हम रोज पड़ोसी के घर दुकान साफ करने नहीं जाते तो दुसरे को सुधारने में अपना समय क्यों बर्बाद कर रहे ,अपने अच्छाई पर लगी धुल साफ करें- संत श्री श्वासानंद जी

कथा के द्वितीय दिवस श्री घाटिया श्री कामरिया एवं श्री मांदलिया ने कुलदेव, पितृदेव, इष्ट देव , श्रीमद्भागवत पुराण गुरुदेव का पूजन लाभ लिया
सीतामऊ। पितृ पूजन एवं मोक्षदायिनी श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पोरवाल समाज अध्यक्ष श्री कैलाशचंद्र घाटिया श्री मदनलाल कामरिया बाजखेड़ी, लक्ष्मीनारायण मांदलिया एवं परिवार को पितृ देव श्रीमद्भागवत पुराण गुरुदेव पूजन महा आरती का लाभ प्राप्त हुआ। इस अवसर पर स्वर्णकार समाज ने गुरुदेव कथा प्रवक्ता संत श्री श्वासानंद जी महंत श्री जितेंद्र दास जी का स्वागत वंदन अभिनंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा कि ज्ञान गंगा प्रवाहित करते हुए संत श्री ने भगवान श्रीकृष्ण कि पांडवों कि परिक्षा का प्रसंग में कहा कि अर्जुन ने जंगल में एक दो मुख का हाथी, दुसरे भीम ने को तालाब किनारे पेड़ पर बगुले सफेद रंग में पंख पर राम नाम लिखे दिखे तीसरे भाई सहदेव को तीन कुएं दिखे दोनों कुएं भरे हुए बीच का खाली दिखा।चौथे भाई नकुल ने देखा कि पहाड़ से बहुत बड़ा पत्थर गिर रहा वह तीनके से रुक गया।दो मुख का हाथी का अभिप्राय एक मुंह से दो तरह कि बातें इस कलयुग में देखने को मिलेंगे। दुसरा बगुले कि तरह उपर से शुद्ध साफ अच्छे का दिखावा करने वाला रावण उपर से ब्राह्मण और अंदर से राक्षस था, आज का युवा वर्ग बहु मोबाइल देखने में व्यस्त हैं।जीवन बर्बाद कर रहे हैं। भागवत शास्त्र प्रत्येक व्यक्ति कों सुधारने तारने आत्मा का रंग सुधार और आगे बढ़ाने का सार है।दो कुए भरे एक खाली का मतलब तीन भाइयों पर धन सम्पदा होगी पर तीसरे मझला गरीब है उसकी मदद नहीं करेंगे करेंगे तो भी पत्नी नहीं करने देगी।
एक गाय बैल को चाट रहे हैं। इससे अभिप्राय कलयुग में दहेज लेने और बफर भोजन कि प्रथा सामने वाले को बर्बाद करने वाली होगी। बहुत बड़ा पत्थर पहाड़ से आते देखा वह घास के तिनके से रुक गया अभिप्राय कोई भी बड़े बड़ा काम छोटे प्रयास से हो जाएगा बस सबको मन लगाकर करना होगा भगवान भाव प्रेम का भुखा है।
कथा में आगे ज्ञान श्रवण कराते हुए कहा कि राजा परीक्षित के सात दीप नौ खंड का राज्य था। जो हर व्यक्ति के शरीर में सात दीप और नौ खंड नौ द्वार है। परि क्षित जो परिक्षा में शिक्षित थे। उदाहरण देते हुए कहा कि एक सेठ था के पास बीस पिढी का धन था पर वह इक्कीसवीं पिढ़ी के लिए चिंता कर रहा था जब वह एक संत के पास गया वहां भोजन प्रसाद किया और पूछा आपके पास कितनी व्यवस्था है तो संत बोले मेरे पास तीन दिन कि व्यवस्था है।फिर आगे किसने देखा अगली व्यवस्था भगवान करेंगे।सेठ को समझ आ गया कि कल का क्या भरोसा। संत श्री ने कहा कि जीवन केवल धन धन में नहीं अपने को सुखी रखने का सुत्र होने चाहिए। आजकल कुछ लोग अपना समय लोगों कि चुगली बुराई करने के लिए लगें रहते हैं।इसको निपटा दूंगा वो कर दूंगा वह यह नहीं जानता है कि दुसरे कि गलती ढुढने अपना दोष गलती नहीं देखते और अपने आप को सही बताते यही सास बहू भी करती है जब दोनों सही है तो फिर झगड़ा कैसे हो रहा है।हम रोज सुबह उठते है तो पड़ोसी का घर दुकान कि सफाई नहीं करते हैं अपने घर दुकान कि सफाई कर सुंदर बनाते हैं फिर हम दुसरे कि बुराई या उसकी बुराई बताने में समय क्यों बर्बाद करते हैं। अपने अंदर अच्छाई पर लगी धुल को सफाई करने में समय लगाना चाहिए।हमको जब भी समय मिले हरि का दर्शन अंतर्मन से ध्यान करें।तो वह हमारी रक्षा करें जब हम कोई जमा भी नहीं करते तो उससे मांगने का अधिकार भी नहीं है।हरि से ऐसा तार जोड़े कि हर का हर पल साथ मिले
जब तक जीव बंधन में बंधा हुआ है वह भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है।एक हजार बार बद्रीनाथ जा कर आ गया उससे पूछा तो क्या बद्रीनाथ को अंतर आत्मा में उतार कर आया वह बोलता है कि वहां कितने बड़े पहाड़ है कितनी हरियाली कितना सुंदर मंदिर है क्या सजावट कि गई इतनी भीड़ थी कि दो हजार रुपए देकर मंदिर तक पहुंचे पर क्या भगवान के दर्शन किए फिर बोला कि इतनी भीड़ थी दुर से मंदिर के हाथ लगा कर आ गये फिर किसलिए गये थे। इतना खर्च कर कुछ नहीं मिला केवल नयन सौंदर्य हुआ यदि इसका छोटा सा अंश भाव से भूखे को भोजन करा देते तो पूण्य मिल जाता।भागवत शास्त्र कथा पोथी नहीं पुराण नहीं भगवान श्री कृष्ण कि वांग्मय स्वरूप है। इसका ज्ञान भाव पूर्वक सुनने समझने वाले को भगवत कि प्राप्ति होती है।आगे कि कथा प्रसंग में शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को कौरव पांडव एवं सेन भगत कि भक्ति कि कथा श्रवण का सुनाया।

इस अवसर पर कथा प्रवक्ता सुश्री प्रिया किशोरी और राधे राधे परिवार तथा वरिष्ठ समाजसेवी विवेकानंद स्कूल संचालक श्री अशोक जैन, समाजसेवी श्री रामदयाल घाटिया एवं महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती अनुसुइया घाटिया डॉ मदनलाल व्यास एवं भक्त शिष्यों द्वारा स्वागत वंदन अभिनंदन किया गया।



