MSP पर खरीदी ठप, मंदसौर-मल्हारगढ़ के किसान औने-पौने दामों पर गेहूं बेचने को मजबूर

अन्नदाता की जेब खाली, सरकार कब जागेगी?
मंदसौर/मल्हारगढ़: मध्यप्रदेश सरकार की वादाखिलाफी से मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ ब्लॉक के किसान बेहाल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का ऐलान किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है
किसानों का दर्द:– मंडियों में अब तक स्लॉट बुक नहीं हो रहे। मजबूरी में किसान 2100-2200 रु/क्विंटल पर गेहूं बेच रहे हैं, जबकि लागत निकालने के लिए 3000 रु/क्विंटल जरूरी है।
लागत 3000 रु, दाम मिल रहे 2100 रु। सरकार बताए किसान कर्ज कैसे चुकाए?-
किसानों का कहना है- “कटाई-निकलाई में हजारों खर्च हो गए। घर में शादी है, बच्चों की फीस देनी है, बीमारी का इलाज कराना है। पेट भरने के लिए भी पानी खरीदना पड़ता है। मजबूरी में जो दाम मिल रहा है, उसी पर बेच रहे हैं। इससे तो हम बर्बाद हो जाएंगे।”
वादे हुए हवा-हवाई:-2022 तक आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन आज मंदसौर का किसान अपनी फसल के वाजिब दाम को तरस रहा है। कर्ज के बोझ से दबा किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर है।
कांग्रेस उतरी मैदान में:-मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष अनिल शर्मा, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल मेवाती समेत कई नेता मल्हारगढ़ मंडी पहुंचे। उन्होंने किसानों से संवाद किया और भरोसा दिलाया कि किसानों के साथ धरना-चक्काजाम कर सरकार को जगाएंगे।
मंदसौर के किसानों की 3 बड़ी मांग:-
1. तुरंत MSP पर खरीदी शुरू हो – मंडियों में स्लॉट बुकिंग अभी चालू की जाए।
2. 3000 रु/क्विंटल का रेट दो – ताकि लागत + मुनाफा दोनों मिले।
3. किसान को कर्ज से बचाओ – समय पर भुगतान हो, वरना खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
जो किसान पूरे देश का पेट भरता है, आज वो खुद औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर है। अगर सरकार नहीं जागी तो मंदसौर-मल्हारगढ़ से उठी किसान की आवाज पूरे प्रदेश में गूंजेगी।
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