रतलामपिपलोदा

घोड़ी पर सावर होकर पहुंचा जनसुनवाई के लिए रतलाम कलेक्टर कार्यालय, पशु-पक्षियों के लिए उठाई आवाज

रिपोर्टर जितेंद्र सिह चंद्रावत जडवासा

घोड़ी पर सावर होकर पहुंचा जनसुनवाई के लिए रतलाम कलेक्टर कार्यालय, पशु-पक्षियों के लिए उठाई आवाज

रतलाम। कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को अनोखा नजारा देखने में आया, जब एक पशु प्रेमी अपनी घोड़ी बुलबुल पर सवार होकर जनसुनवाई कार्यक्रम में अपनी मांग लेकर पहुंचा। उसे घोड़ी पर सवार होकर कलेक्टर कार्यालय आता देख लोग आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि अक्सर लोग अपने वाहनों से या पैदल ही कलेक्टर कार्यालय आते है। पहली बार कोई व्यक्ति घोड़ी पर सवार होकर पहुंचा कलेक्टर कार्यालय पहुंचा था। पूछने पर पता चला कि वे पशु-पक्षियों के हक में आवाज उठाने आए है और चारागाह भूमियों व जंगलों पर किए गए कब्जो को हटवाना चाहते है। उन्होंने एडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जिन भूमियोँ पर जानवरों का हक है, उन्हें वापस चारागाह के लिए छोड़ा जाए।

हर मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में जिले के अलग-अलग स्थानों से लोग अपनी शिकायतें व समस्याएं लेकर जनसुनवाई कार्यक्रम में आते हैं। इस मंगलवार (24 मार्च 2026 को) ग्राम शिवपुर निवासी अरूण शर्मा घोड़ी पर सवार होकर अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। वे कलेक्टर कार्यालय के गेट के सामने जाकर घोड़ी पर बैठकर अधिकारी के आने का इंतजार करने लगे। कुछ देर बाद एडीएम संजय शर्मा ज्ञापन लेने आए तो अरुण शर्मा घोड़ी से उतरकर उनके पास पहुंचे तथा मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उन्हें सौंपा।

जानवर दुश्मन लगने लगे हैं

    क्या धरती पर इंसान का ही हक हैं?    

  ज्ञापन में कहा गया है कि जिले के सभी गांवों में जानवरों, जीव-जंतु, पशु-पक्षियों के लिए सरकारी भूमि हुआ करती थी, उन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। जानवरों के लिए कोई जगह नहीं बची है। किसानों को जानवर दुश्मन लगने लगा है। जानवरों की अब यह व्यथा हो गई है कि कोई उन्हें इधर से तो कोई उधर से भगाता है, वे जाए तो कहां जाए। आधे से अधिक जानवर खत्म हो चुके है और यही स्थिति रही तो कोई जीव-जंतू नहीं बचेगा। क्या धरती पर इंसान का ही हक है? यही हाल रहे तो आने वाले समय में प्रकृति अपना रंग बताएंगी, जो संकट आज हम जानवारों पर है, वह पूरी मानव जाति पर आएगा। मुख्यमंत्री से निवेदन है कि समस्या के निराकरण के लिए उचित कदम उठाए और समस्त चारागाह भूमि व कांकड़ की भूमियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। दिग्विजय सिंह सरकार के समय जो भूमि कांकड़ व गोचर थी, वह किसानों को खेती करने के लिए दे दी गई थी, उन पर सिर्फ जानवरों का हक है।

बेजुबानों की तरफ से हम दोनों आए हैं

मीडिया से चर्चा करते हुए अरुण शर्मा ने बताया कि गांवों में जो गोचर भूमि थी, चारागाह और कांकड़ (जंगल) थे, उन पर सिर्फ जानवरों का हक था, आज स्थिति यह है कि उन सब पर इंसानों ने कब्जा कर लिया है। अब जानवर जाए तो कहां जाए? आधे जानवर तो विलुप्त हो चुके है, जो जानवर है वे इंसानों को दुश्मन लगते है? वास्तव में उनका दुश्मन इंसान है। अब इन बेजुबानों की तरफ से हम दोनों मैं व मेरी घोड़ी, जिसका नाम बुलबुल है, आए है। समस्या का कोई हल कर सके तो करों, बाकि तो, जनसुनवाई है, अगर जीव सुनवाई हो जाए तो ठीक है। कई गांवों में गोचर भूमि थी, कांकड़ थे, वहां अतिक्रमण हो चुके है। सब ने कब्जा कर रखा है, कोई खेती कर रहा है तो कोई कुछ और कर रहा है। आज जानवरों पर संकट आया है, कल मानव जाति पर संकट आएंगा।

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