दीपावली-नवरात्रि पर भी आर्थिक संकट में महिलाएं, मानदेय और कमीशन के लिए भटक रहीं रसोइया बहनें व महिला PDS विक्रेता : प्रदेश सचिव कुलदीप सेन
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के दावों पर सवाल, जून 2026 से भुगतान लंबित; PDS विक्रेताओं के कमीशन में कटौती और देरी का आरोप

दीपावली-नवरात्रि पर भी आर्थिक संकट में महिलाएं, मानदेय और कमीशन के लिए भटक रहीं रसोइया बहनें व महिला PDS विक्रेता : प्रदेश सचिव कुलदीप सेन
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के दावों पर सवाल, जून 2026 से भुगतान लंबित; PDS विक्रेताओं के कमीशन में कटौती और देरी का आरोप
जावद -प्रदेश की भाजपा सरकार एक ओर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर महिला समूह संचालक, रसोइया बहनें और महिला सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) विक्रेता भुगतान संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के समय भी मेहनतकश महिलाओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर केश शिल्पी कांग्रेस मध्यप्रदेश के प्रदेश सचिव एवं युवा कांग्रेस नेता कुलदीप सेन ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की है।
कांग्रेस नेता सेन ने कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत कार्यरत महिला समूहों और रसोइया बहनों को जून 2026 से मानदेय एवं भोजन पकाने की राशि नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लंबे समय तक मेहनताना नहीं मिलने से महिलाओं पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल है कि जब घर चलाने के लिए समय पर पैसा नहीं मिल रहा, तो महिलाएं दीपावली का त्योहार कैसे मनाएंगी?
कांग्रेस नेता कुलदीप सेन ने कहा मध्यप्रदेश में इस योजना का संचालन करने वाली 2लाख 32हजार रसोइया बहने है
मध्याह्न भोजन की रसोइया को ₹4,000 और आंगनवाड़ी में खाना बनाने वाली महिलाओं को मात्र ₹500 मासिक, क्या यही है भाजपा सरकार का महिला सशक्तिकरण?
महिलाओं से काम पूरा, लेकिन मेहनताना देने में सरकार पीछे, यह महिलाओं की मेहनत का अपमान और शोषण है।में रसोईया बहनों कामहंगाई को देखते हुए सम्मानजनक मानदेय मिलना चाहिए
उन्होंने महिला PDS विक्रेताओं की समस्या उठाते हुए कहा कि उनके अनुसार, पहले ₹10,500 मासिक कमीशन पर आवंटित दुकानों का कमीशन बिना पूर्व सूचना और आदेश की जानकारी दिए घटाकर ₹8,500 कर दिया गया है, जबकि यह राशि भी समय पर नहीं मिल रही। वहीं, वर्ष 2022 के बाद आवंटित कुछ दुकानों को मात्र ₹5,500 मासिक कमीशन में संचालित करना पड़ रहा है। इतने कम कमीशन में दुकान का संचालन और परिवार का खर्च चलाना महिला विक्रेताओं के लिए बड़ी चुनौती है। अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी PDS विक्रेता को भी प्रति क्विंटल 200से 250 तक कमीशन मिलना चाहिए
कुलदीप सेन ने सवाल किया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रचार-प्रसार करने वाली सरकार जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं की समस्याओं पर ध्यान क्यों नहीं दे रही? उन्होंने कहा कि महिला समूह संचालक, रसोइया बहनें और PDS विक्रेता सरकारी योजनाओं को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।
प्रदेश सचिव सेन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और संबंधित विभाग के मंत्रियों से मांग की कि लंबित मानदेय एवं भोजन पकाने की राशि तत्काल जारी की जाए, PDS कमीशन में कटौती के आधार और आदेश की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा सभी पात्र विक्रेताओं को नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के दावे तभी सार्थक होंगे, जब उनकी मेहनत का पैसा समय पर मिलेगा और त्योहारों के अवसर पर उन्हें आर्थिक तंगी से नहीं जूझना पड़ेगा।
इन सब कामकाजी महिलाओं ने कई बार हड़ताल ज्ञापन धरना प्रदर्शन करने के बाद मोहन सरकार मौन है



