परमात्मा को प्रेम से प्राप्त किया जा सकता है – स्वामी सत्यव्रत चैतन्य जी

मंदसौर। पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास के शुभ अवसर पर पूज्य पाद स्वामी श्री सत्यव्रत चैतन्य जी नर्मदा तट द्वारा रामचरित मानस का वाचन 1 जून से प्रारंभ किया गया है जो 15 जून तक प्रतिदिन प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक कथा का वाचन करेंगे।
दिनांक 4 जून 2026, गुरूवार को रामचरित मानस शास्त्र का वाचन करते हुए स्वामी श्री सत्यव्रत चैतन्य जी ने बताया कि भगवान सर्वत्र है वह हमारे कण – कण में है पहले भगवान भक्तों और संसार का उद्धार करने के लिए अवतार लेते थे अब भगवान को प्रेम और भक्ति के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। भगवान हमारे परिवार के सदस्य की तरह होते है हम भी भगवान पर पूर्ण विश्वार रख उनसे प्रेम करना चाहिए प्रेम से भगवान भक्त की हर मनोकामना पूर्ण करते है। स्वामी जी ने बताया कि हमें ऐसे कर्म करना चाहिए जिससे की भगवान के प्रसन्नता हो। सांसारिक इच्छाएं समाप्त होगी तभी भगवान के प्रति प्रेम उत्पन्न होता है। आपने बताया कि इस संसाद में ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसे कोई दुख न हो कोई धन से दुखी तो कोई मन से तो कोई शरीर से तो संतान से तो कोई परिवार से तो कोई व्यापार हर कोई कही न कहीं दुखी ही है इसलिए पूर्णता को प्राप्त करना है तो अपने मन को भगवान में लगाना होगा।
आपने धर्मसभा में रामचरित मानस गं्रथ के माध्यम से भगवान राम के प्राकट्य का वर्णन सुनाया और भगवान की बाल लिलाओ के बारे में बताया। आपने बताया कि भगवान राम के पिता महाराज दशरथ देवतुल्य थे उनके तीनों रानियों कोशल्या, केकई और सुमित्रा अलग अलग गुणों से भरपूर थी, जिन्होने भगवान राम, लक्षमण और भरत जैसे पुत्रों को जन्म दिया। आपने बताया कि भगवान भक्तों के अधीन होते है भगवान भक्ति के माध्यम से भगवान को प्राप्त करता है।
धर्मसभा में प्रतिदिन बडी संख्या में महिलाएं एवं पुरूष प्रवचनों का लाभ ले रहे है।



