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त्यौहार आते ही बढ़ी महंगाई: गरीब और मध्यमवर्ग पर चौतरफा मार, राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप सिंह गौड़ ने जताई चिंता

त्यौहार आते ही बढ़ी महंगाई: गरीब और मध्यमवर्ग पर चौतरफा मार, राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप सिंह गौड़ ने जताई चिंता
मंदसौर। त्यौहारों का सीजन शुरू होते ही बाजार में महंगाई का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। खाद्य तेल, शक्कर,दालें, मसाले, रसोई गैस से लेकर फल और सब्जियों के दामों में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है। त्यौहार जहाँ आम जनता के लिए खुशियों, उमंग और परस्पर मेलजोल का अवसर लेकर आते हैं, वहीं लगातार बढ़ते बाजार भावों ने गरीब और मजदूर वर्ग के त्यौहारों का रंग फीका कर दिया है।
बढ़ती महंगाई के इस गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप सिंह गौड़ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज स्थिति यह हो चुकी है कि एक साधारण परिवार के लिए अपने घर का बजट संभालना बेहद मुश्किल हो गया है।
गरीबों और दैनिक वेतनभोगियों का बजट पूरी तरह बिगड़ा राजनीतिक व
सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप सिंह गौड़ ने कहा कि जैसे ही कोई बड़ा त्यौहार नजदीक आता है, बाजार में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। जिस रफ्तार से दैनिक उपयोग की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, उस अनुपात में आम आदमी या मजदूर की आय नहीं बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि एक गरीब व्यक्ति दिनभर कड़ी मेहनत करके जो दिहाड़ी,300,400, कमाता है, उसमें से आधा हिस्सा राशन और सब्जी खरीदने में ही चला जाता है। ऐसे में अपने बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाई और त्यौहार का सामान खरीदना उसके लिए एक दूर की कौड़ी बनता जा रहा है। महंगाई की सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है जो दैनिक मजदूरी या सीमित संसाधनों पर आश्रित हैं।
त्यौहार हर नागरिक के जीवन में खुशियाँ लाने के लिए होते हैं, लेकिन आज की परिस्थिति में त्यौहार आते ही गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं।
बढ़ती महंगाई के इस गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप सिंह गौड़ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज स्थिति यह हो चुकी है कि एक साधारण परिवार के लिए अपने घर का बजट संभालना बेहद मुश्किल हो गया है।
गरीबों और दैनिक वेतनभोगियों का बजट पूरी तरह बिगड़ा राजनीतिक व
सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप सिंह गौड़ ने कहा कि जैसे ही कोई बड़ा त्यौहार नजदीक आता है, बाजार में रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। जिस रफ्तार से दैनिक उपयोग की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, उस अनुपात में आम आदमी या मजदूर की आय नहीं बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि एक गरीब व्यक्ति दिनभर कड़ी मेहनत करके जो दिहाड़ी,300,400, कमाता है, उसमें से आधा हिस्सा राशन और सब्जी खरीदने में ही चला जाता है। ऐसे में अपने बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाई और त्यौहार का सामान खरीदना उसके लिए एक दूर की कौड़ी बनता जा रहा है। महंगाई की सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है जो दैनिक मजदूरी या सीमित संसाधनों पर आश्रित हैं।
त्यौहार हर नागरिक के जीवन में खुशियाँ लाने के लिए होते हैं, लेकिन आज की परिस्थिति में त्यौहार आते ही गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं।



