कृषि दर्शनमध्यप्रदेशरतलाम

अल्प वर्षा को देखते हुए कृषि विभाग के दल ने खरीफ फसलों का किया निरीक्षण

सोयाबीन कपास एवं मक्का फसल में रोग एवं कीट नियंत्रण के लिए किसानों को दी सलाह

भ्रमण के दौरान विभिन्न फसलो का अवलोकन किया गया, जिसमें सोयाबीन की फसल में कहीं-कहीं पर पीला मोजैक तथा एनश्रेक्नोज बिमारी की समस्या दिखाई दी जिसके नियंत्रण के लिए थायोमिथोक्सम + लेम्बड़ा सायहेलोथ्रिन 125 मि.ली. / हेक्टेयर एवं ट्यूबकोनजोल 25.9% EC 625 ML/हेक्टेयर छिड़काव करने की सलाह दी तथा कपास की फसल में रस चूसने वाले कीट का प्रकोप देखा गया जिसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड़ 17.8% SL का 80 मि.ली. मात्रा का प्रति एकड 150-200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करने की सलाह दी गई।

मक्का की फसल में फाल आर्मी वर्म का प्रकोप देखा गया जिसके नियंत्रण के लिये इमामेक्टिन बेंजोएट 5% को 80 से 100 ग्राम दवा का प्रति एकड 150-200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करने की सलाह दी गई तथा वर्तमान समय में वर्षा की कमी को देखते हुए जिन किसानों के पास सिंचाई करने के संसाधन उपलब्ध हैं (जैसे स्प्रिंकलर, ड्रिप, मिनी स्प्रिकंकलर आदि) उपकरणो से फसलों में जीवन रक्षक सिंचाई करने की सलाह दी गई।

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