परिवार ने दुख की घड़ी में लिया साहसिक निर्णय, स्व प्रहलाद जोशी के नेत्रदान से दो जरूरतमंदों को मिलेगी नई दृष्टि

परिवार ने दुख की घड़ी में लिया साहसिक निर्णय, स्व प्रहलाद जोशी के नेत्रदान से दो जरूरतमंदों को मिलेगी नई दृष्टि
गरोठ। मानव जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि अपने जाने के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला भर जाने में है। गरोठ के ब्राह्मण समाज के प्रतिष्ठित एवं सेवाभावी व्यक्तित्व स्वर्गीय श्री प्रहलाद जोशी देवलोक गमन के बाद भी समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण छोड़ गए। उनके निधन के पश्चात परिवारजनों ने शोक की विकट घड़ी में साहसिक एवं अनुकरणीय निर्णय लेते हुए उनका नेत्रदान करवाया। इस पुनीत कार्य से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में उजियारा आने की उम्मीद है।
स्वर्गीय श्री प्रहलाद जोशी, स्वर्गीय मगनलाल जोशी के सुपुत्र तथा जितेंद्र, हरीश एवं सुभाष जोशी के पूज्य पिताजी थे। वे सहज, सरल एवं सेवाभावी व्यक्तित्व के धनी थे। धर्म-कर्म में उनकी गहरी आस्था थी तथा वे गौसेवा सहित विभिन्न सेवा कार्यों में सदैव अग्रणी रहते थे। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, सामाजिक सरोकार और सेवा भावना का अद्भुत समन्वय था।
परिवार के इस दुखद अवसर पर भी परिजनों ने मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। भारत विकास परिषद के नरेंद्र चौधरी एवं सचिव हेमंत पाटीदार सहित परिषद के सदस्यों द्वारा नेत्रदान के लिए परिवारजनों को प्रेरित किया गया। प्रेरणा से प्रभावित होकर परिजनों ने सहमति प्रदान की और इस पुनीत सेवा कार्य को संपन्न कराया।
नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए कोटा से रात्रि 12 बजे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलवंत गोड गरोठ पहुंचे। कोटा शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से नेत्र उत्सर्जन की सेवा प्रक्रिया सक्रियता एवं संवेदनशीलता के साथ पूर्ण की गई। प्राप्त कॉर्निया को सुरक्षित रूप से नेत्र चिकित्सालय, इंदौर भेजा गया, जहां आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया के पश्चात जरूरतमंदों को दृष्टि प्रदान करने की दिशा में इसका उपयोग किया जाएगा।
भारत विकास परिषद द्वारा बताया गया कि गरोठ में वर्तमान सत्र का यह दूसरा नेत्रदान है, जबकि परिषद के प्रयासों से अब तक कुल 20 नेत्रदान संपन्न हो चुके हैं। यह उपलब्धि समाज में बढ़ती सेवा भावना और नेत्रदान के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।
स्वर्गीय श्री प्रहलाद जोशी का नेत्रदान निश्चित रूप से समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश है। उन्होंने जीवनभर सेवा की भावना को महत्व दिया और जाते-जाते भी अपने नेत्रों के माध्यम से दो अंधेरी जिंदगियों में उजाला करने का माध्यम बन गए। उनका यह पुण्य कार्य परिवार के साथ-साथ पूरे समाज के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।
इस अवसर पर भारत विकास परिषद के नरेंद्र चौधरी, सचिव हेमंत पाटीदार, सुरेश शर्मा, रमेश शर्मा सहित स्वर्गीय श्री प्रहलाद जोशी के सुपुत्र जितेंद्र, हरीश, सुभाष जोशी एवं अन्य परिजन उपस्थित रहे।
भारत विकास परिषद ने समाजजनों से अपील की कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और मृत्यु के बाद अपने नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि का उजाला लाने में सहभागी बनें।
“अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए कुछ कर जाते हैं, वही सच्ची सेवा और मानवता की मिसाल बनते हैं।”



