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जीवन में सुखी रहना है तो अधिकार छोड़ो, परमात्मा से नाता जोड़ो – आचार्य श्री सागरचंद्र सागर जी म.सा.
If you want to be happy in life, let go of the sense of entitlement.

जीवन में सुखी रहना है तो अधिकार छोड़ो, परमात्मा से नाता जोड़ो – आचार्य श्री सागरचंद्र सागर जी म.सा.
मंदसौर । पुत्र के विवाह के बाद सास बहू के विवाद घर-घर में होते हैं। माता-पिता अपनी संतान पर, घर परिवार, सम्पत्ति पर जो अधिकार है उसे कम नहीं करना चाहते, जबकि बहू अपने अधिकारों की बात करती है ऐसे में दोनों के मध्य विवाद स्वाभाविक है। इससे बचना है तो माता पिता को अपनी संतान के विवाह के बाद घर परिवार में हस्तक्षेप कम करना चाहिये। पुत्र-पुत्री अपने गृहस्थ जीवन में सुखी रहें इसके लिये उन्हें जो भी उचित हो उन्हें करने देने की छूट देनी चाहिये तभी घर परिवार को संघर्ष से राहत मिलेगी।
उक्त उद्गार परम पूज्य जैन आचार्य श्री अशोक सागरसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में आचार्य श्री सागरचन्द्रसागरजी म.सा. ने कहे। आपने आर्यरक्षित सूरि जैन तीर्थ पर आयोजित धर्मसभा में कहा कि जीवन में सुखी रहना है तो अधिकार छोड़ना सीखो। मेरे पुत्र पर मेरा ही अधिकार है यह सोचोगे और जताओगे तो बहू के साथ सास का टकराव होगा। लेकिन यदि सास बहू के अधिकारों को मान ले और अपने अधिकार कम कर ले या छोड़ दे तो सास बहू भी माँ बेटी की तरह मिलकर रह सकती है। दोनों के मध्य विवाद का कारण अधिकार है जो भी अधिकार सीमित करेगा सुखी रहेगा। आजकल कोई भी पुत्र विवाह के बाद घर जाता है तो सास बहू की बातें सुननी पड़ती है जिससे घर परिवार में कलेश होता है। जीवन में जब भी आपकी आयु 50 से ऊपर हो जाये घर में बहू आ जाये वह घर गृहस्थी के कार्य में निपुण हो जाये तो अपने को सीमित कर दो, बेटा बहू अच्छे से गृहस्थी का संचालन कर सकेंगे ऐसा विचार करो और अपने अधिकार सीमित कर लो। अन्यथा वृद्धावस्था में तुम्हे बेटा बहू के यहाँ उपेक्षित रहकर जीवन निर्वहन करना पड़ेगा।
जम्बूस्वामी से प्रेरणा लो – आचार्य श्री ने कहा कि जब जम्बूस्वामी के मन में वैराग्य की भावना आयी तो वे दीक्षा लेने को तत्पर हो गये लेकिन माता पिता ने गुणवान, रूपवान 8 कन्याओं के साथ उनका विवाह कर दिया। 8 पत्नियों ने उन्हें संसारिक मोह में रखने की बहुत कोशिश की लेकिन जम्बूस्वामी इसमें नहीं फँसे और वे संयम जीवन की ओर बढ़े। उनकी प्रेरणा से उनकी 8 पत्नियां, माता पिता और पत्नियों के माता पिता ने भी संयम लिया। धर्मसभा में आचार्य श्री ने जम्बू स्वामी से प्रेरणा लेने की सिख दी।
उक्त उद्गार परम पूज्य जैन आचार्य श्री अशोक सागरसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में आचार्य श्री सागरचन्द्रसागरजी म.सा. ने कहे। आपने आर्यरक्षित सूरि जैन तीर्थ पर आयोजित धर्मसभा में कहा कि जीवन में सुखी रहना है तो अधिकार छोड़ना सीखो। मेरे पुत्र पर मेरा ही अधिकार है यह सोचोगे और जताओगे तो बहू के साथ सास का टकराव होगा। लेकिन यदि सास बहू के अधिकारों को मान ले और अपने अधिकार कम कर ले या छोड़ दे तो सास बहू भी माँ बेटी की तरह मिलकर रह सकती है। दोनों के मध्य विवाद का कारण अधिकार है जो भी अधिकार सीमित करेगा सुखी रहेगा। आजकल कोई भी पुत्र विवाह के बाद घर जाता है तो सास बहू की बातें सुननी पड़ती है जिससे घर परिवार में कलेश होता है। जीवन में जब भी आपकी आयु 50 से ऊपर हो जाये घर में बहू आ जाये वह घर गृहस्थी के कार्य में निपुण हो जाये तो अपने को सीमित कर दो, बेटा बहू अच्छे से गृहस्थी का संचालन कर सकेंगे ऐसा विचार करो और अपने अधिकार सीमित कर लो। अन्यथा वृद्धावस्था में तुम्हे बेटा बहू के यहाँ उपेक्षित रहकर जीवन निर्वहन करना पड़ेगा।
जम्बूस्वामी से प्रेरणा लो – आचार्य श्री ने कहा कि जब जम्बूस्वामी के मन में वैराग्य की भावना आयी तो वे दीक्षा लेने को तत्पर हो गये लेकिन माता पिता ने गुणवान, रूपवान 8 कन्याओं के साथ उनका विवाह कर दिया। 8 पत्नियों ने उन्हें संसारिक मोह में रखने की बहुत कोशिश की लेकिन जम्बूस्वामी इसमें नहीं फँसे और वे संयम जीवन की ओर बढ़े। उनकी प्रेरणा से उनकी 8 पत्नियां, माता पिता और पत्नियों के माता पिता ने भी संयम लिया। धर्मसभा में आचार्य श्री ने जम्बू स्वामी से प्रेरणा लेने की सिख दी।
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