
कम बारिश चंबल योजना की सुस्ती और नदियों से खेतों में धड़ल्ले से चलती मोटरें बढ़ा सकती है पेयजल संकट की मुसीबतें
✍️ राजेन्द्र देवड़ा पत्रकार
आलोट। इन्दौर में निजी बोरिंग पर प्रतिबंध तों रतलाम जिले के आलोट तहसील मुख्यालय के गांधी चौक बस स्टैंड पर बनीं सालासर काॅलोनी में एक निजी भवन में बोरिंग पिछले साल की पेयजल परेशानी से नही लिया सबक जिले में औसत से कम बारिश से भूजल स्तर पर बढ़ता दबाव और पेयजल व्यवस्था को लेकर सामने आ रही चुनौतियां आने वाले समय में गंभीर जल संकट का संकेत दे रही है। इसके बावजूद भी यदि समय रहते भूजल संरक्षण और जल स्रोतों के नियमन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इस बार आलोट और आसपास के क्षेत्रों के सामने स्थिति और कठिन हो सकती है। सवाल यह है कि संभावित संकट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन अभी से सख्ती क्यों नहीं दिखा रहा है….?
जबकि रतलाम जिले में कम वर्षा और भूजल स्त्रोत के अत्यधिक दोहन को देखते हुए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी तथा एसडीएम दंडाधिकारियों ने निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी क्यों नहीं किया जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य गिरते जलस्तर को देखते हुए आगामी समय में पेयजल संकट की आशंका को कम करना है। इन्दौर प्रशासन ने संभावित समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। ऐसे में रतलाम जिले में भी यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशासन जल संकट गहराई का इंतजार कर रहा है।
रतलाम जिले में कम बारिश फिर भी भूजल दोहन पर नियंत्रण क्यों नहीं….?
रतलाम जिले में इस वर्ष औसतन से कम बारिश होने की स्थिति में भूजल का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। बारिश कम होने से जल स्रोतों के पुनर्भरण पर असर पड़ सकता है, जबकि लगातार बोरिंग और मोटरों के जरिए पानी निकालने से भूजल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे हालात में प्रशासन को जिले की वास्तविक स्थिति का आंकलन कर यह तय करना चाहिए कि किन क्षेत्रों में निजी बोरिंग पर नियंत्रण, नए नलकूप खनन पर रोक अथवा अन्य प्रतिबंधात्मक कदम जरुरी है। यदि अभी से जल स्रोतों की निगरानी नहीं की गई तो गर्मी के मौसम में पेयजल की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों और किसानों पर पड़ेगा। आलोट क्षेत्र के आसपास बहनें वाले नदी नालों से कृषि भूमि की सिंचाई के लिए विधुत मोटरों से पानी निकाले जाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में भूजल और उपलब्ध जल स्रोतों पर कितना दबाव पड़ रहा है।इसकी जांच जरुरी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन इलाकों में भूजल स्तर की निगरानी की जा रही है या नहीं और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
इन्दौर में प्रतिबंध, रतलाम जिले में भी कार्रवाई की जरूरत…..!
इन्दौर जिला प्रशासन ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 और संशोधन अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया है। आदेश में नियमों के उल्लंघन पर मशीनें जब्त करने और नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है। हालांकि शासकीय योजनाओं के अंतर्गत होने वाले नलकूप खनन को छुट के दायरे में रखा गया है। रतलाम जिले में भी प्रशासन को भूजल स्तर वर्षा के आंकड़ों पेयजल स्रोतों की स्थिति और भविष्य की जरूरतों का आंकलन कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में जल अभाव की स्थिति बन रही है तो लागू कानूनों के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए साथ ही अवैध दोहन अनावश्यक जल बर्बाद और पेयजल स्रोतों पर बढ़ते दबाव की निगरानी भी जरूरी है।
प्रशासन के सामने बड़े सवाल….!
कम बारिश के बाद रतलाम जिले में भूजल स्तर की ताजा स्थिति क्या है….?
पिछले वर्ष सामने आई पेयजल समस्याओं के बाद इस बार के लिए क्या तैयारी की गई है……?
क्या रतलाम जिले में जल संकट वाले क्षेत्रों में निजी नलकूप खनन को नियंत्रित करने के लिए कोई योजना बनाई जा रही है…?
प्रशासन को अब स्पष्ट करना चाहिए कि जिले में पेयजल सुरक्षा के लिए क्या कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं….?
यदि भूजल संरक्षण के लिए समय रहते उचित निर्णय नहीं लिए गए तो आने वाली गर्मी में आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इन्दौर की तरह रतलाम में भी परिस्थितियों का वैज्ञानिक आंकलन कर समय रहते निर्णय लेना जरूरी है। आखिर पेयजल संकट से निपटने की तैयारी संकट आने के बाद होगी या प्रशासन अभी से जागेगा….!



