जनविश्वास अभियान के बीच 300 बच्चों की राह में कीचड़ और गड्ढे! चचावदा पठारी की बदहाल सड़क ने खोली विकास के दावों की पोल

जनविश्वास अभियान के बीच 300 बच्चों की राह में कीचड़ और गड्ढे! चचावदा पठारी की बदहाल सड़क ने खोली विकास के दावों की पोल
गरोठ प्रदेशभर में जनविश्वास अभियान चलाकर जनता का विश्वास जीतने की कवायद जारी है, लेकिन चचावदा पठारी में स्कूली बच्चों की बदहाल राह जिम्मेदारों के दावों पर ही सवाल खड़े कर रही है। शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल तक पहुंचने वाला करीब एक किलोमीटर का मार्ग बारिश में कीचड़, पानी और गड्ढों में तब्दील हो गया है। इसी रास्ते से आसपास के करीब 7 गांवों के 300 से अधिक छात्र-छात्राएं रोजाना स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
डलमु, खेरखेड़ा, गारियाखेड़ी, सोहनगढ़, चचावदा चौकड़िया, देवरिया और चचावदा साठिया सहित आसपास के गांवों के विद्यार्थियों के लिए यही मुख्य रास्ता है। बारिश होते ही रास्ते की हालत और बिगड़ जाती है। जगह-जगह जमा पानी और कीचड़ के बीच बच्चों को संभल-संभलकर निकलना पड़ता है। छात्राओं की परेशानी तो और भी बढ़ जाती है। फिसलन के कारण दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
पांच साल से सड़क बदहाल, फिर भी जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी?
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार अनदेखी की जा रही है। चुनाव के दौरान समस्याएं सुनने और समाधान के वादे करने वाले जनप्रतिनिधि बाद में दिखाई नहीं देते। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि क्या जनता की समस्याओं की सुध केवल चुनाव के समय ही ली जाती है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्कूल में सात गांवों के 300 से ज्यादा बच्चे शिक्षा लेने आते हैं, वहां तक पहुंचने वाली सड़क की यह दुर्दशा जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को क्यों नजर नहीं आ रही?
जनविश्वास अभियान या जमीन पर अविश्वास?
एक ओर प्रदेश में जनविश्वास अभियान के जरिए जनता से जुड़ने और विश्वास कायम करने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर चचावदा पठारी में बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए कीचड़ और गड्ढों से जूझना पड़ रहा है। ऐसे हालात में ग्रामीणों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जनविश्वास आखिर भाषणों में है या जमीन पर भी दिखाई देगा?
विकास के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन बच्चों की रोजमर्रा की परेशानी सड़क पर साफ दिखाई दे रही है। क्या विकास का मतलब केवल कागजों और दावों तक सीमित रह गया है?
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की हालत समय रहते नहीं सुधारी गई तो बारिश के दिनों में किसी विद्यार्थी के साथ गंभीर दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों का सीधा सवाल है—क्या जिम्मेदार किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
ग्रामीणों ने अधिकारी महोदय एवं क्षेत्रीय विधायक से मांग की है कि मौके का तत्काल निरीक्षण कर करीब एक किलोमीटर मार्ग की स्थायी मरम्मत अथवा पक्के निर्माण की कार्रवाई की जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
सुभाष पटेल, चचावदा पठारी ने बताया कि बच्चों की इस समस्या का तत्काल समाधान होना चाहिए।
अब सवाल चचावदा पठारी से उठ रहा है…
जनविश्वास अभियान में जनता का विश्वास जीतने की बात हो रही है, लेकिन क्या जिम्मेदार 300 बच्चों को एक किलोमीटर की सुरक्षित सड़क भी नहीं दे सकते?
पांच साल से सड़क की समस्या जस की तस—फिर विकास के दावे किस बात के?
क्या चचावदा पठारी के बच्चों को उनका हक मिलने के लिए किसी हादसे का इंतजार करना पड़ेगा?
अब ग्रामीणों को आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए—और वह भी कागज पर नहीं, जमीन पर।



