आध्यात्ममंदसौरमंदसौर जिला

भगवान से निस्वार्थ रूप से परम प्रेम हो जाये उसे भक्ति कहते है – केशवानंद जी महाराज

भगवान से निस्वार्थ रूप से परम प्रेम हो जाये उसे भक्ति कहते है – केशवानंद जी महाराज

मंदसौर।  पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास  के शुभ अवसर पर  पूज्य पाद 1008 केशवनानंद जी महाराज चिन्मय मशीन आकोला ने नारद भक्ति सूत्र पर आधारित दिव्य प्रवचनों का आयोजन प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक हो रहा है।
दिनांक 18 मई 2026, सोमवार को नारद भक्ति सूत्र का वाचन करते हुए  केशवनानंद जी महाराज चिन्मय मशीन आकोला ने बताया कि  भक्ति प्रेम स्वरूपा होती है अर्थात् भक्ति का रूप प्रेम से शुरू होता है। आपने बताया कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए हमार शास्त्रों मेंं तीन योग (उपाय) बतायें गये है।  जिनमें कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग होते है। कर्म योग और ज्ञान योग का मार्ग कठिन होता है इसलिए मनुष्य भक्ति मार्ग के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त करता है। नारद भक्ति सूत्र मेंं सूत्रो के माध्यम से भक्ति के बार में विस्तृत से बताया गया है। आपने बताया कि निस्वार्थ प्रेम पूर्णता और तृप्ति की ओर ले जाता है। प्रेम में अपना पन होना चाहिए न की स्वार्थ प्राय: देखने में आता है कि यूं तो मनुष्य दूसरे मनुष्य से बहुत प्रेम करता है लेकिन थोड़ा से कुछ होने पर प्रेम नष्ट हो जाता है और विद्रोह उत्पन्न हो जाता है। ऐसा भक्ति प्रेम में नहीं होना चाहिए।
स्वामी जी ने बताया कि  भक्त प्रहलाद जब गुरूकुल से आते है तो  उनके पिता हिरणयकश्यप उनसे बहुत प्रेम करते हैे लेकिन जब भक्त प्रहलाद भगवान का स्मरण करते है तो नाराज हो जाते है उसे मारने पर  आ जाते है अघात प्रेम पल भर में गायब हो जाता है। प्रेम में ऐसा नहीं होना चाहिए। आज कल तो प्रेम भौतिकवाद और सुख सुविधाओं में बंध कर रह गया है। भक्ति  की  व्याख्या करते हुए नारद मुनि बताते है कि भक्ति के नष्ट करने वाली चीजों से बचना चाहिए। भक्ति प्रेमस्वरूपा है अपने आप को ईश्वर की भक्ति में लीन करना चाहिए। ईश्वर भी प्रेम का आदर करते है, प्रेम सुखदाई होता है। परम भक्ति अमृत के समान होती है इस आनंद के सामने अन्य सारे आनंद फीके पड़ जाते है।
केशव सत्संग भवन ट्रस्ट अध्यक्ष जगदीशचंद्र सेठिया और कारूलाल सोनी ने बताया कि हर बार पुरूषोत्तम (अधिक) मास के दोरान संतो का आगमन होता है जिनके प्रवचनों का लाभ धमार्लुजन लेते है। इस बार पुरूषोत्तम (अधिक) मास के दौरान पूज्य पाद 1008 केशवनानंद जी महाराज अकोला के मुख से प्रतिदिन 17 मई रविवार से  प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक  नारद भक्ति सूत्र दिव्य प्रवचनो का वाचन  हो रहा है जिसमें नगर की धर्मप्रेमी जनता अधिक से अधिक  संख्या में लाभ प्राप्त करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}