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आबकारी विभाग के संरक्षण में सड़क किनारे मौत बांट रहे शराब ठेकदार…!,

एसडीएम के आदेश के बाद भी कार्यवाही नहीं,शराब ठेकेदारों और आबकारी अफसरों की सांठगांठ पर उठे रहे सवाल

सीतामऊ – मंदसौर रोड पर हर रोज हो रहे हादसे के पीछे कौन जिम्मेदार..?

मंदसौर :- मंदसौर-सीतामऊ रोड अब सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि हादसों का कॉरिडोर बनती जा रही है। आए दिन हो रहे सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है, परिवार उजड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही। सबसे गंभीर बात यह है कि मुख्य सड़क और टोल टैक्स के समीप नियमों को धता बताकर संचालित हो रही शराब दुकानें खुलेआम मौत बांट रही हैं, और आबकारी विभाग सबकुछ देखकर भी आंखें मूंदे बैठा है। ऐसा प्रतीत होता है मानो शराब ठेकेदारों को नियम तोड़ने की खुली छूट दे दी गई हो। दरसल बिलांत्री टोल टैक्स के समीप संचालित शराब दुकान को लेकर टोल प्रबंधन ने सीतामऊ एसडीएम को लिखित शिकायत करते हुए स्पष्ट कहा था कि सड़क किनारे शराब बिक्री के कारण हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और यह आबकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीतामऊ एसडीएम शिवानी गर्ग ने जिला आबकारी अधिकारी को पत्र जारी कर दो दिनों में प्रतिवेदन और कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग ने ना कार्रवाई करना जरूरी समझा और ना ही एसडीएम के पत्र का जवाब देना उचित समझा। इससे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर विभाग किसके संरक्षण में काम कर रहा है और किसके दबाव में नियमों को रद्दी की टोकरी में फेंका जा रहा है।

मंदसौर-सीतामऊ रोड पर कई स्थानों पर शराब दुकानों को नियमों के दायरे में दिखाने के लिए कथित तौर पर कागजी खेल किए जा रहे हैं। गुर्जरबड़िया और बाजखेड़ी फंटे पर तो ऐसे रास्ते तैयार कर दिए गए जिनसे कागजों में दूरी 500 मीटर दिखाई जा सके, जबकि वास्तविकता में दुकानें सड़क से बेहद करीब संचालित हो रही हैं। सड़क किनारे रुकते वाहन, शराब खरीदने वालों की भीड़ और नशे में वाहन चलाने वालों के कारण हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है जबकि लगातार हो रहे हादसों से उपज रहे जनाक्रोश के बाद खुद जिले के पुलिस कप्तान ने सड़क का मुवायना किया था और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए थे।

जिले में पूर्व में हुए जहरीली शराब कांड सहित कई मामलों में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद विभाग की कार्यशैली में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा। अब सवाल यह है कि यदि नियम विरुद्ध संचालित शराब दुकानों के कारण किसी की जान जाती है तो क्या केवल वाहन चालक जिम्मेदार होगा..? या फिर शिकायतों, चेतावनियों और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और शराब ठेकेदारों पर भी हत्या जैसे गंभीर प्रकरण दर्ज होंगे..?

 

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