प्रकृति से जोड़ने का काम भी हमारे पूर्वजों ने किया,जल को बनाया नहीं जा सकता , जल को बचाया जा सकता -श्री परमार

जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन पर मनाया बावडी उत्सव, रंगोली, दीपोत्सव के साथ की गंगा आरती
क़यामपुर। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन अवसर पर बावडी उत्सव का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत कयामपुर में प्रसिद्ध सगस बावजी की बावड़ी एवं हजारी बाग की बावड़ी पर रंगोली बनाकर दीप प्रज्वलित कर गंगा आरती की गई।इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं पूर्व सरपंच जगदीश परमार ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जन अभियान परिषद जन-जन को जोडने का काम कर रहा है। धरती से निरंतर जल का हम दोहन कर रहे हैं, लेकिन इसको रिचार्ज करने में अभी तक आम जन जागरूक नहीं हुआ है। जिससे जल संकट की स्थिति भी हमें देखने को मिल सकती है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद ने प्राकृतिक धरोहर को सहेजने के लिए बावड़ियों पर उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। निश्चित ही आमजन प्राकृतिक धरोहर से जुड़कर कार्य करेगा। प्रकृति से जोड़ने का काम भी हमारे पूर्वजों ने किया है। जल को बनाया नहीं जा सकता है, जल को बचाया जा सकता है। हम सभी को अधिक से अधिक वर्षा के जल को सहेजने का काम करना चाहिए।
विकासखंड समन्वयक नारायणसिंह निनामा ने कहा कि तीन चरणों में मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान का आयोजन किया गया है। इन तीन चरणों में कलश यात्रा, सामूहिक श्रमदान, पेड़ों की पूजन, अभिषेक सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।कार्यक्रम का संचालन करते हुए परामर्शदाता हरिओम गंधर्व ने एवं दिलीप जैन ने व्यक्त किया। इस अवसर पर ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के पदाधिकारी, नवाकुर संस्थाओं के कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों, परामर्शदाता एवं सामाजिक कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित थे। उक्त जानकारी दशरथ लाल परमार ने दी।



