मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 04 मई 2026 सोमवार

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जनगणना कार्य में लापरवाही पर जोनल अधिकारी कुरैशी के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश

जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने,समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं करने तथा जिला कंट्रोल रूम से बार-बार कॉल किए जाने के बावजूद प्रत्युत्तर न देने की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा नगर निगम रतलाम के जोनल चार्ज अधिकारी श्री कुरैशी के विरुद्ध कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।

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जैविक हाट बाजार में 53250 रुपए से अधिक के जैविक उत्पादों का विक्रय

परियोजना संचालक आत्मा श्री निर्भय सिंह नर्गेश ने बताया कि रविवार को जिले में आयोजित जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार में विभिन्न विकासखंडों से आए किसानों ने अपने जैविक एवं प्राकृतिक उत्पादों का विक्रय किया। हाट बाजार में कुल 8 जैविक कृषक अपने उत्पाद लेकर पहुंचे और उपभोक्ताओं ने उत्साहपूर्वक जैविक उत्पादों की खरीदारी की।

धामनोद से आए किसान श्री चंद्रभानु द्वारा अनाज, दालें, सब्जियां, फल एवं मूंगफली का 27050 रुपये का विक्रय किया गया। श्री बलराम माली (धार्मेडी) द्वारा गेहू, मिर्ची, पाउडर एवं सब्जियां 6000 रुपये का, श्री उमेश धाकड़ (बांगरोद) द्वारा घी एवं दूध 1100 रुपये का, श्री तेजराम सांखला द्वारा हरी सब्जियां 800 रुपये का, श्री नरसिंह कालजी सैलाना द्वारा हरी सब्जी 1000 रुपये का, श्री दिलीप पाटीदार (करिया) द्वारा देसी घी 15000 रुपये का, श्री बालकृष्ण तिवारी द्वारा गेहूं 2100 का एवं श्री कालू गहलोत रावटी द्वारा जैविक उत्पाद विक्रय किए गए।

जैविक हाट बाजार में कुल 53250 रुपये से अधिक के जैविक उत्पादों का विक्रय हुआ।

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अप्रैल माह में 64 गुम/अपहृत बालक–बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब,

19 माह में 830 बच्चों को परिजनों से मिलाकर लौटाई मुस्कान

रतलाम – पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार एवं पुलिस अधीक्षक रतलाम श्री अमित कुमार (भा.पु.से.) के कुशल निर्देशन में जिले में गुम एवं अपहृत बालक–बालिकाओं की शीघ्र दस्तयाबी हेतु “ऑपरेशन मुस्कान” अभियान दिनांक 01 अक्टूबर 2024 से निरंतर संचालित किया जा रहा है। बच्चों से संबंधित अपराधों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी अनुविभागीय अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को विशेष रूप से गुमशुदा एवं अपहृत बच्चों की खोजबीन कर उन्हें शीघ्र दस्तयाब करने के निर्देश प्रदान किए गए हैं। पुलिस टीमों द्वारा परिजनों के कथनों, तकनीकी विश्लेषण एवं मुखबिर तंत्र की सहायता से बच्चों की तलाश की गई। इस दौरान मध्यप्रदेश के अतिरिक्त गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से भी बच्चों को सुरक्षित दस्तयाब किया गया।
इस अभियान के अंतर्गत रतलाम पुलिस द्वारा अब तक उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए कुल 830 बच्चों (64 बालक एवं 766 बालिकाएं) को सुरक्षित दस्तयाब कर उनके परिजनों से मिलाया गया है, जिससे सैकड़ों परिवारों के चेहरों पर पुनः मुस्कान लौटाई। रतलाम पुलिस का दीर्घकालिक प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा है, जिसमें वर्ष 2015 से 2026 तक गुम/अपहृत बालिकाओं की औसत दस्तयाबी दर 98.14 प्रतिशत रही है।
वर्षवार आज की स्थिति में–
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वर्ष 2015 में 100 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2016 में 99.07 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2017 की 99.67प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2018 की 100 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2019 की 99.25प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2020 की 100 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2021 की 99.67 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2022 की 99.42 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2023 की 98.83 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2024 की 99.46 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2025 की 96.76 प्रतिशत दस्तियाबी रही
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वर्ष 2026 की 75.81 प्रतिशत दस्तियाबी रही
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतलाम श्री विवेक कुमार के मार्गदर्शन में एवं समस्त अनुविभागीय अधिकारियों के नेतृत्व में दिनांक 01 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान साइबर सेल, जेएबी शाखा एवं थाना स्तर पर गठित विशेष पुलिस टीमों द्वारा परिजनों के कथनों, तकनीकी विश्लेषण एवं मुखबिर तंत्र की सहायता से बच्चों की तलाश की गई। इस दौरान मध्यप्रदेश के अतिरिक्त गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी बच्चों को सुरक्षित दस्तयाब किया गया।
अप्रैल माह में कुल 64 गुम/अपहृत बच्चों को सुरक्षित दस्तयाब किया गया, जिनमें 62 बालिकाएं एवं 02 बालक शामिल हैं। सभी बच्चों को विधिसम्मत कार्यवाही पूर्ण कर सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।
रतलाम पुलिस की प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करना है। गुमशुदा या अपहृत बच्चों को शीघ्र खोजकर परिजनों से मिलाना एवं समाज में बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं विश्वास कायम करना पुलिस का सतत प्रयास है।
रतलाम पुलिस द्वारा आमजन से अपील की गई है कि किसी भी बालक/बालिका के गुम होने की स्थिति में तत्काल निकटतम पुलिस थाना, डायल 112 अथवा साइबर सेल से संपर्क करें, जिससे समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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प्रत्येक थाने में साइबर डेस्क संचालन, साइबर योद्धाओं को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

रतलाम |  पुलिस अधीक्षक रतलाम श्री अमित कुमार के निर्देशन में जिले में बढ़ते साइबर फ्रॉड एवं साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु प्रत्येक थाने पर साइबर डेस्क संचालित की जा रही है। आमजन की शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावशील निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी थानों पर प्रशिक्षित पुलिसकर्मी (साइबर योद्धाओं) की तैनाती की गई है, जिन्हें समय-समय पर अद्यतन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
इसी क्रम में दिनांक 01 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के मीटिंग हाल में एक साइबर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के प्रारंभ में पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार द्वारा उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइबर अपराधों के प्रति त्वरित कार्रवाई करने, पीड़ितों की ठगी गई राशि को अधिक से अधिक वापस दिलाने तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक साइबर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर पीड़ितों को राहत प्रदान की जाए।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री विवेक कुमार, उप पुलिस अधीक्षक महिला सेल श्री अजय सारवान एवं उप पुलिस अधीक्षक यातायात श्री आनंद सोनी भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में साइबर सेल प्रभारी उप निरीक्षक जीवन बारिया, प्रधान आरक्षक हिम्मत सिंह, आरक्षक राहुल पाटीदार एवं आरक्षक मोर सिंह डामोर द्वारा विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समन्वय पोर्टल का उपयोग, बैंकिंग समन्वय के माध्यम से ठगी गई राशि को होल्ड/रिफंड कराने की कार्यवाही, डिजिटल साक्ष्य संकलन एवं केस फॉलोअप की तकनीकी जानकारी दी गई।
रतलाम पुलिस द्वारा इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस बल को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है, जिससे साइबर अपराधों के विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
रतलाम पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल डायल 1930, नजदीकी पुलिस थाना या www.cybercrime.gov.in पर दर्ज करें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।

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