समस्यामंदसौर जिलामल्हारगढ़

टोकन सिस्टम से कैश काउंटर आवंटन और 1.77 करोड़ के निर्माण पर उठे सवाल, किसान नेता जोकचंद ने की जांच की मांग

टोकन सिस्टम से कैश काउंटर आवंटन और 1.77 करोड़ के निर्माण पर उठे सवाल, किसान नेता जोकचंद ने की जांच की मांग

पिपलियामंडी। कृषि उपज मंडी पिपलिया में हाल ही में 23 वर्ष पुराने किसान शेड पर बनाए गए 32 नए कैश काउंटरों के निर्माण और उनके आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को किसान नेता श्यामलाल जोकचंद कृषि उपज मंडी पहुंचे और पूरे मामले का मौके पर निरीक्षण किया। उनके साथ मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के बाद जोकचंद ने मीडिया से चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार एवं मंडी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। जोकचंद ने कहा कि मंडी में कैश काउंटरों का आवंटन पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के बजाय टोकन सिस्टम से किया गया, जो कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि सामान्यतः मंडी की दुकानों और व्यावसायिक परिसरों का आवंटन खुली नीलामी के माध्यम से किया जाता है, जिससे मंडी को अधिकतम राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में टोकन प्रणाली अपनाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और इससे मंडी को आर्थिक लाभ हुआ या नुकसान, इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 23 वर्ष पुराने जर्जर भवन पर केवल रंग-रोगन कर उसे नया दर्शाते हुए करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपए का निर्माण कार्य किया गया है। उनका कहना था कि जिस भवन को कुछ वर्ष पहले जर्जर मानकर ध्वस्त करने की योजना बनाई गई थी, उसी पर करोड़ों रुपए खर्च कर कैश काउंटरों का निर्माण कराना समझ से परे है। यदि भवन पहले असुरक्षित माना गया था तो निर्माण कार्य शुरू करने से पहले किसी अधिकृत इंजीनियर अथवा तकनीकी संस्था से उसकी स्ट्रक्चरल सेफ्टी की जांच कराई गई थी या नहीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

किसान नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि भवन का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया गया था तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जनता और किसानों को यह जानने का अधिकार है कि करोड़ों रुपए खर्च करने से पहले भवन की मजबूती का वैज्ञानिक परीक्षण हुआ था या नहीं।

जोकचंद ने यह भी कहा कि कृषि उपज मंडी को भविष्य में गुड़भेड़ी बड़ी स्थित नए परिसर में स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है और वहां निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। ऐसे में पुराने परिसर में स्थायी कैश काउंटर बनाने पर करोड़ों रुपए खर्च करने की आवश्यकता क्या थी।

उन्होंने सवाल किया कि यदि कुछ वर्षों बाद मंडी नए परिसर में शिफ्ट हो जाएगी तो वर्तमान में बनाए गए कैश काउंटरों का भविष्य क्या होगा और इस निवेश का औचित्य क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने भवनों पर केवल रंग-रोगन कर उन्हें नया दिखाया जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका है।

उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्य, आवंटन प्रक्रिया, वित्तीय स्वीकृतियों तथा भवन की तकनीकी जांच सहित पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इधर मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब नई मंडी का निर्माण अंतिम चरण में है, तब पुराने परिसर में इतनी बड़ी राशि खर्च करना वित्तीय दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि रविवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और सांसद सुधीर गुप्ता ने कृषि उपज मंडी पिपलिया में करीब 1.77 करोड़ रुपए की लागत से बने 32 कैश काउंटरों का लोकार्पण किया था। इसके बाद से ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता, भवन की सुरक्षा, टोकन सिस्टम से आवंटन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा बनी हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}