डिजिटल क्रांति और राहु का मायाजाल: तकनीक के पीछे ग्रहों का खेल

डिजिटल क्रांति और राहु का मायाजाल: तकनीक के पीछे ग्रहों का खेल
-ज्योतिषाचार्य पंडित यशवंत जोशी
7024667840,8085381720
जय दुर्गा ज्योतिष सेवा संस्थान एवं अनुष्ठान केंद्र मंदसौर
आज चारों ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्टफोन और इंटरनेट की धूम है। हर व्यक्ति इस बात से हैरान है कि कैसे एक मशीन इंसानों की तरह सोच रही है। विज्ञान इसे आधुनिक तकनीक कहता है, लेकिन ज्योतिषीय और शास्त्रीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह सीधे तौर पर राहु का मायाजाल है।
हमारे प्राचीन ग्रंथों (जैसे बृहत् पराशर होराशास्त्रम्) में राहु को ‘धूम्रवर्ण’ (धुएं के समान अस्पष्ट) और ‘तमोमय’ (भ्रम पैदा करने वाला) माना गया है। धुआं जैसे स्थान तो घेरता है पर उसे हाथ में पकड़ा नहीं जा सकता, ठीक वैसे ही आज का इंटरनेट और AI का साम्राज्य पूरे विश्व में फैला है, लेकिन वह अमूर्त (Virtual) है। ज्योतिष का सीधा नियम है— जो वस्तु दिखाई दे पर वास्तव में उसका कोई भौतिक वजूद न हो, वह राहु है।
जब कुंडली या ब्रह्मांड के गोचर में बुद्धि का कारक ग्रह ‘बुध’, इस मायावी ‘राहु’ के प्रभाव में आता है, तब ‘कृत्रिम बुद्धि’ (AI) का जन्म होता है। आज इंटरनेट पर जो साइबर फ्रॉड, डीपफेक (नकली चेहरे और आवाज बनाना) और सोशल मीडिया की लत बढ़ रही है, वह राहु के इसी नकारात्मक प्रभाव का परिणाम है। इस अंधी दौड़ में मनुष्य तकनीक का गुलाम बनकर अपना स्वाभाविक विवेक खो रहा है, जिससे युवाओं में अकेलापन और मानसिक भ्रम बढ़ रहा है।
बचाव के अचूक उपाय:
इस डिजिटल जाल में अपनी बुद्धि और मानसिक शांति को सुरक्षित रखने के लिए ऋषियों ने अचूक मार्ग बताए हैं। राहु के मतिभ्रम से बचने के लिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें, क्योंकि हनुमान जी की शरण में राहु का कोई भी अनिष्ट प्रभाव बेअसर हो जाता है। साथ ही, बुद्धि की देवी मां सरस्वती की आराधना करें ताकि कृत्रिम बुद्धि के इस दौर में आपकी स्वाभाविक निर्णय क्षमता मजबूत बनी रहे। तकनीक का उपयोग अपनी प्रगति के लिए अवश्य करें, लेकिन अपने मानवीय विवेक को इस डिजिटल मायाजाल के हाथों बिकने न दें।



