राजस्थानकोटा

पशुपालन और आजीविका विकास से आत्मनिर्भर बनेंगी ग्रामीण महिलाएँ 

पशुपालन और आजीविका विकास से आत्मनिर्भर बनेंगी ग्रामीण महिलाएँ 

टोंक (राजस्थान)।

ग्रामीण महिलाओं एवं किशोरियों के स्वावलंबन, नेतृत्व क्षमता और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के सुदृढ़ीकरण की दिशा में टोंक ज़िले की ग्रामीण विकास शोध एवं तकनीकी केंद्र (GVSTK) संस्था परिसर में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में ‘पहल सामाजिक संस्था’ (टिमरनी, मध्य प्रदेश) के कार्यकर्ता, आजीविका विशेषज्ञ एवं बंधुत्व फेलो लेखक राकेश यादव ‘घूमन्तु’ ने मुख्य विषय विशेषज्ञ के रूप में शिरकत की और उपस्थित प्रतिभागियों को पशुपालन व आजीविका प्रबंधन के व्यावहारिक गुर सिखाए।

10 गाँवों की 38 महिलाएँ व किशोरी प्रतिनिधि हुईं शामिल

कार्यशाला में टोंक ज़िले के 10 अलग-अलग गाँवों की कुल 38 महिला प्रतिनिधियों एवं किशोरियों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से मालपुरा ब्लॉक के विभिन्न गाँवों से आईं, 38 नेतृत्वकर्ता महिलाएँ शामिल थीं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना और ग्रामीण नेतृत्व को निखारना रहा।

पशुपालन और SHG सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा सत्र

कार्यशाला को संबोधित करते हुए आजीविका विशेषज्ञ राकेश यादव ‘घूमन्तु’ ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पशुपालन और स्वयं सहायता समूह हैं। यदि महिलाएँ वैज्ञानिक तरीके से पशुधन प्रबंधन, नस्ल सुधार, उचित पोषण और समय पर टीकाकरण को अपनाएं, तो पारिवारिक आय में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने प्रतिभागियों को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया:

पशुधन एवं आहार प्रबंधन- स्थानीय संसाधनों से संतुलित पशु आहार तैयार करना और बीमारियों से बचाव के उपाय।

SHG का सुदृढ़ीकरण – समूहों में नियमित बचत, आंतरिक लेन-देन और स्वरोज़गार की नई योजनाओं का क्रियान्वयन।

ग्रामीण नेतृत्व विकास – निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं और किशोरियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

अनुभव साझा कर बढ़ा उत्साह

प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने अपने समूहों की कार्यप्रणाली और पशुपालन के पारंपरिक तरीकों पर चर्चा की। मालपुरा ब्लॉक की प्रतिभागी महिलाओं ने इस एक दिवसीय सत्र को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें न केवल पशुपालन की नई तकनीकों की जानकारी मिली, बल्कि अपने गाँव और समूह में नेतृत्व करने का नया आत्मविश्वास भी हासिल हुआ।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक संस्था GVSTK के प्रतिनिधियों ने ‘पहल’ संस्था एवं विषय विशेषज्ञ राकेश यादव ‘घूमन्तु’ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का यह अंतर-राज्यीय अनुभव साझाकरण ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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