मंदसौर जिलासीतामऊ

46 साल पुराने नामांतरण विवाद में वर्तमान अधिकारी को घेरने की कोशिश, शिकायत के पीछे साजिश के आरोप

46 साल पुराने नामांतरण विवाद में वर्तमान अधिकारी को घेरने की कोशिश, शिकायत के पीछे साजिश के आरोप

सीतामऊ। करोड़ों रुपये की शासकीय जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई अब चर्चा में है। कार्रवाई से प्रभावित लोगों द्वारा SDM शिवानी गर्ग के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत से संबंधित मैसेज सोशल मीडिया और वाट्सऐप पर भी वायरल हो रहा है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

46 साल पुराने मामले में वर्तमान SDM को घेरा

लोकायुक्त में दी गई शिकायत में वर्ष 1980 से 1982 के बीच हुए पट्टा आवंटन और नामांतरण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। खास बात यह है कि जिन पुराने मामलों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उस समय SDM शिवानी गर्ग पदस्थ तो दूर, उनका जन्म भी नहीं हुआ था। ऐसे में दशकों पुराने मामले में वर्तमान अधिकारी का नाम जोड़े जाने को लेकर शिकायत की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

करोड़ों की सरकारी जमीन पर थी नजर

मामला सीतामऊ-लदूना मार्ग स्थित सर्वे क्रमांक 776 की करीब 2 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि यह बेशकीमती भूमि शासकीय चरनोई भूमि है। इस जमीन पर अवैध कॉलोनी, शोरूम और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित करने की तैयारी की जा रही थी। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जमीन को शासकीय घोषित किए जाने से ऐसे लोगों के मंसूबों पर पानी फिर गया।

पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो सामने आई जमीन की असलियत

प्रशासन द्वारा 1938-39 के मिसल बंदोबस्त से लेकर वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड तक की जांच की गई। रिकॉर्ड के परीक्षण में जमीन मूल रूप से शासकीय चरनोई भूमि पाई गई। SDM शिवानी गर्ग और तहसीलदार द्वारा की गई जांच के बाद शासन के हित में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

सीतामऊ में रहते कई शासकीय जमीनें कराईं अतिक्रमण मुक्त

SDM शिवानी गर्ग पिछले कुछ वर्षों से सीतामऊ में पदस्थ हैं। इस दौरान उन्होंने नगर सहित क्षेत्र के कई गांवों में शासकीय जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई की है। उनकी कार्यशैली की एक विशेष पहचान यह भी है कि वे आम लोगों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनती हैं और उनके निराकरण का प्रयास करती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों में उनकी सक्रियता और शिकायतों के निराकरण की कार्यशैली से वे काफी संतुष्ट हैं।

शिकायत की आड़ में दबाव बनाने की कोशिश?

पूरे मामले में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या शासकीय जमीन को लेकर चल रही प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करने और अधिकारी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से शिकायत को माध्यम बनाया गया है। हालांकि लोकायुक्त शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच का विषय है, लेकिन 1980-82 के पुराने मामले में वर्तमान SDM को घसीटे जाने से शिकायत की मंशा पर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सामने आई शिकायत को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि कहीं यह पुराने मामले की आड़ में वर्तमान अधिकारी पर दबाव बनाने की कोशिश तो नहीं।

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