूवार, मई 28, 2026,

म.प्र. शासन के दिशा निर्देशानुसार गुण नियंत्रण सघन अभियान के तहत कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा दिये गये निर्देशों के पालन में विकासखण्डवार गठित निरीक्षक दल द्वारा 28 मई को खाद, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं की फर्मों का विकासखंड सैलाना में सचिन कृषि सेवा केन्द्र सरवन, अरुण कृषि सेवा केन्द्र सरवन तथा महेश कृषि सेवा केन्द्र सैलाना का औचक निरीक्षण कर पी.ओ.एस. मशीन स्टॉक का मिलान ई विकास प्रणाली के ई-उर्वरक एप्प से किया गया। निरीक्षण के समय सचिन कृषि सेवा केन्द्र सरवन फर्म बंद पाई गई, उक्त फर्म पर स्थानीय कृषक श्री सुल्तान सिंह निवासी पाटडी द्वारा ई-टोकन लेकर खाद लेने दुकान पर पहुंचे तो फर्म संचालक बिना पूर्व सूचना के दुकान बंद कर चले गए। उर्वरक निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड सैलाना श्री यादवेन्द्र सिंह निनामा द्वारा फर्म सचिन कृषि सेवा केन्द्र को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। उप संचालक कृषि श्री आर.के.सिंह द्वारा निर्देशित किया गया है कि इस प्रकार की पुनरावृति जिले में कहीं भी होती है तो नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जावेगी। साथ ही सैलाना के 3 उर्वरक फर्मों से 3 नमूने लिए गए। विकासखंड जावरा के निरीक्षण दल द्वारा फर्म धामेडी एग्रो सॉल्यूशन जावरा, जय श्री श्याम कृषि सेवा केंद्र जावरा तथा राठौर कृषि सेवा केंद्र जावरा का निरीक्षण कर उर्वरकों के 4 नमूने लिए गए। विकासखंड रतलाम के निरीक्षण दल द्वारा फर्म नाकोड़ा ट्रेडर्स बांगरोद, जय किसान फर्टिलाइजर धराड का निरीक्षण कर उर्वरकों के 6 नमूने लिए गए। विकासखंड आलोट के निरीक्षण दल द्वारा फर्मों का निरीक्षण कर उर्वरकों के 10 नमूने लिए जाकर विभिन्न प्रयोगशालाओं में परीक्षण हेतु भेजे गये है। उक्त नमूने प्रयोगशाला की जांच में यदि कोई नमूना अमानक पाया जाता है तो संबंधित विक्रेता के विरुद्ध अधिनियम के अनुसार सख्त कानूनी कार्यवाही की जावेगी। विकासखंड सैलाना में निरीक्षण के समय उप संचालक कृषि श्री आर.के.सिंह, अनुविभागीय कृषि अधिकारी सैलाना श्री नानसिंह मण्डलोई, उर्वरक निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड सैलाना श्री यादवेन्द्र सिंह निनामा तथा विकासखंड रतलाम में सहायक संचालक कृषि श्री भीका वास्के, निरीक्षक श्री के.एस.वसुनिया, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री बालचंद्र डोडियार, विकासखंड जावरा में अनुविभागीय अधिकारी कृषि जावरा श्री सोहन सिंह राठौर, निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जावरा श्री के.आर.खेड़े, कृषि विस्तार अधिकारी श्री इंदरसिंह भयडिया तथा विकासखण्ड आलोट में उर्वरक निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आलोट श्री नीतेश सागित्रा, कृषि विस्तार अधिकारी श्री रामचंद निनामा, श्री पवन परमार उपस्थित थे ।
उप संचालक कृषि श्री आर.के.सिंह ने जिले के किसान भाईयों से अपील की है कि जिले में खरीफ फसलों के लिए कपास, मक्का, अरहर, सोयाबीन एवं उडद आदि के बीजों का भण्डारण एवं विक्रय का कार्य शुरू हो गया है। शासन द्वारा इस वर्ष कपास बीज के पैकेट की दरें निर्धारित कर दी गई है, जिसमें कपास बीजी-1 के 475 ग्राम प्रति पैकेट की कीमत 635 रू. कपास बीजी-2 के 475 ग्राम प्रति पैकेट की कीमत 901रू. है। किसान भाई पंजीकृत विक्रेताओं से ही बीज खरीदें और खरीदे गये बीज का पक्का बिल अवश्य ले। बिल पर बीज की किस्म, कपंनी का नाम, बैच नंबर या लॉट नंबर, बीज उत्पादन अंतिम तिथि, दर तथा मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। मौसम की अनिश्चितताओं को देखते हुए किसान भाई खेत में एक ही फसल या एक ही किस्म लगाने की भूल ना करें।
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शासकीय महाविद्यालय सैलाना में राज्य आनंद संस्थान की प्रेरणादायी कार्यशाला आयोजित
रिश्तों में प्रेम और जीवन में आनंद का संचार
रतलाम : गुरूवार, मई 28, 2026,

शासकीय महाविद्यालय सैलाना में राज्य आनंद संस्थान द्वारा एक दिवसीय परिचय कार्यशाला का आयोजन उत्साह एवं भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यशाला में सी.एम.सी.एल.डी.पी. के 115 विद्यार्थियों ने सहभागिता कर जीवन को आनंदित, सरल एवं तनावमुक्त बनाने के सूत्र सीखे।
कार्यक्रम के शुभारंभ में प्राचार्य आर. एस. पाटीदार ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में विद्यार्थियों को ईमानदारी एवं परिश्रम के साथ जीवन जीते हुए आनंदित रहने की प्रेरणा दी। जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय ने राज्य आनंद संस्थान के इस अभिनव कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि “अल्पविराम” जैसे कार्यक्रम युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं तथा कार्यक्षेत्र और परिवार दोनों में उत्साह, ऊर्जा एवं सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों को अपने जीवन में अपनाएं तथा दूसरों तक भी पहुंचाएं।
आनंद विभाग की जिला समन्वयक एवं मास्टर ट्रेनर सीमा अग्निहोत्री ने कहा कि “अल्पविराम अंतरात्मा की आवाज़ है जो मानसिक तनाव को कम कर जीवन में संतुलन और आनंद लाता है। उन्होंने कहा कि मदद का भाव व्यक्ति के भीतर कृतज्ञता को बढ़ाता है, जबकि क्षमा का भाव जीवन को सरल एवं सहज बनाता है। इस दौरान नेहा जैन, योगेश तंवर, चरित चौबीसा, नाथुलाल राठौड़ एवं पिंकी टेलर ने अपने जीवन में सहयोग करने वालों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। मास्टर ट्रेनर गिरीश सारस्वत ने जीवन में सुविधा, संबंध और समझ के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वास्तविक आनंद बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि भीतर की संतुष्टि, प्रेम और आत्मीय संबंधों से प्राप्त होता है।
“रिश्ते” सत्र का संचालन मास्टर ट्रेनर पुष्पेंद्र सिंह सिसौदिया द्वारा किया गया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए रिश्तों में मधुरता, सहयोग, करुणा एवं क्षमा के महत्व को समझा तथा संकल्प लिया कि वे अपने रिश्तों को और अधिक मधुर बनाएंगे, लोगों को क्षमा करेंगे एवं आवश्यकता पड़ने पर स्वयं भी क्षमा मांगेंगे।
मास्टर ट्रेनर मधु परिहार ने कहा कि “अल्पविराम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयं को समझने और जीवन को आनंदमय बनाने की एक सुंदर पहल है, जिसका प्रतिदिन अभ्यास किया जाना चाहिए।”
कार्यक्रम में पर्यावरण मित्र कृष्ण लाल शर्मा ने जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। कार्यशाला में सामाजिक न्याय विभाग के विजय गणावा, सृष्टि समाज सेवा के सतीश टांक, विश्व कल्याण समिति के विक्रम शर्मा, भागीरथ रूरल अवेयरनेस थिंकर्स फाउंडेशन के हरीश सिलावट, जन अभियान परिषद सैलाना के परामर्शदाता दिनेश गहलोत, राजू निनामा, पीरुलाल, पवन पारगी एवं पंकज मईडा भी उपस्थित थे ।
कार्यक्रम का संचालन जन अभियान परिषद के ब्लॉक समन्वयक रतनलाल चरपोटा ने किया तथा अंत में अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए
खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया। केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए क्षेत्र की रिकॉर्ड प्रगति को रेखांकित किया। पिछले 12 वर्षों में उत्पादन में 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह क्षेत्र लगभग पांच गुना विस्तारित हुआ, जबकि बिक्री में 501 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पिछले 12 वर्षों में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।
रतलाम : गुरूवार, मई 28, 2026,

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने बीते 12 वर्षों में विकास और परिवर्तन की अभूतपूर्व यात्रा तय की है। वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई, जो अब तक की सर्वाधिक बिक्री है और ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, आत्मनिर्भरता तथा आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से प्रेरित होकर खादी आज केवल एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी गौरव और ग्रामीण समृद्धि का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। उत्पादन, विपणन और रोजगार सृजन के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की है।
केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े
नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।
खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार
अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।
खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि
खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड
ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।
रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि
रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण
ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।
कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि
कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि
इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।
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