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“मेरे बच्चों को बचा लो” — जब एक आवाज ने तोड़ी खामोशी, मन्दसौर में नशे के खिलाफ जंग का ऐलान

“मेरे बच्चों को बचा लो” — जब एक आवाज ने तोड़ी खामोशी, मन्दसौर में नशे के खिलाफ जंग का ऐलान

मन्दसौर,

“साहब, मेरे बेटे को बचा लो… वो 19 साल का है और स्मैक के नशे में सब बर्बाद कर रहा है।” मन्दसौर के एक मोहल्ले से आई इस चीख ने आखिरकार वो खामोशी तोड़ दी जिसके पीछे हजारों परिवारों का दर्द दबा था।

सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ. राघवेंद्र सिंह तोमर अब उन हजारों माँ-बाप की आवाज बनकर सामने आए हैं जिनके घरों के चिराग नशे की अंधेरी गलियों में खो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश और कलेक्टर मन्दसौर को खुला पत्र लिखकर कहा है: “यह उड़ता पंजाब नहीं, उड़ता मन्दसौर बन चुका है। अब और नहीं।”

जब घर के बच्चे ही निशाने पर हों

डॉ. तोमर ने बताया कि मन्दसौर जिले और पूरे संसदीय क्षेत्र में हालात बद से बदतर हैं। एमडी पाउडर पुड़िया में, ब्राउन शुगर कागज में, स्मैक माचिस में—स्कूल के गेट के बाहर तक बिक रहा है। डोडाचूरा, अफीम और जहरीली शराब की तस्करी का नेटवर्क इतना मजबूत है कि हर गली-मोहल्ले तक जहर पहुंच रहा है।

“पहले सुनते थे कि बड़ा शहर में होता है। अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है,” एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। “हजारों बच्चे, हंसते-खेलते बच्चे, इस दलदल में धंस रहे हैं।”

“सिस्टम पर सवाल, क्योंकि सवाल बच्चों का है”

डॉ. राघवेंद्र सिंह तोमर ने सबसे कड़वा सवाल उठाया है—इतना बड़ा कारोबार बिना शह के चल सकता है क्या? उन्होंने मांग की है कि मन्दसौर में पदस्थ उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की गंभीर जांच हो, जिनकी जिम्मेदारी इस नशे को रोकने की थी।

“जब रक्षक ही चुप हो जाएं, तो फिर जनता किसके भरोसे अपने बच्चे बचाए? इसलिए अब चुप नहीं रहेंगे,” डॉ. तोमर ने कहा।

अब क्या? डॉ. तोमर की 3 सीधी मांगें

1. नशा माफिया पर वार: मन्दसौर में तस्करी के पूरे नेटवर्क को 30 दिन में ध्वस्त किया जाए। एक भी सौदागर बचना नहीं चाहिए।

2. जिम्मेदारों की जवाबदेही*: जिन अधिकारियों के इलाके में नशा बिका, उनकी जांच कर सख्त एक्शन लिया जाए।

3. बच्चों के लिए उम्मीद : हर ब्लॉक में नशा-मुक्ति और काउंसलिंग सेंटर खोले जाएं, ताकि जो फंस गए हैं उन्हें वापस लाया जा सके।

एक आवाज जो अब जन-आवाज है

डॉ. राघवेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, मन्दसौर के भविष्य की है। “आज हम नहीं बोले तो कल को हमारे पास पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा। मैं हर उस माँ-बाप से कहना चाहता हूँ—आप अकेले नहीं हैं। आपके बच्चों को बचाने के लिए हम खड़े हैं।”

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