कलेक्टोरेट में बनेगा केंद्रीय रिकॉर्ड रूम, 1200 से अधिक बस्तों में सुरक्षित जमीनों के मूल दस्तावेज होंगे शिफ्ट!

सात दशक पुराने भू-अभिलेखों को मिलेगा नया ठिकाना,
429 हलकों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने की तैयारी, पुराने रिकॉर्ड में जमीन के इतिहास से जुड़ी अहम जानकारियां!
रतलाम : जिले में जमीनों से जुड़े करीब सात दशक पुराने महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेख अब तहसील स्तर के पुराने अभिलेखागार तक सीमित नहीं रहेंगे। प्रशासन ने इन पुराने रिकॉर्ड को कलेक्टोरेट परिसर में सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए कलेक्टोरेट के प्रथम तल पर नया रिकॉर्ड रूम तैयार किया जाएगा, जहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित मूल राजस्व दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाएगा। बता दें कि वर्तमान में करीब 1200 से अधिक बस्तों में बंदोबस्त से संबंधित मूल रिकॉर्ड, नक्शे, नामांतरण पंजी सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज तहसील के अभिलेखागार में रखे हुए हैं। इन दस्तावेजों का संबंध जिले के 429 हलकों की जमीनों से बताया गया है। रिकॉर्ड को एक स्थान पर व्यवस्थित करने का उद्देश्य न केवल इनकी सुरक्षा बढ़ाना है, बल्कि जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज को आसानी से तलाशकर उपलब्ध कराना भी है। राजस्व विभाग के पुराने अभिलेखों में जमीनों के स्वामित्व, बंदोबस्त, सीमांकन, नक्शों और नामांतरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। कई दशक पुराने विवादों अथवा भूमि संबंधी मामलों में यही दस्तावेज निर्णायक आधार बनते हैं। अलग-अलग बस्तों में रखे होने के कारण किसी विशेष रिकॉर्ड को तलाशने में समय लग जाता है। कई पुराने दस्तावेजों की स्थिति भी ऐसी है कि उन्हें व्यवस्थित संरक्षण की जरूरत है। ऐसे में कलेक्टोरेट में केंद्रीय रिकॉर्ड रूम बनने के बाद इन अभिलेखों को क्रमवार व्यवस्थित किए जाने की उम्मीद है। रिकॉर्ड को नए स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया को प्रशासन केवल स्थानांतरण तक सीमित नहीं रखना चाहता। इस दौरान पुराने और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान भी किया जाएगा। खासतौर पर 1956-57 के बंदोबस्त के बाद के वर्षों से संबंधित ऐसे रिकॉर्ड, जो वर्तमान में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, उनकी भी तलाश की जाएगी। प्रत्येक हल्के के रिकॉर्ड का परीक्षण कर यह देखा जाएगा कि संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं। इससे लंबे समय से गायब अथवा नहीं मिल रहें पुराने अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
कलेक्टर ने खुद देखी अभिलेखों की स्थिति!
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने तहसील शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के अभिलेखागार का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान पुराने अभिलेख, मिसल रिकॉर्ड, नक्शे, नामांतरण पंजी तथा अन्य राजस्व दस्तावेजों की स्थिति देखी गई। 1956-57 के पुराने नक्शों और बंदोबस्त से जुड़े रिकॉर्ड को भी जांचा गया। इस दौरान पुराने राजस्व प्रकरणों से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता और उन्हें व्यवस्थित रखने की आवश्यकता पर भी ध्यान दिया गया।
पुराना रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरुरी क्यों??
भूमि विवादों के कई मामलों में वर्तमान दस्तावेजों के साथ पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जरूरत पड़ती है। जमीन का पुराना स्वामित्व, बंदोबस्त के समय की स्थिति, नक्शे में दर्ज विवरण अथवा पुराने नामांतरण जैसे दस्तावेज किसी मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। ऐसे में सात दशक पुराने इन रिकॉर्ड को सुरक्षित स्थान पर रखना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों को व्यवस्थित करने के साथ जरूरत के समय संबंधित रिकॉर्ड शीघ्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित किए जाने की भी संभावना है। भूमि संबंधी पुराने मामलों में रिकॉर्ड तलाशने के लिए लोगों को कई बार तहसील कार्यालय और अभिलेखागार के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि पुराने दस्तावेजों का वर्गीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जाता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ आम लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है। प्रशासन की यह कवायद केवल पुराने कागजों को एक कमरे से दूसरे कमरे में रखने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि दशकों पुराने राजस्व इतिहास को सुरक्षित और व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं!


