
31 को नपं अध्यक्ष श्री परमार के नेतृत्व में लोह पुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण, जनप्रतिनिधि गणमान्य जन कई हस्तियां होगी शामिल
ताल ब्यूरो चीफ शिवशक्ति शर्मा ,सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के पश्चात देश की सैकड़ों रियासतों का एकीकरण कर भारत की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनका दृढ़ संकल्प, राष्ट्र के प्रति समर्पण और दूरदर्शी नेतृत्व आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।नगर परिषद अध्यक्ष मुकेश परमार के नेत्रत्व में 31 अक्टूबर शनिवार को लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की भव्य प्रतिमा का अनावरण समारोह कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल डॉ. थावरचंद जी गेहलोत एवं राज्यसभा सांसद तथा भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री सुश्री कविता जी पाटीदार कि अध्यक्षता में एवं विशिष्ट अतिथियों गणमान्य जनों गरिमामयी उपस्थिति आयोजित किया जाएगा।
प्रतिमा अनावरण समारोह को भव्य, गरिमामय एवं सफल बनाने के उद्देश्य से बुधवार को ताल नगर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, आवश्यक व्यवस्थाओं, आयोजन की तैयारियों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में ताल नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मुकेश परमार, भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री राजेश परमार, पाटीदार समाज संगठन के जिला अध्यक्ष श्री अमृत पटेल, भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष श्री हरिराम शाह (पाटीदार), समाजसेवी श्री ईश्वरलाल पाटीदार, पाटीदार समाज संगठन के प्रांत प्रतिनिधि श्री हीरालाल जी पाटीदार, डॉ. रामदयाल पाटीदार, श्री जादूराम पाटीदार, श्री राजाराम पाटीदार, श्री कन्हैयालाल पाटीदार एवं श्री शांतिलाल पाटीदार सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सरदार वल्लभभाई पटेल का अनमोल विचार जो हम सबको प्रेरणा प्रदान करता है अखंड भारत के अमर शिल्पी“कठिन से कठिन समय में भी धैर्य और अडिग संकल्प ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति होती है।”
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स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री एवं उप-प्रधानमन्त्री, भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्र-निर्माण के प्रतीक हैं।
देश के एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान
आज़ादी के समय भारत 560 से अधिक रियासतों में बंटा हुआ था। विदेशी ताकतें देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देख रही थीं, लेकिन सरदार पटेल के पास एक अखंड और सशक्त भारत का अटूट संकल्प था। अपनी अदम्य कूटनीति, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रभक्ति के बल पर उन्होंने बिना किसी बड़े रक्तपात के सभी रियासतों का भारत संघ में विलय कराया। जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसे जटिल मामलों में उनका दूरदर्शी व कठोर निर्णय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।
राष्ट्रीय हित और सुशासन में अतुलनीय सहयोग –
अखंड भारत का निर्माण: आज हम जिस विशाल, समृद्ध और सशक्त भारत को देखते हैं, उसकी नींव सरदार पटेल ने ही रखी थी।
प्रशासनिक ढांचा (ICS/IAS): भारत की प्रशासनिक सेवाओं को देश की ‘स्टील फ्रेम’ बनाने का श्रेय सरदार पटेल को ही जाता है, जिसने आज तक देश की स्थिरता को बनाए रखा है।
किसान आंदोलन और स्वाभिमान: बारडोली सत्याग्रह से लेकर आम जनमानस को राष्ट्रहित से जोड़ने तक, सरदार पटेल का जीवन राष्ट्रसेवा और सादगी का अद्वितीय उदाहरण रहा है।
सरदार पटेल का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्रहित से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता। उनके दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस के बिना अखंड भारत की कल्पना असंभव थी। राष्ट्रीय एकता के इस महान नायक के चरणों में शत-शत नमन।
मुकेश मांगीलालजी परमार अध्यक्ष – नगर परिषद, ताल की उपस्थित महानुभावों से विनम्र अपील – एक पेड़ माँ के नाम अवश्य लगाये एवं उसको जीवित रखने का संकल्प लेने की जवाबदेही से अवगत हो।



