
धर्मगुरु सुदीप नाथ और शोधार्थी राघव नाथ की ऐतिहासिक मुलाकात, रुद्रज ब्राह्मण परंपरा पर हुई गहन चर्चा
हेलाकाडी, असम
नाथ संप्रदाय के प्राचीन इतिहास और रुद्रज ब्राह्मण की पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में धर्मगुरु सुदीप नाथ से मिलने के लिए जाने-माने शोधार्थी राघव चंद्र नाथ हाइलाकांदी जिले से उनके निवास पर पहुंचे।
शोधार्थी राघव चंद्र नाथ पिछले कई वर्षों से नाथ संप्रदाय के इतिहास, कृष्टि और संस्कृति पर गहन अध्ययन कर रहे हैं। धर्मगुरु सुदीप नाथ ने उनके विनम्र और सौजन्यपूर्ण व्यवहार की सराहना की। दोपहर के भोजन के बाद दोनों के बीच घंटों तक शास्त्रार्थ चला।
चर्चा का केंद्र बिंदु रहा – बिन्दुज नाथ ही रुद्रज ब्राह्मण हैं, इसके ऐतिहासिक प्रमाण क्या हैं?
धर्मगुरु सुदीप नाथ ने कहा कि नाथ समाज की पहचान को लेकर भ्रांतियां हैं, पर ग्रंथों में सत्य स्पष्ट है। धर्मगुरु सुदीप नाथ ने बल्लाल चरित और अन्य प्राचीन ग्रंथों के आधार पर प्रमाण रखे कि बिन्दुज नाथों को रुद्रज श्रेणी का ब्राह्मण कहा गया है।
धर्मगुरु ने कहा, “हमारे समाज का इतिहास आज की धारणा से तय नहीं होगा। प्राचीन ग्रंथ, कुल-परंपरा, उपनयन-संस्कार, वैदिक आचार और पौरोहित्य परंपरा को साथ रखकर ही सत्य सामने आएगा।”
दोनों ने तय किया कि इस विषय पर और गहरा शोध किया जाएगा। इसके लिए प्रसिद्ध ग्रंथकार उपेन्द्र कुमार देवनाथ की पुस्तकों और त्रिपुरा रुद्रज ब्राह्मण पुरोहित संघ के अध्यक्ष डॉ. दिलीप नाथ से सहयोग लिया जाएगा।
अंत में धर्मगुरु सुदीप नाथ ने कहा कि शिव कृपा से नाथ समाज की प्राचीन परंपरा और अधिक सुदृढ़ होगी।



